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Ballia News: 60 गांवों की 52 हजार आबादी बिजली संकट से रही बेहाल
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मझौवां। उमस भरी गर्मी के बीच दिघार स्थित 132/33 केवी विद्युत उपकेंद्र से जुड़े 60 से अधिक गांवों की करीब 52 हजार आबादी पिछले तीन सप्ताह से बिजली संकट से जूझ रही है। सात से आठ घंटे की अघोषित कटौती ने लोगों का चैन और नींद छीन ली है। बिजली कब आएगी और कब चली जाएगी, इसका कोई ठिकाना नहीं है। रात में कुछ देर के लिए आपूर्ति बहाल होती भी है तो बार-बार ट्रिपिंग के कारण लोगों को राहत नहीं मिल पाती।
ग्रामीणों के अनुसार शाम छह बजे बिजली कटने के बाद रात करीब 8:30 से नौ बजे तक आपूर्ति मिलती है। इसके बाद फिर रात 11 बजे तक बिजली गुल रहती है। कुछ देर के लिए आपूर्ति बहाल होने के बाद दो बजे तक फिर कटौती होती है। रात दो बजे करीब 15 मिनट बिजली आने के बाद सुबह चार बजे तक आपूर्ति बाधित रहती है। इस तरह पूरी रात बिजली की आंख-मिचौली चलती रहती है।
उमस भरी रातों में बच्चे गर्मी से बिलखते रहते हैं और बुजुर्गों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। महिलाएं हाथ के पंखे से बच्चों और बुजुर्गों को हवा करने को मजबूर हैं। घरों में लगे पंखे और कूलर बिजली के अभाव में शोपीस बने हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 40-45 मिनट के लिए बिजली आती भी है तो चार-पांच बार ट्रिपिंग हो जाती है। ग्रामीण बसंत सिन्हा, संतोष पांडेय, उमेश यादव, दशरथ मिश्र, नागेंद्र सिंह, कौशल पांडेय और प्रभुनाथ ओझा ने सरकार के निर्धारित ग्रामीण रोस्टर के अनुसार नियमित आपूर्ति की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो विद्युत विभाग के कार्यालय का घेराव कर आंदोलन किया जाएगा।
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ग्रामीणों के अनुसार शाम छह बजे बिजली कटने के बाद रात करीब 8:30 से नौ बजे तक आपूर्ति मिलती है। इसके बाद फिर रात 11 बजे तक बिजली गुल रहती है। कुछ देर के लिए आपूर्ति बहाल होने के बाद दो बजे तक फिर कटौती होती है। रात दो बजे करीब 15 मिनट बिजली आने के बाद सुबह चार बजे तक आपूर्ति बाधित रहती है। इस तरह पूरी रात बिजली की आंख-मिचौली चलती रहती है।
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उमस भरी रातों में बच्चे गर्मी से बिलखते रहते हैं और बुजुर्गों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। महिलाएं हाथ के पंखे से बच्चों और बुजुर्गों को हवा करने को मजबूर हैं। घरों में लगे पंखे और कूलर बिजली के अभाव में शोपीस बने हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 40-45 मिनट के लिए बिजली आती भी है तो चार-पांच बार ट्रिपिंग हो जाती है। ग्रामीण बसंत सिन्हा, संतोष पांडेय, उमेश यादव, दशरथ मिश्र, नागेंद्र सिंह, कौशल पांडेय और प्रभुनाथ ओझा ने सरकार के निर्धारित ग्रामीण रोस्टर के अनुसार नियमित आपूर्ति की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो विद्युत विभाग के कार्यालय का घेराव कर आंदोलन किया जाएगा।
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