रूठा है तो मना लेंगे.. देके ‘खिलौना’ बहला लेंगे

बरेली। Updated Sat, 11 Nov 2017 02:00 AM IST
If you are Rutha, then you will celebrate .. Deka will play 'toy'
राजनी‌िततिक समीकरण्‍ा
रूठा है तो मना लेंगे.. बिगड़ा है तो बना लेंगे.. रोता है तो हंसा लेंगे.. फिर भी न माना तो देके खिलौना बहला लेंगे..। भाजपा में मेयर टिकट को लेकर उफना ‘ज्वार-भाटा’ 
शांत करने के लिए लगता है कि शीर्ष नेताओं ने ‘ज्वार-भाटा’ फिल्म को ही आधार बनाया है। फिल्म में हीरो धर्मेंद्र पर फिलमाया गाना मौजूदा हालात पर एकदम सटीक बैठ भी रहा है। यहां अब हीरोइन की जगह भाजपा प्रत्याशी टीम और दिल्ली-लखनऊ से आए दिग्गज नेता हैं और रूठे हीरो की जगह टिकट कटने से उदास दावेदार और कैडर वाले हैं। रूठने-मनाने के इस खेल को चुपके-चुपके खेला जा रहा है, इसलिए साफ है कि प्रत्याशी खेमा और दिग्गज इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हैं। मगर सच्चाई यह है कि नामांकन कराने के बाद से शुक्रवार आधी रात तक रूठों को मनाने की पुरजोर कोशिश जारी थी।
मनाने के तरीके रूठे हुए दावेदारों की हैसियत, उनके जनाधार, पकड़ और दिग्गजों में पैठ के हिसाब से तय किए गए हैं। यदि किसी का जनाधार और दिग्गजों में पैठ तगड़ी है तो उसे कहीं दूसरी जगह ‘एडजस्ट’ करने का ‘खिलौना’ दिया जा रहा है। यदि कैडर और ऊपर तक पहुंच वाला है तो कहीं एडजस्ट करके दूसरे और भी सम्मान से नवाजने का आश्वासन दिया जा रहा है। ‘चहेते’ और ‘जबर्दस्ती के दावेदार’ तो मनने को तैयार ही बैठे थे। कई चुनावी कैंप में हाजिरी देने पहुंच भी गए। उन्हें सिर्फ अपने चाहने वाले दिग्गज से मतलब है। यह दीगर बात है कि कुछ अपने ‘हितों’ से जुड़े हैं तो कई नारे किसी के लगाएंगे और सहयोग किसी को करेंगे।
डॉक्टर दावेदारों पर बहुत दबाव है। उन्हें पार्टी के अस्तित्व और सम्मान का हवाला देकर मनाया जा रहा है, मगर उनकी निष्ठा अब अपनी कम्युनिटी के प्रति ज्यादा दिख रही है। उनका मानना है कि इस बार चुनाव बंटवारे में बरेली से लेकर दिल्ली-लखनऊ तक के दिग्गजों ने उन्हें नजरंदाज कर दिया तो अब वे अपनी कम्यूनिटी की ताकत के जरिए अपना आधार मजबूत बनाकर दिखाएंगे। मौजूदा हालात में कम्यूनिटी वाले एक दिग्गज की खरी-खोटी बातें और दुत्कार भी उन्हें अच्छी लगने लगी हैं। एक डॉक्टर नेता तो खुले बोल रहे हैं कि इससे तो उनकी हेकड़ी और अकड़ अच्छी थी। रातोंरात बदलती इस हवा से कम्यूनिटी वाले नेता जी की बरसों से बिगड़ी छवि तेजी से सुधरती जा रही है, जो भाजपाइ खेमें के लिए सिरदर्दी की वजह भी है।
यही वजह है कि गांधीनगर में कैडर वालों के घर में धर्मकांटा, राजेंद्र नगर और इस पूरे इलाके के संघ-संगठन वालों की ‘पंचायत’ बृहस्पतिवार रात में ही निपटा ली गई। उसमें भाजपाई टीम ने विरोधी हेकड़ नेता की ज्यादतियों और अकड़ का हवाला देकर अब हर हाल में हिसाब चुकता करने का रोना रोया। इस पर कैडर वाले कुछ पल के लिए ‘इमोशनल’ भी हुए। एक पूर्व मेयर के घर जाकर उनके बेटे का कहीं और ध्यान रखने का वादा करके उनका दिल खुश करने का प्रयास भी हुआ। वे चाह भी रहे थे कि घर बैठे समय बीत गया, कोई मान मनौव्वल तो करे।
दूसरे पूर्व मेयर के घर जाकर सहयोग के उन्हें मनाया तो वे हमेशा की तरह सरलता से वे राजी हो गए। शायद यही वजह रही कि शाम तक भाजपाई खेमा थोड़ा सहज महसूस करके दावा करने लगा कि दावेदारों और कैडर में कोई रूठा ही नहीं है। इस पर बरेली शहर की राजनीतिक नब्ज समझने वालों की सलाह है कि यदि भाजपाई टीम यह बात माहौल बनाने को कह रही है तो अच्छा है, मगर यह मुगालता पाल लिया है तो उचित नहीं होगा।

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