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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Power cut 75 villages for 11 days Misery in flood-hit areas 63000 people in darkness amidst waters

11 दिन से 75 गांवों कटी बिजली: बाढ़ इलाकों में फजीहत, पानी के बीच अंधेरे में 63 हजार आबादी; पेयजल को तरसे लोग

Thu, 10 Sep 2026 05:56 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 10 Sep 2026 05:56 AM IST
सार

बलिया में बाढ़ प्रभावित 75 गांवों की बिजली 11 दिन से गुल है। पानी के बीच 63 हजार की आबादी अंधेरे में रहने को मजबूर है। मोबाइल चार्ज करने के लिए ग्रामीणों को पांच किलोमीटर तक की यात्रा करनी पड़ रही है। बिजली न होने से शुद्ध पेयजल की समस्या भी जटिल हो गई है। ग्रामीणों ने बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की।

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Power cut 75 villages for 11 days Misery in flood-hit areas 63000 people in darkness amidst waters
चक्की नौरंगा गांव में बिजली सप्लाई बंद कर देने से पसरा अंधेरा। - फोटो : संवाद

विस्तार

जिले में गंगा व सरयू नदी के बाढ़ वाले इलाकों के 75 गांव पिछले 11 दिन से अंधेरे में हैं। करीब 63 हजार लोग पानी के बीच बिना बिजली के रहने को मजबूर हैं। बाढ़ पीड़ितों के सामने कई तरह की दिक्कत खड़ी हो गई है। गंगा और सरयू की बाढ़ से तहसील सदर, बैरिया, बांसडीह, मनियर और रेवती क्षेत्र के गांव टापू बन गए हैं। 

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बिजली विभाग ने सुरक्षा का हवाला देकर सप्लाई बंद कर दी। विभाग का कहना है कि पानी में करंट फैलेगा लेकिन पानी अब कई जगहों से उतर गया है, फिर भी लाइन नहीं जोड़ी गई। बाढ़ के पानी के बीच रात में सांप-बिच्छू का डर, टॉर्च और ढिबरी के सहारे रात कट रही है। मोबाइल चार्ज नहीं, संपर्क टूटा - नाव से 5 किमी जाकर चार्ज कराना पड़ रहा है। पीने के पानी की मोटर बंद, हैंडपंप का गंदा पानी पीने को मजबूर है।

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इधर, गंगा नदी का पानी चार दिनों से ऊपरी दबाव के वजह से उतार-चढ़ाव हो रहा है। प्रशासन की ओर से रोशनी, नाव, राहत किट, पशु चारा आदि की व्यवस्था का दावा तो किया जा रहा है लेकिन सुविधाएं बेपटरी होती दिख रहीं। जगदेवा, चिंतामणि राय के टोला, पांडेयपुर, प्रसाद छपरा, डागरबाद, शुक्ल छपरा, प्रबोधपुर, गरया, रुद्रपुर के आसपास बसे लोग अपने मकानों की छत पर जीवन यापन कर रहे हैं। 

कई परिवारों का भोजन भी नहीं बन पा रहा। चक्की नौरंगा, भुआल छपरा, नौरंगा, उपाध्याय टोला में कोई भी सुविधा मुहैया नहीं कराई जा रही है, जिससे वहां के बाढ़ पीड़ितों में आक्रोश व्याप्त है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट गेज के अनुसार बुधवार की शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 59.320 मीटर दर्ज किया गया। 

इसके अलावा एक सेमी प्रति घंटे की दर से जलस्तर में घटाव का क्रम जारी है। नदी का पानी लाल निशान 57.615 मीटर से 1.705 मीटर ऊपर हिलकोरें मार रहा है। जबकि मध्यम बाढ़ स्तर 58.615 मीटर है। एक्सईएन मूलचंद्र शर्मा ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों से पानी निकलने की रिपोर्ट बाढ़ विभाग की तरफ से दी जाती है। उसके बाद ही सप्लाई दी जा सकती है।

बोले बाढ़ पीड़ित
कई दिनों से घर में पानी भरा है और बिजली भी नहीं है। रात होते ही चारों तरफ अंधेरा छा जाता है। बच्चों और बुजुर्गों को पानी के बीच रहना पड़ रहा है। सांप-बिच्छू और जहरीले जीवों का डर बना रहता है। मोबाइल डिस्चार्ज हो चुका है, नाते रिश्तेदारों से संपर्क टूट चुका है। - यदुनाथ मिश्र, भुआल छपरा

बाढ़ का पानी घर में घुस गया है, नल डूब चुके हैं। जो पानी मिल रहा है, वह इतना गंदा है कि पीने की हिम्मत नहीं होती। मजबूरी में इसी पानी को छानकर इस्तेमाल करना पड़ रहा है। खाना बनाने और बच्चों को पिलाने तक के लिए साफ पानी नहीं मिल रहा। बीमारी फैलने का डर अलग सता रहा है। - दिग्विजय मिश्र, पाण्डेयपुर

बाढ़ ने घर ही नहीं हमारी जिंदगी की पूरी व्यवस्था बिगाड़ दी है। शौचालय पानी में डूब गए हैं। महिलाओं और बच्चों को शौच के लिए सुरक्षित जगह नहीं मिल रही है। अंधेरे में बाहर जाना और भी खतरनाक है। हमारी परेशानी को देखने वाला कोई नहीं है। - कुलदीप ठाकुर, चक्की नौरंगा

हमारे सामने अपने बच्चों को खिलाने की चिंता है तो दूसरी तरफ पशुओं को बचाने की। खेत और घर के आसपास का पूरा चारा पानी में डूब गया है। भूसा भीग चुका है और हरा चारा बर्बाद हो चुके है। चारा नहीं मिला तो उन्हें बचाना मुश्किल हो जाएगा। राहत सामग्री के साथ पशुओं के लिए चारे की भी तत्काल व्यवस्था होनी चाहिए। - मुन्ना यादव, चक्की, उदई छपरा।

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बाढ़ राहत शिविर में एसडीएम ने चखा भोजन का स्वाद
बांसडीह बाढ़ की भीषण त्रासदी झेल रहे सुल्तानपुर पोखरा गांव के पीड़ितों की समस्याओं को लेकर स्थानीय प्रशासन तत्पर दिखाई दे रहा है। एसडीएम बांसडीह डॉ. पुष्कर मिश्रा और तहसीलदार नितिन कुमार सिंह सीधे राहत शिविर पहुंचे। अधिकारियों ने राहत शिविर में भोजन का स्वाद चखकर गुणवत्ता परखी। जलमग्न सुल्तानपुर पोखरा गांव में ग्रामीणों और महिलाओं से बातचीत कर उनके जीवन स्तर तथा समस्याओं का बारीकी से जायजा लिया। 

एसडीएम ने भोजन ठेकेदार को सख्त निर्देश दिए कि भोजन वितरण में किसी भी प्रकार की रोक-टोक नहीं रहेगी और हर व्यक्ति को उसकी आवश्यकता के अनुसार भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके तहत भोजन के दैनिक पैकेटों की संख्या 300 से बढ़ाकर 450 कर दी गई है। बताया कि मवेशियों के लिए भूसा, गांव में दो अतिरिक्त नावों की तैनाती, रातभर निर्बाध बिजली आपूर्ति, पेयजल के लिए पानी का टैंकर और नियमित चिकित्सा व्यवस्था का विस्तार करने के निर्देश दिए गए हैं।

बाढ़ का पानी घटा, लेकिन कीचड़ और जलभराव से ग्रामीणों की मुश्किलें बरकरार
दया छपरा। गंगा नदी में आई बाढ़ का पानी कच्छप गति से घटने के बावजूद ग्रामीणों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। चौथे दिन ग्राम पंचायत के संपर्क मार्ग से पानी तो निकल गया, लेकिन निचले इलाकों में अब भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। संपर्क मार्ग पर 10 मीटर तो कहीं 50 मीटर तक पानी और कीचड़ के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।

पीएन इंटर कॉलेज में अब भी जलभराव
क्षेत्र के पी एन इंटर कॉलेज दुबे छपरा में अभी भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है। विद्यालय परिसर में पानी जमा होने के कारण छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के आवागमन में काफी कठिनाई हो रही है। इसके बावजूद विद्यालय प्रशासन छात्रों की प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराने में जुटा हुआ है।

प्रधानाचार्य सुधांशु प्रकाश मिश्रा अन्य शिक्षकों के साथ चाय की दुकान पर बैठकर छात्रों की प्रवेश प्रक्रिया पूरी करा रहे हैं। प्रधानाचार्य ने बताया कि विद्यालय परिसर से बाढ़ का पानी पूरी तरह निकलने में करीब एक सप्ताह लग सकता है। इसके बाद परिसर में जमा कीचड़ और गंदगी की सफाई में भी लगभग एक सप्ताह का समय लगेगा। यदि परिस्थितियां सामान्य रहीं तो करीब 15 दिन बाद ही विद्यालय में पठन-पाठन शुरू हो सकेगा।

बाढ़ प्रभावित गांवों में 800 मरीजों को दवाएं वितरित
जयप्रकाश नगर। मुरली छपरा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित चांददीयर और कोडरहा नौबरार पंचायत के गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच की। टीम ने करीब 800 मरीजों को दवा किट और महिलाओं को सैनिटरी पैड दिए। प्रभारी चिकित्साधिकारी देवनीति ने बीमारियों से बचाव हेतु साफ पानी पीने और स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी।

पानी घटने के बाद भी हजारों बाढ़ पीड़ित बेहाल, राहत का इंतजार
बैरिया। सरयू नदी की बाढ़ से सुरेमनपुर दियरांचल के दर्जनभर गांवों में स्थिति गंभीर बनी हुई है।गोपालनगर टाड़ी, गोपालनगर, शिवाल मठिया, वशिष्ठनगर, मानगढ़, देवपुर मठिया, टोला फतेह राय और बकुलहा समेत कई गांवों में अब भी घरों में बाढ़ का पानी भरा है। गोपालनगर टाड़ी की सीमानती देवी, राजकली देवी,मनोरमा देवी और सुमित्रा देवी तथा शिवाल मठिया की संध्या देवी और मरछिया देवी समेत दर्जनों महिलाओं ने बताया कि इस बार बाढ़ में उन्हें बेबसी और लाचारी का सामना करना पड़ रहा है। कहा कि कागजों में नावों की संख्या अधिक दिखाई जा रही है, जबकि मौके पर जरूरत के मुताबिक नावें उपलब्ध नहीं हैं।

11 से 14 सितंबर के बीच फिर बढ़ सकता है पानी
उप जिलाधिकारी न्यायिक धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि गंगा नदी का पानी कम होने के बावजूद बाढ़ पीड़ितों को फिलहाल घरों में लौटने से मना किया जा रहा है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। उन्होंने बताया कि 11 से 14 सितंबर के बीच गंगा के जलस्तर में फिर बढ़ोतरी की आशंका है। इस बार गंगा में पहले की अपेक्षा अधिक पानी बढ़ने की संभावना को देखते हुए सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए बाढ़ पीड़ितों को वहीं रहने की सलाह दी जा रही है।

सपा नेता ने बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचाई मदद
घोघा । सरयू नदी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों सुल्तानपुर , कोलकला, महाराजपुर व चांदपुर में बुधवार को सपा नेता नीरज सिंह गुड्डू ने सैकड़ों बाढ़ पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री का वितरण किया । इस दौरान उन्होंने बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इस दौरान राजेश्वर सिंह, भूपेंद्र यादव, ध्रुव सिंह, योगेंद्र सिंह आदि थे।

सरयू के जलस्तर में बढ़ोतरी ने बढ़ाई परेशानी
बेल्थरारोड। पिछले कई दिनों से सरयू नदी के जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी है। इससे बाढ़ की संभावना बढ़ गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बुधवार की शाम जलस्तर 64.70 मीटर दर्ज किया गया, जो लाल निशान से 69 सेंटीमीटर अधिक है। पिछले 24 घंटे के दौरान जलस्तर में 8 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई। आयोग ने अगले 24 घंटे में जलस्तर में वृद्धि होने की संभावना जताई है।

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