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बसपाई से भाजपाई बने नेता की दबंगई देख घंघोरा-पिपरिया थर्राया
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कब्जों से शहर घबराया
योगी सरकार के तीन साल में नहीं बन पाई भूमाफिया सूची, हर दिन कब्जों की शिकायतें, करोड़ों की जमीन पर कब्जा जमाया
बरेली। एक तरफ योगी सरकार तीन साल से जिला प्रशासन से भूमाफिया की लिस्ट मांग रही है, दूसरी तरफ लगातार अवैध कब्जों से पूरा शहर घबराया हुआ है। नया मामला नैनीताल रोड पर गांव घंघोरा पिपरिया का है जहां भाजपा के सत्ता में आने के साथ बसपाई से भाजपाई बने एक नेता ने 42 बीघा जमीन पर जबरन कब्जा करने के लिए ऐसी दबंगई दिखाई कि भगदड़ मच गई। वर्दीधारी गनर और कई गुर्गों के साथ जेसीबी लेकर पहुंचे भाजपा नेता दिन भर यहां रौला काटा। पीड़ित पक्ष एसडीएम सदर के पास पहुंचा तो उन्होंने मौके पर कब्जा रुकवाया। शुक्रवार को दोनों पक्षों को तलब भी किया है।
दिलचस्प यह है कि करोड़ों कीमत की इस जमीन पर भी कब्जा करने के मामले में राजस्व रिकॉर्ड में जालसाजी कर फर्जी बैनामा कराने का आरोप लग रहा है। मंॉडल टाउन में रहने वाले मनीष पुरी के मुताबिक उन्होंने वर्ष 2014 में यह जमीन खरीदी थी और उसके बाद उसका अपने नाम दाखिल खारिज भी करा लिया था। इसके कुछ समय बाद ही तीन लोगों ने उनकी इस जमीन का फर्जी तरीके से बैनामा कराकर अपने नाम दाखिल खारिज करा लिया। उस समय तो उन्हें इस फर्जीवाड़े की भनक नहीं लग पाई लेकिन बाद में मामला जानकारी में आने पर उन्होंने छानबीन की तो पता चला कि एक व्यक्ति ने पहले इस जमीन को अपने नाम दर्ज कराया था और फिर उसे दो लोगों के हाथ बेच दिया था। मनीष पुरी के मुताबिक उन्होंने इस मामले में तहसीलदार से शिकायत की तो उन्होंने जांच कराने के बाद फर्जी ढंग से हुए दाखिल खारिज को निरस्त कर दिया।
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मनीष पुरी का कहना है कि इसके बावजूद बृहस्पतिवार को बसपाई से भाजपाई हुआ एक नेता अपने सरकारी गनर और 14-15 गुर्गों के साथ जेसीबी लेकर घंघोरा पिपरिया पहुंच गया और जमीन पर जबरन कब्जा करना शुरू कर दिया। जेसीबी से जमीन पर बाउंड्री बनाने के लिए खुदाई शुरू कर दी गई। मनीष का आरोप है कि जबरन कब्जा किए जाने की जानकारी मिलने पर वह कुछ लोगों को लेकर मौके पर पहुंचे तो लाठी और बंदूकों से लैस लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने जमीन पर कब्जा किए जाने का विरोध किया तो हथियारों का प्रदर्शन करते हुए उन्हें भगा दिया गया। आसपास मौजूद गांव के लोग भी दबंगई के इस प्रदर्शन से खौफ में आ गए। शहर लौटकर मनीष ने अवैध कब्जे की शिकायत एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह से की तो उन्होंनेे एसएचओ को मौके पर तुरंत काम रुकवाने का निर्देश दिया। साथ ही जमीन के असली मालिक का पता लगाने के लिए जांच भी शुरू करा दी। शुक्रवार को दोनों पक्षों को तहसील भी बुलाया गया है। भोजीपुरा इंस्पेक्टर मनोज त्यागी ने बताया कि इस मामले में दोनों पक्ष आए दिन कोई न कोई आदेश लाकर जमीन पर अपने स्वामित्व का दावा करते रहे हैं। चूंकि मामला राजस्व विभाग से जुड़ा है लिहाजा तहसील की जांच होने तक मौके पर यथास्थिति रखी जाएगी।
सरकारी जमीन कब्जाने पर रिपोर्ट लिखने के बजाय तहसील टीम दौड़ाई, अब अफसरों ने जांच फंसाई
बदायूं रोड पर नेकपुर में सीलिंग की बेशकीमती जमीन पर पिछले दिनों एक बिल्डर ने अवैध कब्जा करके प्लाटिंग भी शुरू करा दी थी। कुछ दिनों पहले इस मामले में एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह से शिकायत की गई तो उन्होंने इसकी जांच कराई। सरकारी जमीन पर कब्जे की पुष्टि होने के बाद 16 जनवरी को तहसीलदार आशुतोष गुप्ता की जांच रिपोर्ट के साथ शिकायत करने वाले शख्स को तहसील की टीम के साथ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाना सुभाषनगर भेजा गया था लेकिन पुलिस ने केस दर्ज करने के बजाय तहसील की टीम को ही हड़काकर भगा दिया।
तहसील टीम के मुताबिक इंस्पेक्टर ने न सिर्फ उनके लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया बल्कि शिकायत करने वाले को भी जमकर डराया धमकाया। मामला एसडीएम की जानकारी में आया तो उन्होंने इंस्पेक्टर सुभाषनगर हरीश चंद्र जोशी को नोटिस देते हुए इस पर कड़ी नाराजगी जताई कि सरकारी भूमि पर हो रहे कब्जे को पहले तो रोका नहीं गया और अब खुलकर उसे बचाने की कोशिश की जा रही है। एसडीएम ने इंस्पेक्टर से जवाब मांगते हुए रिपोर्ट एसएसपी को भेज दी गई थी। हालांकि बाद में केस दर्ज तो हो गया लेकिन अब इंस्पेक्टर की भूमिका की जांच अभी तक लटकी हुई है।
सराफ की बेशकीमती जमीन पर कब्जे की जांच दबा गए अफसर
टीबरीनाथ कॉलोनी में रहने वाले सराफ राजकुमार अग्रवाल की 2012 में पीलीभीत बाईपास पर बिहारमान नगला में गाटा नंबर 625 पर करीब 1880 वर्ग गज जमीन थी। बकौल राजकुमार अग्रवाल उनकी इस बेशकीमती जमीन पर कुछ माफिया की नजर पड़ी जिसके बाद बड़े सुनियोजित ढंग से इस पर कब्जा करने योजना तैयार की गई। इसी के तहत बहेड़ी के गांव गिरधरपुर निवासी सलीम ने राजकुमार अग्रवाल की आधी जमीन पर अपना स्वामित्व बताते हुए तत्कालीन एसडीएम सदर को तूदाबंदी कराने के लिए दरख्वास्त दे दी। एसडीएम ने इस पर आदेश दिया कि दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत की जाए लेकिन तत्कालीन तहसीलदार के इशारे पर एक लेखपाल ने बगैर किसी उच्चाधिकारी के आदेश पर गाटा नंबर 625 से सटी गाटा नंबर 625 और 624 की जमीन की पैमाइश कर डाली। फिर अपनी रिपोर्ट में राजकुमार अग्रवाल की गाटा नंबर 625 की आधी जमीन को गाटा नंबर 624 का अंश बता दिया। इसके बाद कुछ तत्कालीन अफसरों ने सराफ की जमीन कब्जा भी करा दिया। राजकुमार अग्रवाल का कहना है कि शासन से कई बार जांच के आदेश आ चुके हैं लेकिन स्थानीय अधिकारी फाइल को दबाए हुए हैं।
माफिया से सांठगांठ, चकबंदी में कम कर दी सरकारी स्कूल की जमीन
चकबंदी में गलत तरीके से क्यारा के जूनियर हाईस्कूल की करीब 10 बीघा जमीन को कम दर्शा दिया गया है। इस पर अवैध कब्जा भी हो गया है। जिला प्रशासन से कई शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हाल ही में यह मामला शासन तक पहुंचा दिया गया। शासन की ओर से फाइल को दबाए रखने पर नाराजगी जताए जाने के बाद अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि इसके बावजूद दोषी अधिकारी और कर्मचारियों पर एक्शन लेने से बचा जा रहा है। अपर आयुक्त चकबंदी महेंद्र सिंह ने इस मामले में विभाग से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।
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योगी सरकार के तीन साल में नहीं बन पाई भूमाफिया सूची, हर दिन कब्जों की शिकायतें, करोड़ों की जमीन पर कब्जा जमाया
दोहना टोल प्लाजा से सटे गांव में करीब 20 बीघा जमीन पर दिनदहाड़े किया कब्जा, भाजपा नेता गनर और गुर्गों के साथ जेसीबी लेकर पहुंचा तो मची भगदड़, एसडीएम ने काम रुकवाया, जांच शुरू
बरेली। एक तरफ योगी सरकार तीन साल से जिला प्रशासन से भूमाफिया की लिस्ट मांग रही है, दूसरी तरफ लगातार अवैध कब्जों से पूरा शहर घबराया हुआ है। नया मामला नैनीताल रोड पर गांव घंघोरा पिपरिया का है जहां भाजपा के सत्ता में आने के साथ बसपाई से भाजपाई बने एक नेता ने 42 बीघा जमीन पर जबरन कब्जा करने के लिए ऐसी दबंगई दिखाई कि भगदड़ मच गई। वर्दीधारी गनर और कई गुर्गों के साथ जेसीबी लेकर पहुंचे भाजपा नेता दिन भर यहां रौला काटा। पीड़ित पक्ष एसडीएम सदर के पास पहुंचा तो उन्होंने मौके पर कब्जा रुकवाया। शुक्रवार को दोनों पक्षों को तलब भी किया है।
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दिलचस्प यह है कि करोड़ों कीमत की इस जमीन पर भी कब्जा करने के मामले में राजस्व रिकॉर्ड में जालसाजी कर फर्जी बैनामा कराने का आरोप लग रहा है। मंॉडल टाउन में रहने वाले मनीष पुरी के मुताबिक उन्होंने वर्ष 2014 में यह जमीन खरीदी थी और उसके बाद उसका अपने नाम दाखिल खारिज भी करा लिया था। इसके कुछ समय बाद ही तीन लोगों ने उनकी इस जमीन का फर्जी तरीके से बैनामा कराकर अपने नाम दाखिल खारिज करा लिया। उस समय तो उन्हें इस फर्जीवाड़े की भनक नहीं लग पाई लेकिन बाद में मामला जानकारी में आने पर उन्होंने छानबीन की तो पता चला कि एक व्यक्ति ने पहले इस जमीन को अपने नाम दर्ज कराया था और फिर उसे दो लोगों के हाथ बेच दिया था। मनीष पुरी के मुताबिक उन्होंने इस मामले में तहसीलदार से शिकायत की तो उन्होंने जांच कराने के बाद फर्जी ढंग से हुए दाखिल खारिज को निरस्त कर दिया।
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मनीष पुरी का कहना है कि इसके बावजूद बृहस्पतिवार को बसपाई से भाजपाई हुआ एक नेता अपने सरकारी गनर और 14-15 गुर्गों के साथ जेसीबी लेकर घंघोरा पिपरिया पहुंच गया और जमीन पर जबरन कब्जा करना शुरू कर दिया। जेसीबी से जमीन पर बाउंड्री बनाने के लिए खुदाई शुरू कर दी गई। मनीष का आरोप है कि जबरन कब्जा किए जाने की जानकारी मिलने पर वह कुछ लोगों को लेकर मौके पर पहुंचे तो लाठी और बंदूकों से लैस लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने जमीन पर कब्जा किए जाने का विरोध किया तो हथियारों का प्रदर्शन करते हुए उन्हें भगा दिया गया। आसपास मौजूद गांव के लोग भी दबंगई के इस प्रदर्शन से खौफ में आ गए। शहर लौटकर मनीष ने अवैध कब्जे की शिकायत एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह से की तो उन्होंनेे एसएचओ को मौके पर तुरंत काम रुकवाने का निर्देश दिया। साथ ही जमीन के असली मालिक का पता लगाने के लिए जांच भी शुरू करा दी। शुक्रवार को दोनों पक्षों को तहसील भी बुलाया गया है। भोजीपुरा इंस्पेक्टर मनोज त्यागी ने बताया कि इस मामले में दोनों पक्ष आए दिन कोई न कोई आदेश लाकर जमीन पर अपने स्वामित्व का दावा करते रहे हैं। चूंकि मामला राजस्व विभाग से जुड़ा है लिहाजा तहसील की जांच होने तक मौके पर यथास्थिति रखी जाएगी।
सरकारी जमीन कब्जाने पर रिपोर्ट लिखने के बजाय तहसील टीम दौड़ाई, अब अफसरों ने जांच फंसाई
बदायूं रोड पर नेकपुर में सीलिंग की बेशकीमती जमीन पर पिछले दिनों एक बिल्डर ने अवैध कब्जा करके प्लाटिंग भी शुरू करा दी थी। कुछ दिनों पहले इस मामले में एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह से शिकायत की गई तो उन्होंने इसकी जांच कराई। सरकारी जमीन पर कब्जे की पुष्टि होने के बाद 16 जनवरी को तहसीलदार आशुतोष गुप्ता की जांच रिपोर्ट के साथ शिकायत करने वाले शख्स को तहसील की टीम के साथ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाना सुभाषनगर भेजा गया था लेकिन पुलिस ने केस दर्ज करने के बजाय तहसील की टीम को ही हड़काकर भगा दिया।
तहसील टीम के मुताबिक इंस्पेक्टर ने न सिर्फ उनके लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया बल्कि शिकायत करने वाले को भी जमकर डराया धमकाया। मामला एसडीएम की जानकारी में आया तो उन्होंने इंस्पेक्टर सुभाषनगर हरीश चंद्र जोशी को नोटिस देते हुए इस पर कड़ी नाराजगी जताई कि सरकारी भूमि पर हो रहे कब्जे को पहले तो रोका नहीं गया और अब खुलकर उसे बचाने की कोशिश की जा रही है। एसडीएम ने इंस्पेक्टर से जवाब मांगते हुए रिपोर्ट एसएसपी को भेज दी गई थी। हालांकि बाद में केस दर्ज तो हो गया लेकिन अब इंस्पेक्टर की भूमिका की जांच अभी तक लटकी हुई है।
सराफ की बेशकीमती जमीन पर कब्जे की जांच दबा गए अफसर
टीबरीनाथ कॉलोनी में रहने वाले सराफ राजकुमार अग्रवाल की 2012 में पीलीभीत बाईपास पर बिहारमान नगला में गाटा नंबर 625 पर करीब 1880 वर्ग गज जमीन थी। बकौल राजकुमार अग्रवाल उनकी इस बेशकीमती जमीन पर कुछ माफिया की नजर पड़ी जिसके बाद बड़े सुनियोजित ढंग से इस पर कब्जा करने योजना तैयार की गई। इसी के तहत बहेड़ी के गांव गिरधरपुर निवासी सलीम ने राजकुमार अग्रवाल की आधी जमीन पर अपना स्वामित्व बताते हुए तत्कालीन एसडीएम सदर को तूदाबंदी कराने के लिए दरख्वास्त दे दी। एसडीएम ने इस पर आदेश दिया कि दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत की जाए लेकिन तत्कालीन तहसीलदार के इशारे पर एक लेखपाल ने बगैर किसी उच्चाधिकारी के आदेश पर गाटा नंबर 625 से सटी गाटा नंबर 625 और 624 की जमीन की पैमाइश कर डाली। फिर अपनी रिपोर्ट में राजकुमार अग्रवाल की गाटा नंबर 625 की आधी जमीन को गाटा नंबर 624 का अंश बता दिया। इसके बाद कुछ तत्कालीन अफसरों ने सराफ की जमीन कब्जा भी करा दिया। राजकुमार अग्रवाल का कहना है कि शासन से कई बार जांच के आदेश आ चुके हैं लेकिन स्थानीय अधिकारी फाइल को दबाए हुए हैं।
माफिया से सांठगांठ, चकबंदी में कम कर दी सरकारी स्कूल की जमीन
चकबंदी में गलत तरीके से क्यारा के जूनियर हाईस्कूल की करीब 10 बीघा जमीन को कम दर्शा दिया गया है। इस पर अवैध कब्जा भी हो गया है। जिला प्रशासन से कई शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हाल ही में यह मामला शासन तक पहुंचा दिया गया। शासन की ओर से फाइल को दबाए रखने पर नाराजगी जताए जाने के बाद अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि इसके बावजूद दोषी अधिकारी और कर्मचारियों पर एक्शन लेने से बचा जा रहा है। अपर आयुक्त चकबंदी महेंद्र सिंह ने इस मामले में विभाग से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।