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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Saraf's two servants were master minds of loot

सराफ के दो नौकर थे लूट के मास्टर माइंड

Thu, 08 Jun 2017 12:58 AM IST
बरेली।  
बरेली।   Updated Thu, 08 Jun 2017 12:58 AM IST
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अभिलाष अग्रवाल ने वारदात के बाद एसएसपी जोगेंद्र कुमार को बताया था कि बदमाशों ने कार को कब्जे में लेेने के बाद कार की तलाशी नहीं ली, बल्कि उनके जूते उतरवाकर सोना निकाल लिया था। बदमाशों को पहले से पता था कि कार में सोना सबके जूतों में छिपाकर रखा गया है। एसएसपी दो बार अभिलाष के जरिये पूरी वारदात का रिहर्सल करवाने के बाद मुतमईन हो गए कि लुटेरों में सराफ का कोई नजदीकी शामिल है। 
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इसके बाद पुलिस ने प्रदीप अग्रवाल और महेंद्र महरोत्रा के कार्यालय में काम करने वाले या काम छोड़ चुके नौकरों की फेहरिस्त तैयार की। महेंद्र महरोत्रा के 32 और प्रदीप अग्रवाल के 18 नौकरों को बुलाकर उनसे पूछताछ शुरू की गई। पुलिस के हाथ पहला क्लू तब लगा जब संजय नगर निवासी मनोज अपनी पत्नी संग घर से भागा हुआ मिला। दूसरी तरफ पुलिस ने वारदात के वक्त फतेहगंज पूर्वी स्थित मोबाइल टावर के संपर्क में रहे मोबाइल नंबरों को खंगालना शुरू किया। जिसमें पुलिस को मनोज का मोबाइल नंबर भी मिल गया। मनोज का नंबर ट्रेस होने के बाद महेंद्र के नौकर शत्रूघन का नंबर भी ट्रेस हो गया। दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई थी। 
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मनोज बदलता रहा था लोकेशन 
शत्रूघन की गिरफ्तारी के बाद पर्दाफाश हुआ कि मनोज और शत्रूघन ही लूट के मास्टर माइंड हैं। दोनों की कॉल डिटेल से मिले संदिग्ध नंबरों के जरिये प्रदीप, अरुण, सोनू सहित अन्य बदमाशों के लिंक मिलते चले गए। यह भी सामने आया है कि मनोज ने सर्विलांस से बचने के लिए वारदात के वक्त अपनी लोकेशन कई बार बदली लेकिन वह पकड़ा गया। 
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एक दिन पहले बदमाशों ने किया था रिहर्सल 
प्रदीप अग्रवाल महीने में कई दफा लखनऊ से सोना मंगवाते थे। पुलिस के मुताबिक मनोज 100 से ज्यादा बार प्रदीप अग्रवाल का सोना लेकर आया था। इसलिए उसको रास्ते की पूरी जानकारी थी। पुलिस के मुताबिक वारदात से ठीक एक दिन पहले सभी बदमाश टिसुआ पहुंचे थे। उन्होंने बकायदा रिहर्सल करके देखा था कि वारदात को अंजाम देना कैसे हैं।  

पहचाने जाने के डर से नौकर नहीं गए 
वारदात वाले दिन मनोज ने प्रदीप अग्रवाल के ड्राइवर इमरान को फोन करके पूछा था कि लखनऊ से निकले कि नहीं। लखनऊ से माल लाया जा रहा है इसका भरोसा होने के बाद सभी आई 10 कार में बैठकर टिसुआ के लिए चले थे। शत्रूघन को पहचाने जाने का डर था इसलिए वह बरेली में ही रूका, मनोज को कटरा क्रासिंग के बाद बदमाशों ने उतार दिया था। वारदात करने के बाद प्रदीप ठाकुर, संतोष, सोनू और उनका एक और साथी गया था। 

पिथौरागढ़ से लौटे, नेपाल भागने की थी प्लानिंग 
लूटपाट के बाद किसी को शक न हो इसलिए शत्रूघन वापस ड्यूटी पर आ गया। सरबजीत उर्फ सोनू और मनोज कार से उत्तराखंड की तरफ निकल गए थे। हालांकि दोनों पिथौरागढ़ से वापस लौटे थे। सभी ने प्रदीप ठाकुर के पास लूट का सोना छोड़ दिया था। अब सभी बदमाश नेपाल भागने की योजना बना रहे थे। बदमाशों ने किला के दो सराफ से संपर्क करके सोने के दो बिस्किट को 5.52 लाख में बेचा था। बदमाश भागने की योजना बना ही रहे थे कि पुलिस ने दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया। 

नया गैंग होगा रजिस्टर 
पुलिस भी मान रही थी कि नौकर और उसके दोस्त नौसिखिये थे। यही वजह है कि सोने के चक्कर में लूट कर बैठे। एसएसपी ने बताया कि इस नए गैंग के लोगों को भी रजिस्टर किया जाएगा।

गए थे पैरवी में पड़ी लताड़ 
चोरी का सोना खरीदने वाले किला के दो सुनारों की पैरवी में बुलियन सराफा एसएसपी कार्यालय पहुंच गया। एसएसपी ने लताड़ लगाते हुए उस सराफ को भगा दिया। यह वही सराफ थे किनके घर पर तमिलनाडु की पुलिस दबिश पड़ी थी। एसएसपी की लताड़ के बाद सराफ मायूस होकर लौट आया। 


व्यापारियों ने एसएसपी का किया सम्मान 
बड़ी लूट के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि सौ फीसदी रिकवरी हुई है। व्यापारियों ने एसएसपी जोगेंद्र कुमार का सम्मान किया। इस खुलासे में एसएसपी का सबसे ज्यादा योगदान रहा। उन्होंने करीब 10 टीमों का गठन करके 84 घंटों में सौ ज्यादा दबिशें डलवाई। खुद लीड करके सूबे में चर्चा का विषय बन चुकी वारदात का खुलासा किया। 
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