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Ballia News: डबल मर्डर में मां-बेटी और बेटे को आजीवन कारावास
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बलिया। प्रेम प्रपंच में हुए डबल मर्डर के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी) कोर्ट प्रमोद गंगवार के न्यायालय ने सुनवाई की। इस मामले में पकड़ी थाना क्षेत्र के जेठवार गांव की महिला निर्मला राय, उसके बेटे प्रिंस राय और शादीशुदा बेटी पिंकी राय को दोषी करार दिया। तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 70-70 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया। जबकि तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में मुक्त कर दिया गया।
पकड़ी थाना क्षेत्र के जेठवार गांव में 29 मई 2017 की शाम निर्मला राय की पुत्री खुशबू राय तथा फेफना थाना क्षेत्र के खोरीपाकड़ निवासी अजीत गोंड की घर में हत्या हो गई थी। अजीत खुशबू के भाई प्रिंस का दोस्त था। उसका अक्सर घर आना-जाना था। अजीत के परिजनों ने बताया कि दोनों के बीच प्रेम संबंध था। जानकारी होने पर उनकी हत्या कर दी गई। दोहरे हत्याकांड की जांच के बाद पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया था। इसे बाद परिजनों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
न्यायालय ने मामले को संदिग्ध मानते हुए थाना पकड़ी को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। न्यायालय के आदेश के बाद पकड़ी पुलिस ने हत्या व एससी-एसटी एक्ट की धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद पुलिस ने विवेचना कर आत्महत्या मानते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। तत्पश्चात परिजनों ने इसको हत्या बताते हुए जिला व प्रदेश के पुलिस अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई। इसके बाद पीडि़त ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसमें सुनवाई करते हुए फरवरी 2019 को उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने पुलिस महानिदेशक लखनऊ को स्पेशल जांच टीम (एसआईटी) के किसी योग्य एवं सक्षम अधिकारी से जांच कराने तथा दो महीने के अंदर उच्च न्यायालय को जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था।
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पकड़ी थाना क्षेत्र के जेठवार गांव में 29 मई 2017 की शाम निर्मला राय की पुत्री खुशबू राय तथा फेफना थाना क्षेत्र के खोरीपाकड़ निवासी अजीत गोंड की घर में हत्या हो गई थी। अजीत खुशबू के भाई प्रिंस का दोस्त था। उसका अक्सर घर आना-जाना था। अजीत के परिजनों ने बताया कि दोनों के बीच प्रेम संबंध था। जानकारी होने पर उनकी हत्या कर दी गई। दोहरे हत्याकांड की जांच के बाद पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया था। इसे बाद परिजनों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
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न्यायालय ने मामले को संदिग्ध मानते हुए थाना पकड़ी को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। न्यायालय के आदेश के बाद पकड़ी पुलिस ने हत्या व एससी-एसटी एक्ट की धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद पुलिस ने विवेचना कर आत्महत्या मानते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। तत्पश्चात परिजनों ने इसको हत्या बताते हुए जिला व प्रदेश के पुलिस अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई। इसके बाद पीडि़त ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसमें सुनवाई करते हुए फरवरी 2019 को उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने पुलिस महानिदेशक लखनऊ को स्पेशल जांच टीम (एसआईटी) के किसी योग्य एवं सक्षम अधिकारी से जांच कराने तथा दो महीने के अंदर उच्च न्यायालय को जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था।
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