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Balrampur News: नौनिहालों के निवाले पर पड़ता रहा डाका, फाइल पलटते रहे अफसर

Wed, 26 Nov 2025 10:41 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 26 Nov 2025 10:41 PM IST
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The children's food was being robbed, officers kept flipping through files.
नगर ​स्थित बीएसए कार्यालय। संवाद
बलरामपुर। बेसिक शिक्षा विभाग की मिड- डे मील (एमडीएम) योजना सीधे विद्यार्थियों से जुड़ी है। अधिकारियों के बगल ही बैठने वाला इसमें घोटाला करता रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी। स्थिति यह रही कि जिन मदरसों और विद्यालयों में विद्यार्थी ही नहीं थे या कम थे, उन्हें भी बजट जारी होता रहा। अधिकारी इसे जान ही नहीं पाए।
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अभी तो जांच में सिर्फ एमडीएम के जिला समन्वयक फिरोज अहमद के साथ ही 44 लोगों का नाम सामने आया है, लेकिन जांच का दायरा बढ़ा तो यह संख्या 100 से पार जा सकती है। विभागीय सूत्रों के अनुसार बिना अधिकारियों के मिलीभगत के यह संभव नहीं दिखता।
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बीएसए ने अभी पोर्टल के माध्यम से जांच करके 11 करोड़ के घोटाले की पुष्टि की है। लेकिन यह खेल लंबा है। वर्ष 2008 से जिला समन्वयक फिरोज को तैनात बताया गया है, ऐसे में आशंका है कि एमडीएम के कनर्वजन कास्ट के साथ ही खाद्यान्न और दूसरे बजट में भी खेल हो सकता है। असल में बिना राशन खारिज किए कन्वर्जन कास्ट (प्रति छात्र आवंटित राशि) जारी नहीं हो सकता है।
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मामले की जांच अब पुलिस कर रही है, तो बड़े खुलासे की उम्मीद है। पुलिस के सूत्रों के अनुसार अभी 44 पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह संख्या 100 तक पहुंच सकती है।
पचपेड़वा और गैसड़ी में पुलिस ने मारा छापा
जांच के लिए मंगलवार रात करीब दो बजे से एसपी ने विशेष टीम बनाई, जिसने छापा मारकर जिला समन्वयक समेत कुछ लोगों को पचपेड़वा और गैसड़ी क्षेत्र से उठाया। बुधवार सुबह तक एटीएस और एसटीएफ की चर्चा रही। अधिकारियों से संपर्क करने पर पता चला कि एसपी की टीम ने जांच की है। दोपहर में डीएम ने बीएसए और वित्त एवं लेखाधिकारी को बुलाकर रिपोर्ट देखी। इसके बाद एफआईआर के आदेश हुए। देर शाम तक एफआईआर को सार्वजनिक न करने पर जोर रहा। बताया जा रहा है कि पुलिस अभी गोपनीय जांच करने की तैयारी में थी, जिससे आरोपियों की गिरफ्तारी हो सके।
एक्सपर्ट कमेंट : अधिकारियों ने की लापरवाही
सेवानिवृत्त सहायक शिक्षा निदेशक फतेह बहादुर सिंह बताते हैं कि एमडीएम केंद्र सरकार की सबसे गंभीर योजना है। इसमें बजट जारी करने से पहले विद्यालयों से उपभोग प्रमाणपत्र लिया जाता है। हर साल 30 सितंबर को छात्र संख्या के आधार पर बजट जारी होता है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी की स्वीकृति पर ही बजट विद्यालयों को जारी होता है। हर दिन एमडीएम की मोबाइल कॉल के जरिए स्थिति ली जाती है। हर साल बजट खर्च की ऑडिट भी होती है। इसके बाद भी पांच वर्ष से खेल हो रहा था, तो विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी।

इनपर हुई एफआईआर
बीएसए की तहरीर के अनुसार घोटाले का मुख्य आरोपी एमडीएम समन्वयक फिरोज है। इसके साथ ही मदरसा आईसा सिद्दीकी पचपेड़वा की प्रधानाध्यक परवीन फात्मा, दारूल उलूम फारुकिया मध्यनगर पचपेड़वा के प्रधानाध्यापक गुलाम गौलुलवरा, मदरसा फजले रहमानिया पचपेड़वा के प्रधानाध्यापक राजकुमार सैनी, प्राथमिक विद्यालय सूरत सिंह डीह गैसड़ी के प्रधानाध्यापक सलीम अहमद व प्रधान सरिता, प्राथमिक विद्यालय चैपुरवाडीह के प्रधानाध्यापक सलीम अहमद और प्रधान नसीम अहमद, प्राथमिक विद्यालय मैनिहवा गैसड़ी के प्रधानाध्यापक सुनील सिंह व प्रधान सरिता, उच्च प्राथमिक विद्यालय रामस्वरूप पुरवा तुलसीपुर के प्रधानाध्यापक अशोक कुमार गुप्त व प्रधान जय प्रकाश मिश्र, उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक कुंवर आनंद सिंह व प्रधान गंगा सहित 44 को नामजद किया गया है।
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