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यूपी सिडकुल! यहां तो सिरे से ही कायदे गुल
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बरेली। चुनाव आचार संहिता पारदर्शिता के लिए है, लेकिन इसी की आड़ में ईवीएम और वीवीपैट वेयरहाउस के निर्माण में गड़बड़ी हो रही है। मानकों को पूरी तरह नजरंदाज कर निर्माण में घटिया सामान का इस्तेमाल किया जा रहा है। निर्वाचन अधिकारी मौके पर पहुंचे तो उन्हें भी धूल से रूबरू होना पड़ा। बाहर कुछ दूरी पर उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम यानी यूपीएसआईडीसी सड़क के निर्माण में मानकों की ऐसी-तैसी कर रहा है। अफसरों का काफिला इसी रास्ते से अंदर गया लेकिन यह घटिया काम भी किसी की नजर में नहीं आया।
प्रशासनिक तंत्र के लिए इन दिनों चुनाव सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। हालांकि इसी की तैयारी की आड़ में बाकी सब-कुछ भी चल रहा है। भ्रष्टाचार के मामले हों या कायदे-कानून की धज्जियां उड़ाकर घटिया निर्माण करने के, सिस्टम ने सारी गड़बड़ियों को नजरअंदाज कर दिया है। हालात ऐसे हैं जैसे प्रशासन खुद को सारे कायदों से मुक्त महसूस कर रहा हो। और तो और निर्वाचन कार्यालय भी इस दौड़ में शामिल हो गया है। निर्वाचन कार्यालय की ही देखरेख में परसाखेड़ा में ईवीएम वेयरहाउस के बाद अब वीवीपैट मशीनों का गोदाम और स्ट्रांग रूम बनाया जा रहा है। ईवीएम भवन निर्वाचन विभाग को सौंपा जा चुका है जो हैंडओवर किए जाने की प्रक्रिया पूरी होते ही इधर-उधर से टूटने लगा है, इसकी रेलिंग तक उखड़ने लगी है। परिसर के अंदर धूल भरी हुई है, जो अंदर घुसते ही बयां कर देती है कि किस कदर घटिया ढंग से इसका निर्माण किया गया है। पास ही वीवीपैट मशीनों का स्ट्रांग रूम निर्माणाधीन है। इसमें भी बजरी-रेत, ईंट, सरिया आदि निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं इस्तेमाल हो रहा। इमारत के सामने फर्श पर टाइल्स बिछाने के काम में भी मानकों की धज्जियां उड़ा दी गई हैं। मुख्य प्रवेश द्वार पर ही धूल लोगों का स्वागत कर रही है।
यूपी सिडकुल कार्यदायी संस्था
करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये लागत से ईवीएम स्ट्रांग रूम भवन (वेयरहाउस) बनाया गया है। इसी परिसर में बहुमंजिला वीवीपैट मशीन भंडार गोदाम (वेयरहाउस) का निर्माण हो रहा है। इसके लिए 2.05 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ है। इन दोनों भवनों की यूपी सिडकुल कार्यदायी संस्था है। यूपी सिडकुल (पुराना नाम समाज कल्याण निर्माण निगम) ने निर्माण कार्य का ठेका एक निजी फर्म को दिया है। परसाखेड़ा स्थित मार्ग नंबर पांच ईवीएम मशीन भवन परिसर में निर्माणाधीन क्षेत्र में भी मनमाना काम होने के साथ सामग्री भी निर्धारित मानकों के स्तर की नहीं है।
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मेरी जानकारी में आया है। कार्यसंस्था द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य हो रही कथित गड़बड़ी चेक चेक कराएंगे। निर्वाचन से जुडे़ किसी भी मामले में मनमानी नहीं होने देंगे।
- वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम
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प्रशासनिक तंत्र के लिए इन दिनों चुनाव सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। हालांकि इसी की तैयारी की आड़ में बाकी सब-कुछ भी चल रहा है। भ्रष्टाचार के मामले हों या कायदे-कानून की धज्जियां उड़ाकर घटिया निर्माण करने के, सिस्टम ने सारी गड़बड़ियों को नजरअंदाज कर दिया है। हालात ऐसे हैं जैसे प्रशासन खुद को सारे कायदों से मुक्त महसूस कर रहा हो। और तो और निर्वाचन कार्यालय भी इस दौड़ में शामिल हो गया है। निर्वाचन कार्यालय की ही देखरेख में परसाखेड़ा में ईवीएम वेयरहाउस के बाद अब वीवीपैट मशीनों का गोदाम और स्ट्रांग रूम बनाया जा रहा है। ईवीएम भवन निर्वाचन विभाग को सौंपा जा चुका है जो हैंडओवर किए जाने की प्रक्रिया पूरी होते ही इधर-उधर से टूटने लगा है, इसकी रेलिंग तक उखड़ने लगी है। परिसर के अंदर धूल भरी हुई है, जो अंदर घुसते ही बयां कर देती है कि किस कदर घटिया ढंग से इसका निर्माण किया गया है। पास ही वीवीपैट मशीनों का स्ट्रांग रूम निर्माणाधीन है। इसमें भी बजरी-रेत, ईंट, सरिया आदि निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं इस्तेमाल हो रहा। इमारत के सामने फर्श पर टाइल्स बिछाने के काम में भी मानकों की धज्जियां उड़ा दी गई हैं। मुख्य प्रवेश द्वार पर ही धूल लोगों का स्वागत कर रही है।
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यूपी सिडकुल कार्यदायी संस्था
करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये लागत से ईवीएम स्ट्रांग रूम भवन (वेयरहाउस) बनाया गया है। इसी परिसर में बहुमंजिला वीवीपैट मशीन भंडार गोदाम (वेयरहाउस) का निर्माण हो रहा है। इसके लिए 2.05 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ है। इन दोनों भवनों की यूपी सिडकुल कार्यदायी संस्था है। यूपी सिडकुल (पुराना नाम समाज कल्याण निर्माण निगम) ने निर्माण कार्य का ठेका एक निजी फर्म को दिया है। परसाखेड़ा स्थित मार्ग नंबर पांच ईवीएम मशीन भवन परिसर में निर्माणाधीन क्षेत्र में भी मनमाना काम होने के साथ सामग्री भी निर्धारित मानकों के स्तर की नहीं है।
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मेरी जानकारी में आया है। कार्यसंस्था द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य हो रही कथित गड़बड़ी चेक चेक कराएंगे। निर्वाचन से जुडे़ किसी भी मामले में मनमानी नहीं होने देंगे।
- वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम