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Bareilly News: स्वदेशी विधि से होगी अंडों की परख, विकसित होंगे स्वस्थ चूजे
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बरेली। पोल्ट्री फार्म के अंडों की गुणवत्ता और विकसित होने वाले चूजे स्वस्थ रहें, इसकी जांच के लिए केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने स्वदेशी प्लेटफाॅर्म बनाया है। जो दोषपूर्ण अंडों की जांच में सक्षम है। उप महानिदेशक डॉ. राघवेंद्र भट्टा ने डिजाइन रिलीज की।
वैज्ञानिक डॉ. जयदीप रोकाड़े के मुताबिक अंडों की गुणवत्ता जांच के लिए देश में उपलब्ध तकनीकी की लागत करीब दस लाख रुपये से ज्यादा है। लिहाजा, तमाम पोल्ट्री किसान अंडों की जांच नहीं कर पाते और उससे विकसित चूजे भी अस्वस्थ होते हैं। पोषण के लिए चारा, स्वास्थ्य लाभ के लिए अतिरिक्त खर्च किसान उठाते हैं। जो भविष्य में आर्थिक प्रगति में बाधक होता है। परेशानी से निजात दिलाने के लिए स्वदेशी डिजाइन के विकास पर कार्य शुरू हुआ। इसके तहत फार्म में उपलब्ध अंडों में से रैंडम कुछ अंडे लेकर उसे कैरी अंडा टेस्टिंग प्लेटफार्म पर फोड़ना होगा।
अंडे का पीले भाग (हॉग यूनिट) 65 फीसदी से ज्यादा या कम है या उसमें कालापन दिखे तो अंडा खराब होता है। ग्लास प्लेटफाॅर्म में एलईडी लाइट भी लगी है। इसे समतल रखने के लिए स्क्रू से एडजस्ट भी कर सकते हैं। अंडे खराब हैं तो पोल्ट्री फार्मर जरूरी इलाज करा सकते हैं।
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28 डिग्री तापमान पर भी खराब नहीं होंगे अंडे
रिलीज की गई दूसरी तकनीकी कैरी एग शील्ड स्प्रे रहा। इससे अंडों के उपयोग के समय को बढ़ाया जा सकता है। बतौर स्प्रे इसे अंडे की बाहरी सतह पर छिड़कने से 28 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर 30 दिन और दो से आठ डिग्री सेंटीग्रेड पर 75 दिनों तक सुरक्षित रहेंगे। निदेशक डॉ. अशोक कुमार तिवारी के मुताबिक अंडा की बिक्री न होने पर खराब होने की आशंका रहती है। इस स्प्रे से इस समस्या से निजात मिलेगी।
कैरी बूस्ट से दस फीसदी बढ़ेगा कुक्कुट का वजन
तीसरी तकनीकी हर्बल विधि से तैयार कैरी बूस्ट उत्पाद रहा। जो कुक्कुट के आहार में मिलाकर खिलाने से उनका दस फीसदी अधिक वजन बढ़ता है। ब्रायलर के विकास, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने, आंतों को स्वस्थ रखने, मांस की गुणवत्ता को बढ़ाकर तनाव को कम करने और स्वाद को और बेहतर बनाने में सहायक है। ये अनार के छिलके के पाउडर और बॉयोगास (सिंगल सेल प्रोटीन) से तैयार किया गया है। अमर उजाला ब्यूरो
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वैज्ञानिक डॉ. जयदीप रोकाड़े के मुताबिक अंडों की गुणवत्ता जांच के लिए देश में उपलब्ध तकनीकी की लागत करीब दस लाख रुपये से ज्यादा है। लिहाजा, तमाम पोल्ट्री किसान अंडों की जांच नहीं कर पाते और उससे विकसित चूजे भी अस्वस्थ होते हैं। पोषण के लिए चारा, स्वास्थ्य लाभ के लिए अतिरिक्त खर्च किसान उठाते हैं। जो भविष्य में आर्थिक प्रगति में बाधक होता है। परेशानी से निजात दिलाने के लिए स्वदेशी डिजाइन के विकास पर कार्य शुरू हुआ। इसके तहत फार्म में उपलब्ध अंडों में से रैंडम कुछ अंडे लेकर उसे कैरी अंडा टेस्टिंग प्लेटफार्म पर फोड़ना होगा।
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अंडे का पीले भाग (हॉग यूनिट) 65 फीसदी से ज्यादा या कम है या उसमें कालापन दिखे तो अंडा खराब होता है। ग्लास प्लेटफाॅर्म में एलईडी लाइट भी लगी है। इसे समतल रखने के लिए स्क्रू से एडजस्ट भी कर सकते हैं। अंडे खराब हैं तो पोल्ट्री फार्मर जरूरी इलाज करा सकते हैं।
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28 डिग्री तापमान पर भी खराब नहीं होंगे अंडे
रिलीज की गई दूसरी तकनीकी कैरी एग शील्ड स्प्रे रहा। इससे अंडों के उपयोग के समय को बढ़ाया जा सकता है। बतौर स्प्रे इसे अंडे की बाहरी सतह पर छिड़कने से 28 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर 30 दिन और दो से आठ डिग्री सेंटीग्रेड पर 75 दिनों तक सुरक्षित रहेंगे। निदेशक डॉ. अशोक कुमार तिवारी के मुताबिक अंडा की बिक्री न होने पर खराब होने की आशंका रहती है। इस स्प्रे से इस समस्या से निजात मिलेगी।
कैरी बूस्ट से दस फीसदी बढ़ेगा कुक्कुट का वजन
तीसरी तकनीकी हर्बल विधि से तैयार कैरी बूस्ट उत्पाद रहा। जो कुक्कुट के आहार में मिलाकर खिलाने से उनका दस फीसदी अधिक वजन बढ़ता है। ब्रायलर के विकास, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने, आंतों को स्वस्थ रखने, मांस की गुणवत्ता को बढ़ाकर तनाव को कम करने और स्वाद को और बेहतर बनाने में सहायक है। ये अनार के छिलके के पाउडर और बॉयोगास (सिंगल सेल प्रोटीन) से तैयार किया गया है। अमर उजाला ब्यूरो