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तीन गुना फायदे का झांसा देकर थमा देते थे नकली नोट या कागज के टुकड़े

Sat, 30 Mar 2019 01:39 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Sat, 30 Mar 2019 01:39 AM IST
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तीन गुना फायदे का झांसा देकर थमा देते थे नकली नोट या कागज के टुकड़े
बरेली। कागज से असली की तरह दिखने वाले नकली नोट बनाने का झांसा देकर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का पता चला है। ये दावा करते थे कि एक लाख के बदले ऐसे तीन लाख के नोट देंगे। वहीं, हकीकत में कागज के टुकड़े या नकली नोट थमा देते थे। इसी तरह रकम तिगुनी करने का झांसा देकर कई लोगों से लाखों रुपये ठगने वाले गैंग के चार सदस्यों को पकड़कर पुलिस ने जेल भेज दिया है। पुलिस इनसे चार दिन से पूछताछ कर रही थी। इनसे नकली नोट बनाने का पाउडर, उपकरण बरामद हुए हैं। इन्होंने शहर में कई लोगों को ठगा है, जिनके बारे में जानकारी जुटाकर विवेचना में शामिल किया जाएगा।
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किला इंस्पेक्टर डीसी शर्मा ने बताया कि क्योलड़िया के विक्रमपुर निवासी ओमप्रकाश, बिथरी के चंदनपुर गांव निवासी निसार, बारादरी की शिवाजी नगर कॉलोनी निवासी भानुप्रताप और जोगीनवादा निवासी अजीत कुमार को मुखबिर की सूचना पर टीम ने हिरासत में लिया था। पूछताछ हुई तो ठगी का नया तरीका निकलकर सामने आया। पता लगा कि ओमप्रकाश गिरोह का सरगना है। अजीत शहर में टेंपो चलाता है। वह मुसाफिरों से बातचीत कर उन्हें फंसाता है। उनसे कहता था कि उसके परिचित ऐसे नकली नोट बनाते हैं जो हूबहू असली की तरह होते हैं। एक लाख के तीन लाख मिलेंगे। जो लोग झांसे में आ जाते थे उन्हें वो ओमप्रकाश व अन्य साथियों से मिलवाता था। ये लोग कांच की दो प्लेटों पर गुलाबी रंग लगाकर उसके बीच सादा कागज रख देते थे। इस विशेष पाउडर की वजह से प्लेट टूटती नहीं थी। अब इन प्लेटों को आग पर चढ़ा देते थे। इसके बाद शिकार से कहते थे कि कुछ देर में ये नोट बन जाएगा जो देखने में बिल्कुल असली लगेगा। फिर नजरों का धोखा कर उसे असली नोट ही थमाकर बाजार में चलाने को कहते। नोट चल जाता था तो कस्टमर को विश्वास हो जाता था। तब ठग उससे हजारों या लाखों रुपये लेकर सादा कागज या नकली नोट थमा देते थे।
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जो ठगते गए वो साथी बन गए
भानुप्रताप और निसार दोनों ही पहले ओमप्रकाश के हाथों ठगी का शिकार हुए थे। भानुप्रताप से ढाई लाख तो निसार से तीस हजार की रकम ठगी गई थी। चूंकि, इन लोगों ने ओमप्रकाश के नाम और पते की जानकारी कर ली थी, इसलिए काफी समय तक उस पर रुपये वापसी का दबाव बनाते रहे। रुपये तो मिले नहीं, लालच में दोनों ही ओमप्रकाश के साथी बनकर ठगी करने लगे।
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गैंग ने शहर में कई और लोगों को भी ठगा होगा। फिलहाल शर्म की वजह से भी कुछ लोग सामने नहीं आ रहे हैं। कुछ नाम पुलिस के पास हैं। इन्हें विवेचना में शामिल कर आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगाई जाएगी। - सीमा यादव, सीओ सेकेंड।
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