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दवा व्यापारी ‘अघोषित सामूहिक हड़ताल’ पर आमादा
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बरेली। कानून के साथ मानवीयता का भी तकाजा है कि दवाओं की उपलब्धता में किसी भी तरह की कमी न आने दी जाए। इसी कारण दवा कारोबार को आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में रखते हुए ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के प्रावधानों में किसी भी तरह की हड़ताल या बंदी को अनुचित करार दिया गया है, लेकिन दवा कंपनियों के लक्ष्य पूरे करने के लिए शहर के थोक कारोबारी सामूहिक बंदी पर आमादा हैं। अगर यह बंदी हुई तो दवा के जरूरतमंदों का क्या हाल होगा, यह तो बस समझा ही जा सकता है लेकिन फिलहाल सिस्टम जिस तरह बंदी करने पर आमादा कारोबारियों के साथ खड़ा हुआ है, उससे दिसंबर के आखिरी दिनों में शहर में दवाओं का भारी संकट पैदा हो सकता है। हालांकि कारोबारियों का एक गुट इस बंदी के विरोध में भी सामने आ गया है। दोनों गुटों के बीच जबर्दस्त पोस्टर जंग भी शुरू हो गई है।
दवा कंपनियां उन दवा कारोबारियों के लिए हर साल कई योजनाएं घोषित करती हैं जो उनके कारोबारी लक्ष्यों को पूरा करने में आगे रहते हैं। हर साल दिसंबर और मार्च में ऐसी स्कीमों की घोषणा की जाती है। डॉक्टरों को भी अलग से उपकृत किया जाता है। दो सालों से बरेली के दवा बाजार में नया चलन शुरू हुआ है। थोक दवा कारोबारी कंपनी के खचों पर अपना कारोबार बंद कर सैरसपाटा करने चले जाते हैं। दवा बाजार बंद करने के लिए पहले से ही माहौल तैयार किया जाता है। रिटेल दवा कारोबारियों पर दबाव बनाया जाता है कि वे थोक कारोबार की बंदी के दौरान अपना स्टॉक बनाए रखने के लिए पहले ही आर्डर बुक करा दें। इसका नतीजा यह होता कि दिसंबर के महीने में थोक कारोबार में एकाएक बड़ा उछाल आता है। मगर इस बार पेच यह फंस गया है कि दवा कारोबारियों का एक गुट सैरसपाटे के इस कार्यक्रम के विरोध में आगे आ गया है। इन कारोबारियों का कहना है कि प्रदेश में रूबेला जैसी बीमारियां चल रही हैं। कभी भी जीवन रक्षक दवाओं की आपात जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में दवा कारोबार बंद करके सैरसपाटे पर जाना पूरी तरह अमानवीय साबित होगा।
पोस्टर लगने से फैला असमंजस
दवा कारोबारियों के बीच इन दिनों 30 से एक जनवरी तक बाजार बंद करने को लेकर जोरदार बहस चल रही है। बताया जाता है कि कंपनियों के खर्च पर सैरसपाटे पर जाने को तैयार बैठे कारोबारी दूसरे कारोबारियों पर भी अपनी दुकानें बंद करने का दबाव बनाए हुए हैं। जबकि दूसरा गुट किसी भी हालत में अपना कारोबार बंद करने को तैयार नहीं है। बंद समर्थकों और विरोधियों ने बाजार में अपने पोस्टर तक चिपका दिए हैं। इससे दवा बाजार में भारी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
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बंद विरोधियों को धमकी- छापे पड़ेंगे, लाइसेंस सस्पेंड करा दिया जाएगा
सिस्टम का समर्थन हासिल होने की वजह से थोक दवा कारोबार बंद करने वालों के हौसले बुलंद हैं। ये कारोबारी बंदी का विरोध कर रहे कारोबारियों को खुली धमकी दे रहे हैं कि अगर उन्होंने इन तीन दिनों में अपना कारोबार बंद नहीं रखा तो उनकी दुकानों पर छापे पड़ेंगे और उनका लाइसेंस भी सस्पेंड करा दिया जाएगा। दरअसल बंद समर्थकों के इस हौसले की वजह यह भी है कि ड्रग इंस्पेक्टर उर्मिला वर्मा भी उनके बंद करने के फैसले का खुलकर समर्थन कर रही हैं।
आमने-सामने
दवा कारोबारी बंद करना चाहते हैं तो हर्ज क्या है: ड्रग इंस्पेक्टर
उर्मिला वर्मा का कहना है कि दवा कारोबार को बंद करना कहीं भी नियम विरोधी नहीं है। थोक कारोबारी अगर तीन दिन के लिए सैरसपाटे पर जाना चाहते हैं तो इसमें कोई हर्ज की बात नहीं है। वह यहां तक दावा करने से पीछे नहीं हटीं कि बंद के दौरान अगर कोई आपात स्थिति आएगी तो वह उसे संभाल लेंगी। यह अलग बात है कि उनसे जब शहर में थोक दवा लाइसेंसियों की तादाद पूछी गई तो उन्होंने अनभिज्ञता जता दी।
दवा कारोबार आवश्यक सेवा, बंद किया तो सख्त कार्रवाई: एसी ड्रग्स
ड्रग इंस्पेक्टर उर्मिला वर्मा के कथन के उलट असिस्टेंट कमिश्नर ड्रग्स आरपी पांडेय ने थोक दवा कारोबारियों की बंदी को पूरी तरह गैरकानूनी करार दिया है। उनका कहना है कि दवा कारोबार आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आता है और इसमें किसी भी तरह की हड़ताल या बंदी पूरी तरह गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन की आड़ में अगर इस तरह किसी ने कारोबार बंद किया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दवाओं का कारोबार सीधे-सीधे जनहित का मामला है। ऐसे में तीन दिन तक थोक दवा बाजार को बंद कराना अमानवीय और अव्यवहारिक है। अगर किसी को सैरसपाटा करना है तो उस पर कोई रोक नहीं, लेकिन इसके लिए कारोबार को बंद करने का दबाव नहीं बनाया जा सकता। - सुधीर सेठी, महामंत्री, महानगर केमिस्ट एसोसिएशन
तीन दिन तक परिवार के साथ अगर कोई सैरसपाटा करने जाना चाहता है तो इसमें कुछ भी नियमविरुद्ध नहीं है। थोक दवा कारोबार में दो साल से यह परंपरा चल रही है। इसके लिए किसी पर कोई दबाव नहीं है। फुटकर दवा विक्रेताओं से बस इतना आग्रह किया है कि वे बंदी के दौरान अपनी जरूरत भर का स्टाक अभी से कर लें। - राजेश ओबराय, अध्यक्ष, न्यू डिस्ट्रिक बरेली केमिस्ट एसोसिएशन
बरेली में दवा कारोबार
थोक लाइसेंस 700
फुटकर लाइसेंस 2,700
रोजाना कारोबार 70 करोड़ रुपये
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दवा कंपनियां उन दवा कारोबारियों के लिए हर साल कई योजनाएं घोषित करती हैं जो उनके कारोबारी लक्ष्यों को पूरा करने में आगे रहते हैं। हर साल दिसंबर और मार्च में ऐसी स्कीमों की घोषणा की जाती है। डॉक्टरों को भी अलग से उपकृत किया जाता है। दो सालों से बरेली के दवा बाजार में नया चलन शुरू हुआ है। थोक दवा कारोबारी कंपनी के खचों पर अपना कारोबार बंद कर सैरसपाटा करने चले जाते हैं। दवा बाजार बंद करने के लिए पहले से ही माहौल तैयार किया जाता है। रिटेल दवा कारोबारियों पर दबाव बनाया जाता है कि वे थोक कारोबार की बंदी के दौरान अपना स्टॉक बनाए रखने के लिए पहले ही आर्डर बुक करा दें। इसका नतीजा यह होता कि दिसंबर के महीने में थोक कारोबार में एकाएक बड़ा उछाल आता है। मगर इस बार पेच यह फंस गया है कि दवा कारोबारियों का एक गुट सैरसपाटे के इस कार्यक्रम के विरोध में आगे आ गया है। इन कारोबारियों का कहना है कि प्रदेश में रूबेला जैसी बीमारियां चल रही हैं। कभी भी जीवन रक्षक दवाओं की आपात जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में दवा कारोबार बंद करके सैरसपाटे पर जाना पूरी तरह अमानवीय साबित होगा।
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पोस्टर लगने से फैला असमंजस
दवा कारोबारियों के बीच इन दिनों 30 से एक जनवरी तक बाजार बंद करने को लेकर जोरदार बहस चल रही है। बताया जाता है कि कंपनियों के खर्च पर सैरसपाटे पर जाने को तैयार बैठे कारोबारी दूसरे कारोबारियों पर भी अपनी दुकानें बंद करने का दबाव बनाए हुए हैं। जबकि दूसरा गुट किसी भी हालत में अपना कारोबार बंद करने को तैयार नहीं है। बंद समर्थकों और विरोधियों ने बाजार में अपने पोस्टर तक चिपका दिए हैं। इससे दवा बाजार में भारी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
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बंद विरोधियों को धमकी- छापे पड़ेंगे, लाइसेंस सस्पेंड करा दिया जाएगा
सिस्टम का समर्थन हासिल होने की वजह से थोक दवा कारोबार बंद करने वालों के हौसले बुलंद हैं। ये कारोबारी बंदी का विरोध कर रहे कारोबारियों को खुली धमकी दे रहे हैं कि अगर उन्होंने इन तीन दिनों में अपना कारोबार बंद नहीं रखा तो उनकी दुकानों पर छापे पड़ेंगे और उनका लाइसेंस भी सस्पेंड करा दिया जाएगा। दरअसल बंद समर्थकों के इस हौसले की वजह यह भी है कि ड्रग इंस्पेक्टर उर्मिला वर्मा भी उनके बंद करने के फैसले का खुलकर समर्थन कर रही हैं।
आमने-सामने
दवा कारोबारी बंद करना चाहते हैं तो हर्ज क्या है: ड्रग इंस्पेक्टर
उर्मिला वर्मा का कहना है कि दवा कारोबार को बंद करना कहीं भी नियम विरोधी नहीं है। थोक कारोबारी अगर तीन दिन के लिए सैरसपाटे पर जाना चाहते हैं तो इसमें कोई हर्ज की बात नहीं है। वह यहां तक दावा करने से पीछे नहीं हटीं कि बंद के दौरान अगर कोई आपात स्थिति आएगी तो वह उसे संभाल लेंगी। यह अलग बात है कि उनसे जब शहर में थोक दवा लाइसेंसियों की तादाद पूछी गई तो उन्होंने अनभिज्ञता जता दी।
दवा कारोबार आवश्यक सेवा, बंद किया तो सख्त कार्रवाई: एसी ड्रग्स
ड्रग इंस्पेक्टर उर्मिला वर्मा के कथन के उलट असिस्टेंट कमिश्नर ड्रग्स आरपी पांडेय ने थोक दवा कारोबारियों की बंदी को पूरी तरह गैरकानूनी करार दिया है। उनका कहना है कि दवा कारोबार आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आता है और इसमें किसी भी तरह की हड़ताल या बंदी पूरी तरह गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन की आड़ में अगर इस तरह किसी ने कारोबार बंद किया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दवाओं का कारोबार सीधे-सीधे जनहित का मामला है। ऐसे में तीन दिन तक थोक दवा बाजार को बंद कराना अमानवीय और अव्यवहारिक है। अगर किसी को सैरसपाटा करना है तो उस पर कोई रोक नहीं, लेकिन इसके लिए कारोबार को बंद करने का दबाव नहीं बनाया जा सकता। - सुधीर सेठी, महामंत्री, महानगर केमिस्ट एसोसिएशन
तीन दिन तक परिवार के साथ अगर कोई सैरसपाटा करने जाना चाहता है तो इसमें कुछ भी नियमविरुद्ध नहीं है। थोक दवा कारोबार में दो साल से यह परंपरा चल रही है। इसके लिए किसी पर कोई दबाव नहीं है। फुटकर दवा विक्रेताओं से बस इतना आग्रह किया है कि वे बंदी के दौरान अपनी जरूरत भर का स्टाक अभी से कर लें। - राजेश ओबराय, अध्यक्ष, न्यू डिस्ट्रिक बरेली केमिस्ट एसोसिएशन
बरेली में दवा कारोबार
थोक लाइसेंस 700
फुटकर लाइसेंस 2,700
रोजाना कारोबार 70 करोड़ रुपये