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तुलसी विवाह कराएं, कन्यादान का पुण्य पाएं
Updated Mon, 19 Nov 2018 01:40 AM IST
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बरेली। देवोत्थान एकादशी के साथ ही आज से मंगल कार्यों का शुभारंभ हो जाएगा, लेकिन गुरु अस्त होने से वैवाहिक कार्य संपन्न नहीं होंगे। ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा ने बताया कि देवोत्थान एकादशी पर वैवाहिक संयोग तो नहीं हैं, लेकिन तुलसी उत्सव, तुलसी-शालिग्राम विवाह का आयोजन होगा।
बताया कि शास्त्रों के अनुसार जिस दंपति के कन्या नहीं होती है, वह जीवन में एक बार तुलसी विवाह कर कन्यादान का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। तुलसी विवाह कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर होगा, लेकिन लोक रीति के अनुसार प्रबोधिनी (देवोत्थान) एकादशी पर ही तुलसी विवाह संपन्न कराने का विधान है। इसके लिए समय या मुहूर्त मान्य नहीं है। यह विवाह अखंड सौभाग्य देने वाला होता है। तुलसी विवाह सामूहिक रूप से होता है। ऐसे माता-पिता जिनके पुत्र अथवा पुत्री के विवाह में विलंब हो रहा है, उनको तुलसी विवाह संपन्न कराना चाहिए।
तुलसी विवाह व पूजन विधि
ज्योतिषाचार्य पं. मुकेश मिश्रा ने बताया कि पहले तुलसी के पौधे का गमला गेरू से सजाकर चारों ओर ईख का मंडप बनाएं। उस पर ओढ़नी या सुहाग प्रतीक चुनरी ओढ़ा दें। गणपति, पंच देवों समेत शालिग्राम और तुलसी का पूजन कर एक नारियल दक्षिणा के साथ टीका के रूप में रखें। भगवान शालिग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसी जी की सात परिक्रमा कराएं। आरती के बाद विवाह उत्सव संपन्न होता है। द्वादशी के दिन तुलसी और शालिग्राम की पूजा कर व्रत का परायण करें।
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रामगंगा में लगेगी आस्था की डुबकी
देवोत्थान एकादशी पर सोमवार को रामगंगा में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे। रामगंगा घाट के पुजारी पं. मनोज ने बताया कि अबकी बार गुरु अस्त होने से कम भीड़ उमड़ने की आशंका है। हालांकि, प्रतिदिन स्नान करने वालों से करीब दो सौ लोग अधिक पहुंच सकते हैं। बताया कि देवोत्थान पर लोग मुंडन की रस्म पूरी करते हैं। वहीं, जिनकी मुराद पूरी होती है वह मन्नत उतारने आते हैं। लेकिन अबकी बार, स्थिति पिछले वर्ष से अलग रहेगी।
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बताया कि शास्त्रों के अनुसार जिस दंपति के कन्या नहीं होती है, वह जीवन में एक बार तुलसी विवाह कर कन्यादान का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। तुलसी विवाह कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर होगा, लेकिन लोक रीति के अनुसार प्रबोधिनी (देवोत्थान) एकादशी पर ही तुलसी विवाह संपन्न कराने का विधान है। इसके लिए समय या मुहूर्त मान्य नहीं है। यह विवाह अखंड सौभाग्य देने वाला होता है। तुलसी विवाह सामूहिक रूप से होता है। ऐसे माता-पिता जिनके पुत्र अथवा पुत्री के विवाह में विलंब हो रहा है, उनको तुलसी विवाह संपन्न कराना चाहिए।
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तुलसी विवाह व पूजन विधि
ज्योतिषाचार्य पं. मुकेश मिश्रा ने बताया कि पहले तुलसी के पौधे का गमला गेरू से सजाकर चारों ओर ईख का मंडप बनाएं। उस पर ओढ़नी या सुहाग प्रतीक चुनरी ओढ़ा दें। गणपति, पंच देवों समेत शालिग्राम और तुलसी का पूजन कर एक नारियल दक्षिणा के साथ टीका के रूप में रखें। भगवान शालिग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसी जी की सात परिक्रमा कराएं। आरती के बाद विवाह उत्सव संपन्न होता है। द्वादशी के दिन तुलसी और शालिग्राम की पूजा कर व्रत का परायण करें।
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रामगंगा में लगेगी आस्था की डुबकी
देवोत्थान एकादशी पर सोमवार को रामगंगा में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे। रामगंगा घाट के पुजारी पं. मनोज ने बताया कि अबकी बार गुरु अस्त होने से कम भीड़ उमड़ने की आशंका है। हालांकि, प्रतिदिन स्नान करने वालों से करीब दो सौ लोग अधिक पहुंच सकते हैं। बताया कि देवोत्थान पर लोग मुंडन की रस्म पूरी करते हैं। वहीं, जिनकी मुराद पूरी होती है वह मन्नत उतारने आते हैं। लेकिन अबकी बार, स्थिति पिछले वर्ष से अलग रहेगी।