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अपहृत की तलाश में रोड़ा बनी राज्यपाल की आमद
Updated Wed, 26 Sep 2018 12:51 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। पांचवां दिन भी निराशा से भरा रहा। यूपी-एमपी पुलिस को अपहृत ग्रेनाइट शोरूम व्यापारी प्रदीप सेंगर उर्फ नीलू का कुछ सुराग नहीं लगा। उधर, तलाश में जुटे बांदा पुलिस के कई अफसर फिलहाल खोजबीन छोड़कर मंगलवार को बांदा लौट आए। उन्हें बुधवार को यहां आ रहे प्रदेश के राज्यपाल की ड्यूटी में लगाया गया है।
बांदा पुलिस की लगभग 30 सदस्यीय टीम और एमपी पुलिस की दो टीमें पिछले तीन दिन से छतरपुर व आसपास के इलाकों में खाक छान रही है। दो दिन पूर्व छतरपुर जिले के मातगुवां थानांतर्गत पारा चौकी के पास अपहृत नीलू सिंह की इनोवा कार लावारिस अवस्था में पाए जाने के बाद पुलिस की जांच उसी तरफ तेज हो गया है। जंगलों की कांबिंग की जा रही है। लेकिन मंगलवार को शाम पांचवें दिन शाम करीब 96 घंटे बाद भी पुलिस को अपहृत व्यापारी का कोई सुराग नहीं लगा। उपलब्धि के नाम पर फिलहाल उसकी कार और उसमें मिले जूते ही हैं। बांदा पुलिस टीम की अगुवाई यहां के अपर पुलिस अधीक्षक लाल भरत कुमार पाल कर रहे हैं लेकिन वह भी मंगलवार को बांदा लौट आए। टीम में शामिल और भी कई इंसपेक्टर और सब इंसपेक्टर बांदा आ गए हैं। उन्हें बुधवार को कृषि विश्वविद्यालय आ रहे राज्यपाल की ड्यूटी करनी है।
पुलिस ने जो तेजी दो दिन बाद दिखाई और वह पहले दिन ही अपनाई होती तो शायद अपहृत ग्रेनाइट शोरूम व्यापारी नीलू सिंह और घटना के गुनहगार बदमाश सींखचों में होते। पहले हीलाहवाली की और अब एमपी पुलिस अपहृत और बदमाशों का सुराग ढूंढ रही है।
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शुक्रवार 21 सितंबर की रात करीब आठ बजे शोरूम मालिक के अपहरण के तत्काल बाद उसकी इनोवा कार महोबा की तरफ जाने की लोकेशन मिलने के बाद आसपास के सीमावर्ती जनपदों को बांदा पुलिस ने सूचना दे दी थी। इसमें छतरपुर पुलिस भी शामिल है। अपहरणकर्ता बदमाश अपहृत को उसी की कार से छतरपुर ले गए। रास्ते में कई थाने और चौकियां तथा यूपी-एमपी का बैरियर पड़ने के साथ ही शहर के इलाके में लगे सीसी कैमरों से कार बेरोकटोक गुजर गई। एमपी पुलिस ने कहीं नहीं रोका टोका वरना शायद उसी रात एमपी पुलिस को बदमाशों के दबोच लेने और अपहृत को बरामद कर लेने का श्रेय मिल गया होता।
अब जबकि अपहरण में इस्तेमाल अपहृत नीलू की कार छतरपुर जनपद में ही बरामद हुई तो वहां की पुलिस की भी आंखें खुलीं। बदमाशों और अपहृत की तलाश में तेजी लाई। अब दो दिन से एमपी पुलिस बांदा पुलिस के साथ सर्चिंग कर रही है। मातगुवां (छतरपुर) थाना प्रभारी माधवी अग्निहोत्री और वहां के एएसपी जयराज कुबेर का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में लगातार सर्चिंग अभियान चलाया जा रहा है। हर स्तर पर बदमाशों की सुरागरशी की जा रही है। लेकिन कहावत है कि- अब पछताए का होत है, जब चिड़िया चुग गई खेत। उधर, बांदा के अपर एसपी एल बीके पाल ने मंगलवार को देर शाम बताया कि वह फिलहाल राज्यपाल की ड्यूटी में बांदा आ गए हैं। उन्होंने कहा कि अभी कोई ठोस नतीजा हाथ नहीं लगा है।
-तलाश में जुटे पुलिस अफसर गवर्नर ड्यूटी में बुलाए गए
-पांचवें दिन भी अपहृत का कुछ नहीं मिला सुराग
-यूपी-एमपी पुलिस की टीमें कर रही हैं तलाश
बांदा। पांचवां दिन भी निराशा से भरा रहा। यूपी-एमपी पुलिस को अपहृत ग्रेनाइट शोरूम व्यापारी प्रदीप सेंगर उर्फ नीलू का कुछ सुराग नहीं लगा। उधर, तलाश में जुटे बांदा पुलिस के कई अफसर फिलहाल खोजबीन छोड़कर मंगलवार को बांदा लौट आए। उन्हें बुधवार को यहां आ रहे प्रदेश के राज्यपाल की ड्यूटी में लगाया गया है।
बांदा पुलिस की लगभग 30 सदस्यीय टीम और एमपी पुलिस की दो टीमें पिछले तीन दिन से छतरपुर व आसपास के इलाकों में खाक छान रही है। दो दिन पूर्व छतरपुर जिले के मातगुवां थानांतर्गत पारा चौकी के पास अपहृत नीलू सिंह की इनोवा कार लावारिस अवस्था में पाए जाने के बाद पुलिस की जांच उसी तरफ तेज हो गया है। जंगलों की कांबिंग की जा रही है। लेकिन मंगलवार को शाम पांचवें दिन शाम करीब 96 घंटे बाद भी पुलिस को अपहृत व्यापारी का कोई सुराग नहीं लगा। उपलब्धि के नाम पर फिलहाल उसकी कार और उसमें मिले जूते ही हैं। बांदा पुलिस टीम की अगुवाई यहां के अपर पुलिस अधीक्षक लाल भरत कुमार पाल कर रहे हैं लेकिन वह भी मंगलवार को बांदा लौट आए। टीम में शामिल और भी कई इंसपेक्टर और सब इंसपेक्टर बांदा आ गए हैं। उन्हें बुधवार को कृषि विश्वविद्यालय आ रहे राज्यपाल की ड्यूटी करनी है।
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पुलिस ने जो तेजी दो दिन बाद दिखाई और वह पहले दिन ही अपनाई होती तो शायद अपहृत ग्रेनाइट शोरूम व्यापारी नीलू सिंह और घटना के गुनहगार बदमाश सींखचों में होते। पहले हीलाहवाली की और अब एमपी पुलिस अपहृत और बदमाशों का सुराग ढूंढ रही है।
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शुक्रवार 21 सितंबर की रात करीब आठ बजे शोरूम मालिक के अपहरण के तत्काल बाद उसकी इनोवा कार महोबा की तरफ जाने की लोकेशन मिलने के बाद आसपास के सीमावर्ती जनपदों को बांदा पुलिस ने सूचना दे दी थी। इसमें छतरपुर पुलिस भी शामिल है। अपहरणकर्ता बदमाश अपहृत को उसी की कार से छतरपुर ले गए। रास्ते में कई थाने और चौकियां तथा यूपी-एमपी का बैरियर पड़ने के साथ ही शहर के इलाके में लगे सीसी कैमरों से कार बेरोकटोक गुजर गई। एमपी पुलिस ने कहीं नहीं रोका टोका वरना शायद उसी रात एमपी पुलिस को बदमाशों के दबोच लेने और अपहृत को बरामद कर लेने का श्रेय मिल गया होता।
अब जबकि अपहरण में इस्तेमाल अपहृत नीलू की कार छतरपुर जनपद में ही बरामद हुई तो वहां की पुलिस की भी आंखें खुलीं। बदमाशों और अपहृत की तलाश में तेजी लाई। अब दो दिन से एमपी पुलिस बांदा पुलिस के साथ सर्चिंग कर रही है। मातगुवां (छतरपुर) थाना प्रभारी माधवी अग्निहोत्री और वहां के एएसपी जयराज कुबेर का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में लगातार सर्चिंग अभियान चलाया जा रहा है। हर स्तर पर बदमाशों की सुरागरशी की जा रही है। लेकिन कहावत है कि- अब पछताए का होत है, जब चिड़िया चुग गई खेत। उधर, बांदा के अपर एसपी एल बीके पाल ने मंगलवार को देर शाम बताया कि वह फिलहाल राज्यपाल की ड्यूटी में बांदा आ गए हैं। उन्होंने कहा कि अभी कोई ठोस नतीजा हाथ नहीं लगा है।
-तलाश में जुटे पुलिस अफसर गवर्नर ड्यूटी में बुलाए गए
-पांचवें दिन भी अपहृत का कुछ नहीं मिला सुराग
-यूपी-एमपी पुलिस की टीमें कर रही हैं तलाश