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साइबर क्राइम का 50 फीसदी मामला पेडिंग
Updated Thu, 09 Nov 2017 11:42 PM IST
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बलिया। प्रदेश सरकार पुलिस विभाग को आधुनिक तकनीकी से लैस करने के लिए कटिबद्ध है, लेकिन तकनीकी रूप से दक्ष साइबर अपराधियों से पुलिस कई कदम पीछे है, क्योंकि साइबर सेल के पास आधुनिक संसाधनों का अभाव है। ऐसे में अपराध के प्रत्येक मामले का पर्दाफाश नहीं हो पा रहा है।
जनपद के विभिन्न थानों में साइबर क्राइम के दर्जनों मुकदमें दर्ज किए गए है। लेकिन इसमें 50 फीसदी ही मामलों का निस्तारण पुलिस कर पाई है। सबसे अधिक मामले धोखे से एटीएम का पासवर्ड पूछकर खरीददारी करने तथा पैसा निकालने के हैं। पुलिस कार्यालय में साइबर क्राइम से संबंधित मामलों का निस्तारण करने के लिए साइबर सेल की स्थापना वर्ष 2013 की गई थी, जो वर्तमान में पुलिस लाइन में स्थापित कर दिया गया है। जिले के संबंधित थानों में पंजीकृत साइबर क्राइम के मुकदमों की विवेचना के लिए एसआई की तैनात भी की गई है। लेकिन सेल में आधुनिक तकनीक पर आधारित उपकरणों की कमी है। इसके अलावा थानों पर ऐसे अपराधों के पंजीकरण करने की अलग से कोई व्यवस्था है और न ही कोई जांच अधिकारी तैनात है। साइबर क्राइम के सबसे अधिक मामले बैंक के थाने में पंजीकृत है। जिसमें धोखे से एटीएम का पासवर्ड, 16 डिजीट का नंबर, आधार कार्ड से लिंक करने का बहाना आदि शामिल है। जबकि बिना इजाजत के व्हाट्स एप, फेसबुक, ट्वीटर आदि पर अश्लील फोटो व मैसेज भेजने का मामला न के बराबर है। अगर है तो इक्का-दुक्का।
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जनपद के विभिन्न थानों में साइबर क्राइम के दर्जनों मुकदमें दर्ज किए गए है। लेकिन इसमें 50 फीसदी ही मामलों का निस्तारण पुलिस कर पाई है। सबसे अधिक मामले धोखे से एटीएम का पासवर्ड पूछकर खरीददारी करने तथा पैसा निकालने के हैं। पुलिस कार्यालय में साइबर क्राइम से संबंधित मामलों का निस्तारण करने के लिए साइबर सेल की स्थापना वर्ष 2013 की गई थी, जो वर्तमान में पुलिस लाइन में स्थापित कर दिया गया है। जिले के संबंधित थानों में पंजीकृत साइबर क्राइम के मुकदमों की विवेचना के लिए एसआई की तैनात भी की गई है। लेकिन सेल में आधुनिक तकनीक पर आधारित उपकरणों की कमी है। इसके अलावा थानों पर ऐसे अपराधों के पंजीकरण करने की अलग से कोई व्यवस्था है और न ही कोई जांच अधिकारी तैनात है। साइबर क्राइम के सबसे अधिक मामले बैंक के थाने में पंजीकृत है। जिसमें धोखे से एटीएम का पासवर्ड, 16 डिजीट का नंबर, आधार कार्ड से लिंक करने का बहाना आदि शामिल है। जबकि बिना इजाजत के व्हाट्स एप, फेसबुक, ट्वीटर आदि पर अश्लील फोटो व मैसेज भेजने का मामला न के बराबर है। अगर है तो इक्का-दुक्का।
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