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फाइलों में कैद होकर रह गई डोर स्टेप डिलवरी
Updated Wed, 28 Jun 2017 01:20 AM IST
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फाइलों में कैद होकर रह गई डोर स्टेप डिलवरी
बाराबंकी। डोर स्टेप डिलवरी योजना की फाइल शासन में कैद होकर रह गई है। योजना को शुरू करने के लिए कई बार प्रस्ताव बनाकर भेजे गए लेकिन आज तक इस पर कोई निर्देश नहीं मिल सके हैं। सूत्रों का कहना है कि राशन माफिया नहीं चाहते कि डोर स्टेप डिलवरी योजना जिले में फिर से लागू हो क्योंकि ऐसा होने से उनका धंधा पूरी तरह से चौपट हो जाएगा। जबकि विभाग का कहना है कि शासन स्तर पर इस दिशा में कार्य चल रहा है जल्द ही योजना को लागू किया जाएगा।
जिले में वर्ष 2009 में डोर स्टेप डिलवरी योजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मसौली ब्लॉक से शुरू की गई थी। योजना का शुभारंभ तत्कालीन खाद्य आयुक्त राजीव अग्रवाल ने सफदरगंज मंडी पहुंच कर किया था। इस दौरान ब्लॉक के सभी 57 कोटे की दुकानों तक राशन पहुंचाने का कार्य किया जा रहा था। योजना मई 2011 तक चली। इसके बाद यह कहकर इसे बंद कर दिया गया कि परीक्षण पूरी तरह से सफल रहा है अब इसे पूरे प्रदेश में एक साथ लागू किया जाएगा। लेकिन छह साल बीतने को है आज तक योजना लागू नहीं की जा सकी है। जबकि योजना को लागू किए जाने को लेकर कई प्रस्ताव विभाग द्वारा बनाकर भेजे गए लेकिन शासन स्तर से इस दिशा में कोई निर्देश नहीं दिए गए।
राशन माफिया नहीं चाहते लागू हो योजना
जिस समय डोर स्टेप डिलवरी योजना को लागू किया गया था उस वक्त राशन माफिया का एक बड़ा गिरोह पूरे जिले में सक्रिय था। यह गिरोह किसी भी कीमत पर नहीं चाहता था कि जिले में डोर स्टेप डिलवरी योजना लागू की जाए। कालाबाजारी का राशन खरीदने के आरोप पर हरख ब्लॉक के एक राशन माफिया व गदिया के एक राशन माफिया को जेल की हवा भी खानी पड़ी। धीरे-धीरे इनका वजूद ही समाप्त हो गया। इनके खिलाफ ताबड़तोड़ हुई कार्रवाई के बाद राशन की कालाबाजारी पर काफी हद तक अंकुश लग गया था। ऐसा नहीं है कि जिले में अभी भी राशन माफिया सक्रिय नहीं है वह नहीं चाहते कि जिले में डोर स्टेप डिलवरी लागू हो।
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भाड़े का अभी भी बकाया है ढाई लाख रुपया
विभाग में कार्य करने वाले ठेकेदार भी योजना को लागू करने के पक्ष में नहीं है। विभाग की माने तो सरकार राशन ढुलाई का जितना पैसा दे रहे है ठेकेदार उतने पैसे में राशन की ढुलाई करने को तैयार नहीं है। दूसरे मसौली ब्लॉक में जिस ठेकेदार से राशन की ढुलाई कराई गई थी उसका अभी करीब ढाई लाख रुपया विभाग पर बाकी है। योजना के बंद हुए छह साल बीतने के बाद भी पूरा भुगतान नहीं किया जा सका है। ठेकेदार इसी को आधार बनाए हुए हैं।
योजना शुरू होने से कालाबाजारी पर लगेगा अंकुश
मसौली ब्लॉक के निवासी झुनन बताते हैं कि डोर स्टेप डिलवरी लागू होने के बाद रास्ते से राशन को बेचने की घटनाओं पर अंकुश लग गया था। इसी क्षेत्र के रहने वाले विजय बताते हैं कि योजना बहुत ही सराहनीय थी इससे राशन की कालाबाजारी पर रोक लग गई थी इसलिए इस योजना का फिर से लागू किया जाना चाहिए। इसी प्रकार रामप्रताप बताते हैं कि इस योजना के लागू होने से कोटेदार राशन की कालाबाजारी नहीं कर पाते थे और सभी कार्डधारकों को उनका हक मिल रहा था। योजना बंद होने के बाद कोटेदार फिर मनमानी करने लगे हैं।
जिले में बहुत जल्द डोर स्टेप डिलवरी योजना लागू की जाएगी। क्योंकि शासन स्तर पर इस दिशा में काफी तेजी से कार्य चल रहा है। वहीं खाद्य सुरक्षा अधिनियम में भी इस योजना को लागू किए जाने को प्रमुखता दी गई है। -जीपी यादव, प्रभारी जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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बाराबंकी। डोर स्टेप डिलवरी योजना की फाइल शासन में कैद होकर रह गई है। योजना को शुरू करने के लिए कई बार प्रस्ताव बनाकर भेजे गए लेकिन आज तक इस पर कोई निर्देश नहीं मिल सके हैं। सूत्रों का कहना है कि राशन माफिया नहीं चाहते कि डोर स्टेप डिलवरी योजना जिले में फिर से लागू हो क्योंकि ऐसा होने से उनका धंधा पूरी तरह से चौपट हो जाएगा। जबकि विभाग का कहना है कि शासन स्तर पर इस दिशा में कार्य चल रहा है जल्द ही योजना को लागू किया जाएगा।
जिले में वर्ष 2009 में डोर स्टेप डिलवरी योजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मसौली ब्लॉक से शुरू की गई थी। योजना का शुभारंभ तत्कालीन खाद्य आयुक्त राजीव अग्रवाल ने सफदरगंज मंडी पहुंच कर किया था। इस दौरान ब्लॉक के सभी 57 कोटे की दुकानों तक राशन पहुंचाने का कार्य किया जा रहा था। योजना मई 2011 तक चली। इसके बाद यह कहकर इसे बंद कर दिया गया कि परीक्षण पूरी तरह से सफल रहा है अब इसे पूरे प्रदेश में एक साथ लागू किया जाएगा। लेकिन छह साल बीतने को है आज तक योजना लागू नहीं की जा सकी है। जबकि योजना को लागू किए जाने को लेकर कई प्रस्ताव विभाग द्वारा बनाकर भेजे गए लेकिन शासन स्तर से इस दिशा में कोई निर्देश नहीं दिए गए।
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राशन माफिया नहीं चाहते लागू हो योजना
जिस समय डोर स्टेप डिलवरी योजना को लागू किया गया था उस वक्त राशन माफिया का एक बड़ा गिरोह पूरे जिले में सक्रिय था। यह गिरोह किसी भी कीमत पर नहीं चाहता था कि जिले में डोर स्टेप डिलवरी योजना लागू की जाए। कालाबाजारी का राशन खरीदने के आरोप पर हरख ब्लॉक के एक राशन माफिया व गदिया के एक राशन माफिया को जेल की हवा भी खानी पड़ी। धीरे-धीरे इनका वजूद ही समाप्त हो गया। इनके खिलाफ ताबड़तोड़ हुई कार्रवाई के बाद राशन की कालाबाजारी पर काफी हद तक अंकुश लग गया था। ऐसा नहीं है कि जिले में अभी भी राशन माफिया सक्रिय नहीं है वह नहीं चाहते कि जिले में डोर स्टेप डिलवरी लागू हो।
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भाड़े का अभी भी बकाया है ढाई लाख रुपया
विभाग में कार्य करने वाले ठेकेदार भी योजना को लागू करने के पक्ष में नहीं है। विभाग की माने तो सरकार राशन ढुलाई का जितना पैसा दे रहे है ठेकेदार उतने पैसे में राशन की ढुलाई करने को तैयार नहीं है। दूसरे मसौली ब्लॉक में जिस ठेकेदार से राशन की ढुलाई कराई गई थी उसका अभी करीब ढाई लाख रुपया विभाग पर बाकी है। योजना के बंद हुए छह साल बीतने के बाद भी पूरा भुगतान नहीं किया जा सका है। ठेकेदार इसी को आधार बनाए हुए हैं।
योजना शुरू होने से कालाबाजारी पर लगेगा अंकुश
मसौली ब्लॉक के निवासी झुनन बताते हैं कि डोर स्टेप डिलवरी लागू होने के बाद रास्ते से राशन को बेचने की घटनाओं पर अंकुश लग गया था। इसी क्षेत्र के रहने वाले विजय बताते हैं कि योजना बहुत ही सराहनीय थी इससे राशन की कालाबाजारी पर रोक लग गई थी इसलिए इस योजना का फिर से लागू किया जाना चाहिए। इसी प्रकार रामप्रताप बताते हैं कि इस योजना के लागू होने से कोटेदार राशन की कालाबाजारी नहीं कर पाते थे और सभी कार्डधारकों को उनका हक मिल रहा था। योजना बंद होने के बाद कोटेदार फिर मनमानी करने लगे हैं।
जिले में बहुत जल्द डोर स्टेप डिलवरी योजना लागू की जाएगी। क्योंकि शासन स्तर पर इस दिशा में काफी तेजी से कार्य चल रहा है। वहीं खाद्य सुरक्षा अधिनियम में भी इस योजना को लागू किए जाने को प्रमुखता दी गई है। -जीपी यादव, प्रभारी जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी