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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Bareilly city becomes medical hub in 54 years

स्वास्थ्य सेवा: मौसमी बीमारियों की दवा देने वाला बरेली शहर बना मेडिकल हब

Tue, 17 Jan 2023 06:01 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 17 Jan 2023 06:01 PM IST
सार

अमर उजाला का बरेली में शुरू हुआ सफर 55वें साल में प्रवेश कर गया है। इस दौरान अमर उजाला स्वास्थ्य के क्षेत्र में आए बदलाव का साक्षी रहा। वर्तमान में सुपरस्पेशियलिटी सेवा समेत किडनी ट्रांसप्लांट, जटिल सर्जरी व कैंसर का इलाज भी होने लगा है। 

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Bareilly city becomes medical hub in 54 years
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

वर्तमान में मेडिकल हब के तौर पर पहचान बना चुके बरेली में कभी महज सर्दी, जुकाम, बुखार का ही इलाज होता था। जटिल बीमारियों के इलाज के लिए महानगरों की दौड़ लगाना और घंटों कतार में खड़े रहना लोगों की मजबूरी थी। 80 दशक तक लगभग ऐसी ही स्थिति रही। 90 के दशक से सेवाओं में विस्तार शुरू हुआ। अब सुपरस्पेशियलिटी सेवा समेत किडनी ट्रांसप्लांट, जटिल सर्जरी व कैंसर का इलाज भी शहर में होने लगा है।
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निजी अस्पताल एक नजर में

- साल 1938 में आठ सदस्यों के साथ आईएमए बरेली ब्रांच की स्थापना।
- 1968 तक मिशन अस्पताल, मैरी स्टोव्स, मेरी स्टव्स, डॉ. प्रेम क्लीनिक।
- 1990 में अस्पताल बढ़े 2002 में शहर में पहला आईवीएफ सेंटर खुला।
- आईएमए बरेली में अब आठ सौ से ज्यादा सदस्य, ढाई सौ अस्पताल हैं।
- भोजीपुरा, दिल्ली रोड, पीलीभीत बाईपास पर निजी मेडिकल कॉलेज हैं।

सरकारी सेवा एक नजर में

- 52 लाख अनुमानित आबादी, 23 कोल्ड चेन
- 16 सीएचसी, 50 पीएचसी, 21 यूपीएचसी
- 452 उपकेंद्र, 271 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर
- 555 एएनएम, 203 सीएचओ, 142 संगिनी
- 3294 आशा वर्कर, छह ऑक्सीजन प्लांट
- तीन सौ बेड का एक सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल

चिकित्सक की तैनाती 

- जिला अस्पताल में 36 स्वीकृत पद, 23 की तैनाती
- स्वास्थ्य विभाग में 54 स्वीकृत पद, 14 की तैनाती
- स्वास्थ्य केंद्रों पर 230 स्वीकृत, 148 की तैनाती

विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बड़ी अड़चन

पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुधीर कुमार गर्ग के मुताबिक 50 साल पहले जिले में महज छह बड़े स्वास्थ्य केंद्र ही थे। अब इनकी तादाद 70 से ज्यादा है। पहले सर्जरी और जांच की सुविधाएं सीमित थीं। अब आईसीयू, ऑक्सीजन आपूर्ति बेड, सीएचसी पर एफआरयू सुविधा, सिजेरियन डिलीवरी, टीकाकरण और कोरोना जैसी महामारी से निपटने के इंतजाम हैं। समस्या है तो विशेषज्ञ चिकित्सकों की। सभी जरूरी संसाधन के बावजूद चिकित्सकों के अभाव में जिला अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं प्रभावित हैं। 

अब शहर में सुपरस्पेशियलिटी सेवाएं भी

राष्ट्रीय संक्रामक रोग चैप्टर के अध्यक्ष रहे वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक वर्ष 90 से पहले चिकित्सक और चिकित्सकीय सेवाएं सीमित थीं। डॉक्टर के नाम से अस्पताल पहचाने जाते थे। आईएमए स्थापना के बाद सेवाओं का विस्तार शुरू हुआ। अब सेवाएं राष्ट्रीय स्तर की हैं। सभी जटिल सर्जरी और कैंसर, हार्ट अटैक जैसी जानलेवा बीमारियों का इलाज भी हो रहा है। मेडिकल हब बन चुके बरेली में उत्तराखंड और आसपास के जिलों के मरीज का इलाज हो रहा है। मरीजों का विश्वास कायम रखना बड़ी चुनौती है।

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