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घूसखोरी, इलाज में लापरवाही का दौर जारी
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बरेली। जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। कुछ दिन पहले जिला अस्पताल में एक महिला ने तीसरी मंजिल से कूदकर जान दे दी। कुछ दिन बाद एक पिता नवजात को सीने से चिपकाए इलाज की भीख मांगता रहा, लेकिन डॉक्टरों ने उसे नहीं देखा। नतीजतन उसने भी दम तोड़ दिया। मुख्यमंत्री ने इस संवेदनहीनता पर सीएमएस डा. केएस गुप्ता को सस्पेंड कर दिया। इसके एक दिन बाद एक और बच्चे की मौत हो गई। शुक्रवार को प्रभारी अधिकारी ने निरीक्षण किया तो भी तमाम खामियां मिलीं। उनके चेताने के बाद भी जिला अस्पताल का सिस्टम सही नहीं हुआ। शनिवार को एक युवक ने घूसखोरी की शिकायत की तो उसे चौकी में बैठा दिया गया। वहीं एक युवक ने आरोप लगाया कि मलेरिया से ग्रसित उसकी पत्नी का सही से उपचार नहीं किया जा रहा है। पेश है जिला अस्पताल के हाल की रिपोर्ट।
घूसखोरी की शिकायत की तो वार्ड ब्वॉय ने दिखाई गुंडई
ओपीडी में शनिवार को भी रोज की तरह मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। शीशगढ़ निवासी एमए का छात्र मुनीर अहमद भी लाइन में लगा अपनी बारी का इंतजार कर रहा था। इसी बीच काफी पीछे खड़े दस मरीजों को लेकर गेट पर खड़ा वार्ड ब्वाय और एक अन्य युवक अंदर जाकर डाक्टर को दिखाने लगा। मुनीर ने इसका विरोध किया। मुनीर ने वार्ड ब्वॉय और एक अन्य व्यक्ति पर पैसा लेकर पीछे खड़े मरीजों को पहले दिखाने का आरोप लगाया। इस बात पर कुछ देर हंगामा चलता रहा। आरोप सुनकर वार्ड ब्वाय का पारा हाई हो गया। वह मुनीर से भिड़ गया और साथी कर्मचारियों को बुलाकर मुनीर को पकड़वा दिया। उसे खरी-खोटी सुनाई और फिर पुलिस चौकी में बैठा दिया। बाद में मामला रफादफा कर दिया गया। वार्ड ब्वाय का कहना है कि उसने किसी मरीज से कोई पैसा नहीं लिया। लेकिन ये भी स्वीकार किया कि जिला अस्पताल में दलाल सक्रिय हैं। कभी-कभी एक दो दलाल युवक ओपीडी में पहुंच लोगों से ठगी कर कर लेते हैं। उधर महिला सर्जिकल वार्ड में भर्ती मरीज आसमा ने आया पर चायपानी के लिए 50 रुपये मांगने का आरोप लगाया।
जिला अस्पताल की जांच में निगेटिव, प्राइवेट में निकला मलेरिया पॉजिटिव
जिला अस्पताल में इलाज का स्तर क्या है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांच तक ठीक से नहीं की जा रही। मलेरिया वार्ड में भर्ती दातागंज भरौरी निवासी अनीता (32) करीब दस दिन से बुखार से पीड़ित हैं। पति रामदास ने उसे 17 जून को जिला अस्पताल में दिखाया। जिला महिला अस्पताल के पैथोलॉजी में उसकी खून की जांच कराई गई। आरोप है कि डाक्टरों ने मलेरिया निगेटिव बता उसे घर भेज दिया गया। लेकिन जब अनीता की हालत नहीं सुधरी तो रामदास ने शुक्रवार को उसे एक निजी चिकित्सक को दिखा उसकी सलाह पर निजी पैथोलॉजी में जांच कराई तो मलेरिया पॉजिटिव निकला। शनिवार को उसने फिर जिला अस्पताल में दिखवाया तो उसे भर्ती कर लिया गया। पति का आरोप है कि अस्पताल वाले उसकी पत्नी की ठीक से उपचार नहीं कर रहे। शिकायत के बाद भी कोई सुन नहीं रहा। मलेरिया वार्ड में ही भर्ती माया देवी (46) व वीरावती (25) के परिवार वालों ने भी इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
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‘जिला अस्पताल में इलाज में लापरवाही की मुझे कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि कोई मरीज इलाज में लापरवाही की शिकायत करता है या फिर कोई मरीज किसी कर्मचारी द्वारा रिश्वत लेने की शिकायत करता है तो वह उसकी जांच करवाएंगे। जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की की जाएगी। मलेरिया की निजी अस्पताल की रिपोर्ट पॉजिटिव आने से यह नहीं मान लेना चाहिए कि सरकारी अस्पताल की पैथोलॉजी की रिपोर्ट गलत है। उसकी भी सत्यता की बात पता की जाएगी।’
- डा. विनीत शुक्ल, सीएमओ/नोडल अधिकारी
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घूसखोरी की शिकायत की तो वार्ड ब्वॉय ने दिखाई गुंडई
ओपीडी में शनिवार को भी रोज की तरह मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। शीशगढ़ निवासी एमए का छात्र मुनीर अहमद भी लाइन में लगा अपनी बारी का इंतजार कर रहा था। इसी बीच काफी पीछे खड़े दस मरीजों को लेकर गेट पर खड़ा वार्ड ब्वाय और एक अन्य युवक अंदर जाकर डाक्टर को दिखाने लगा। मुनीर ने इसका विरोध किया। मुनीर ने वार्ड ब्वॉय और एक अन्य व्यक्ति पर पैसा लेकर पीछे खड़े मरीजों को पहले दिखाने का आरोप लगाया। इस बात पर कुछ देर हंगामा चलता रहा। आरोप सुनकर वार्ड ब्वाय का पारा हाई हो गया। वह मुनीर से भिड़ गया और साथी कर्मचारियों को बुलाकर मुनीर को पकड़वा दिया। उसे खरी-खोटी सुनाई और फिर पुलिस चौकी में बैठा दिया। बाद में मामला रफादफा कर दिया गया। वार्ड ब्वाय का कहना है कि उसने किसी मरीज से कोई पैसा नहीं लिया। लेकिन ये भी स्वीकार किया कि जिला अस्पताल में दलाल सक्रिय हैं। कभी-कभी एक दो दलाल युवक ओपीडी में पहुंच लोगों से ठगी कर कर लेते हैं। उधर महिला सर्जिकल वार्ड में भर्ती मरीज आसमा ने आया पर चायपानी के लिए 50 रुपये मांगने का आरोप लगाया।
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जिला अस्पताल की जांच में निगेटिव, प्राइवेट में निकला मलेरिया पॉजिटिव
जिला अस्पताल में इलाज का स्तर क्या है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांच तक ठीक से नहीं की जा रही। मलेरिया वार्ड में भर्ती दातागंज भरौरी निवासी अनीता (32) करीब दस दिन से बुखार से पीड़ित हैं। पति रामदास ने उसे 17 जून को जिला अस्पताल में दिखाया। जिला महिला अस्पताल के पैथोलॉजी में उसकी खून की जांच कराई गई। आरोप है कि डाक्टरों ने मलेरिया निगेटिव बता उसे घर भेज दिया गया। लेकिन जब अनीता की हालत नहीं सुधरी तो रामदास ने शुक्रवार को उसे एक निजी चिकित्सक को दिखा उसकी सलाह पर निजी पैथोलॉजी में जांच कराई तो मलेरिया पॉजिटिव निकला। शनिवार को उसने फिर जिला अस्पताल में दिखवाया तो उसे भर्ती कर लिया गया। पति का आरोप है कि अस्पताल वाले उसकी पत्नी की ठीक से उपचार नहीं कर रहे। शिकायत के बाद भी कोई सुन नहीं रहा। मलेरिया वार्ड में ही भर्ती माया देवी (46) व वीरावती (25) के परिवार वालों ने भी इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
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‘जिला अस्पताल में इलाज में लापरवाही की मुझे कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि कोई मरीज इलाज में लापरवाही की शिकायत करता है या फिर कोई मरीज किसी कर्मचारी द्वारा रिश्वत लेने की शिकायत करता है तो वह उसकी जांच करवाएंगे। जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की की जाएगी। मलेरिया की निजी अस्पताल की रिपोर्ट पॉजिटिव आने से यह नहीं मान लेना चाहिए कि सरकारी अस्पताल की पैथोलॉजी की रिपोर्ट गलत है। उसकी भी सत्यता की बात पता की जाएगी।’
- डा. विनीत शुक्ल, सीएमओ/नोडल अधिकारी