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अब सीआरपी बन समूहों का गठन कराएंगी महिलाएं
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बलिया। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी किस्मत संवारने में जुटी महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। विभाग समूह की ऐसी महिलाओं को चिह्नित कर उन्हें प्रशिक्षित करने की तैयारी में है, जो जिले के अन्य ब्लॉकों के गांवों में जाकर स्वयं सहायता समूहों का गठन करेंगी। इसलिए उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से करीब चार सौ रुपए बतौर पारिश्रमिक भी दिया जाएगा। शर्त यह है कि उनका समूह एक वर्ष पुराना होना चाहिए।
बता दें कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में स्वयं सहायता समूह का गठन मुख्यत: सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) के द्वारा किया जाता है। सीआरपी कम से कम एक साल पुराने समूहों की सदस्य होती है और उनकी सक्रियता के अनुसार उनका चयन किया जाता है। पूर्व में बलिया में जनपद देवरिया, गोरखपुर, आजमगढ़ आदि जनपद से सीआरपी को समूह गठन के लिए बुलाया जाता था, लेकिन अब अपने जनपद के विकास खंड गड़वार, नगरा, सीयर, नवानगर, रसड़ा और चिलकहर के 95 समूह की महिलाओं को सीआरपी के रूप में चयनित व प्रशिक्षित किया जा चुका है। विकास खंड दुबहर, बांसडीह, बेरुआरबारी और बेलहरी में विकास खंड गड़वार, चिलकहर और नगरा के 36 महिलाओं को 12 टीम में विभाजित करके भेजा गया है, जो जिले के विभिन्न ब्लॉकों के गांवों में समूह गठन का कार्य कर रही है। शेष प्रशिक्षित सीआरपी को आगामी सप्ताह में जनपद के ही अलग-अलग विकास खंडों में भेजा जाएगा। सीआरपी के एक दल में तीन महिलाएं होती हैं, जो एक चयनित ग्राम में 15 दिवस रहकर समूहों के गठन, प्रशिक्षण आदि का कार्य करती है। सीआरपी को प्राय: 45 दिवस के लिए कार्य करने भेजा जाता है, जिसमें वह तीन ग्रामों में कार्य करती हैं।
दूसरे जनपद में जाने पर मिलता है पांच सौ रुपये प्रतिदिन
प्रशिक्षण के दौरान सीआरपी के गांवों में रहने की व्यवस्था एनआरएलएम के द्वारा की जाती है। जबकि भोजन आदि की सामग्री सीआरपी का होता है। सीआरपी जिस विकास खंड की है, उसमें कार्य करती है तो लगभग 300 रुपये प्रतिदिन अपने जनपद के किसी दूसरे विकास खंड में लगभग 400 रुपये प्रतिदिन तथा किसी दूसरे जनपद में कार्य करती है तो लगभग 500 रुपये प्रतिदिन मानदेय देने की व्यवस्था है।
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फिलहाल जिले के छह ब्लॉकों के अलग-अलग स्वयं सहायता समूहों से 95 सीआरपी का चयन कर उन्हें प्रशिक्षित करने का कार्य चल रहा है। इनमें से प्रशिक्षित 36 सीआरपी की 12 टीमें समूह गठन के कार्य में जुटी है। - राजीव कुमार सिंह, जिला प्रबंधक, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, बलिया
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बता दें कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में स्वयं सहायता समूह का गठन मुख्यत: सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) के द्वारा किया जाता है। सीआरपी कम से कम एक साल पुराने समूहों की सदस्य होती है और उनकी सक्रियता के अनुसार उनका चयन किया जाता है। पूर्व में बलिया में जनपद देवरिया, गोरखपुर, आजमगढ़ आदि जनपद से सीआरपी को समूह गठन के लिए बुलाया जाता था, लेकिन अब अपने जनपद के विकास खंड गड़वार, नगरा, सीयर, नवानगर, रसड़ा और चिलकहर के 95 समूह की महिलाओं को सीआरपी के रूप में चयनित व प्रशिक्षित किया जा चुका है। विकास खंड दुबहर, बांसडीह, बेरुआरबारी और बेलहरी में विकास खंड गड़वार, चिलकहर और नगरा के 36 महिलाओं को 12 टीम में विभाजित करके भेजा गया है, जो जिले के विभिन्न ब्लॉकों के गांवों में समूह गठन का कार्य कर रही है। शेष प्रशिक्षित सीआरपी को आगामी सप्ताह में जनपद के ही अलग-अलग विकास खंडों में भेजा जाएगा। सीआरपी के एक दल में तीन महिलाएं होती हैं, जो एक चयनित ग्राम में 15 दिवस रहकर समूहों के गठन, प्रशिक्षण आदि का कार्य करती है। सीआरपी को प्राय: 45 दिवस के लिए कार्य करने भेजा जाता है, जिसमें वह तीन ग्रामों में कार्य करती हैं।
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दूसरे जनपद में जाने पर मिलता है पांच सौ रुपये प्रतिदिन
प्रशिक्षण के दौरान सीआरपी के गांवों में रहने की व्यवस्था एनआरएलएम के द्वारा की जाती है। जबकि भोजन आदि की सामग्री सीआरपी का होता है। सीआरपी जिस विकास खंड की है, उसमें कार्य करती है तो लगभग 300 रुपये प्रतिदिन अपने जनपद के किसी दूसरे विकास खंड में लगभग 400 रुपये प्रतिदिन तथा किसी दूसरे जनपद में कार्य करती है तो लगभग 500 रुपये प्रतिदिन मानदेय देने की व्यवस्था है।
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फिलहाल जिले के छह ब्लॉकों के अलग-अलग स्वयं सहायता समूहों से 95 सीआरपी का चयन कर उन्हें प्रशिक्षित करने का कार्य चल रहा है। इनमें से प्रशिक्षित 36 सीआरपी की 12 टीमें समूह गठन के कार्य में जुटी है। - राजीव कुमार सिंह, जिला प्रबंधक, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, बलिया