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Balrampur News: चार किमी दूर हाईवे पार कर स्कूल जा रहे बच्चे

Wed, 30 Jul 2025 10:35 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jul 2025 10:35 PM IST
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Children going to school crossing the highway four km away
बलरामपुर में ​स्थित प्राथमिक विद्यालय गैसड़ी द्वितीय ।-संवाद
गैसड़ी (बलरामपुर)। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालयों के विलय की प्रक्रिया बच्चों की सुविधा के लिए की जानी चाहिए थी, लेकिन नगर पंचायत गैसड़ी क्षेत्र में इसका बुरा असर बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई दोनों पर पड़ रहा है।
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उच्च प्राथमिक विद्यालय गैसड़ी प्रथम का हाल ही में कंपोजिट विद्यालय गैसड़ी द्वितीय में विलय कर दिया गया। दोनों विद्यालयों के बीच दूरी तो डेढ़ किलोमीटर है, लेकिन जिन गांवों से विद्यार्थी विद्यालय जाते हैं उन्हें अब चार किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। इस दूरी में उन्हें नेशनल हाईवे (एनएच) भी पार करना पड़ता है, जो बच्चों के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है। काजल और दीपक कक्षा आठ के विद्यार्थी हैं। दोनों अपने गांव से लगभग चार किलोमीटर की दूरी तय कर विद्यालय पहुंचते हैं। विद्यार्थियाें का कहना है कि अब विद्यालय बहुत दूर हो गया है, पांव दुखते हैं। उमेर, शादाब और रियाज भंवरिया गांव से आते हैं, इन्हें भी हाईवे पार कर स्कूल जाना पड़ रहा है। वह कहते हैं हाईवे पार करने में बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। शाहरुख के गांव से भी स्कूल चार किमी. दूर है। अब बच्चे पहले से ज्यादा दूरी तय करने को मजबूर हैं, साथ ही स्कूल आने-जाने में जोखिम भी बना रहता है। (संवाद)
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स्कूल में 183 विद्यार्थी, मरम्मत तक नहीं
पूर्व में कंपोजिट विद्यालय गैसड़ी द्वितीय में 162 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। विलय के बाद 21 और छात्र जुड़े, अब संख्या 183 पहुंच चुकी है।विद्यालय में कमरों में खिड़की-दरवाजे तक नहीं लगे हैं। मरम्मत और सुंदरीकरण का कार्य अधूरा है, जिससे पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।
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बच्चाें को पढ़ाई को लेकर अभिभावक भी परेशान

अभिभावक मोहम्मद नसीम ने कहा कि बच्चों को अब दो किलोमीटर ज्यादा चलना पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त भार है। जंगली जानवरों का भी डर बना रहता है। इरफान खान का कहना है विद्यालय के विलय से छात्राओं को सबसे ज्यादा परेशानी है। उनका काफी समय आने-जाने में ही चला जाता है। शकील अहमद निवासी भंवरिया ने कहा कि पहले से स्कूल अब चार किलोमीटर हो गया है। हाईवे पार करना बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
शिक्षा की राह में अव्यवस्था का कांटा
वर्तमान में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच के बहाने विलय की प्रक्रिया की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है। पिछड़े क्षेत्र में विद्यालयों का इस तरह का विलय, बिना जरूरी सुरक्षा इंतजाम और आधारभूत ढांचे की व्यवस्था किए बगैर, बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ साबित हो सकता है।

- योगेश प्रताप सिंह, पूर्व बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री

कुछ भी बताने से मना किया गया है
विद्यालय विलय के संबंध में कोई भी जानकारी देने से मना किया गया है। शासन की व्यवस्था है, इसमें कोई जानकारी नहीं दी जा सकती है। - शमशेर सिंह राणा, खंड शिक्षा अधिकारी
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