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शराब और लाल बालू के अवैध धंधे के लिए नदी बना मुफीद
Updated Tue, 10 Oct 2017 10:51 PM IST
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बैरिया। तहसील क्षेत्र के द्वाबा में बहती गंगा व घाघरा नदी इन दिनों दो मामलों मे खास चर्चा में है। वह दो मामले हैं बिहार में शराब की आपूर्ति व बिहार से लाल बालू की उप्र सीमा में आपूर्ति। द्वाबा के गंगा व घाघरा के सूनसान घाट इन दो धंधो में लिप्त लोगों के लिए मुफीद जगह बन गई है। भले ही सामान्य लोगों के आने-जाने का क्रम लगा रहता है, लेकिन शाम होते ही दूसरा खेल शुरु हो जाता है ।
आम लोग भी यह बात मानते हैं कि बिना सेटिंग इतना बड़ा गेम संभव नहीं है। बिहार में शराबबंदी के बाद उप्र और बिहार के शराब माफियाओं के बीच गहरी साठगांठ है, शराब माफिया बिहार में शराब भेजने या ले जाने के लिए जल मार्ग को सबसे महफूज मानते हैं। जबकि लाल बालू का खेल भी इन्हीं घाटों से होती है। इस वजह से आधी रात को जय प्रकाश नगर के घाघरा नदी का सठिया ढाला घाट, अठगांवा घाट, गंगा तट का टिपुरी घाट, महुली घाट, बड़का बैजू टोला घाट, सिन्हा, दोकटी, शिवपुर, सती घाट, दयाछपरा, दुर्जनपुर घाट , गोपालनगर के डूमाईगढ़ घाट जब सुन पड़ जाते हैं, तब शुरू होता है। शराब व लालबालू का बड़ा खेल। जानकार बताते हैं कि उधर से नाव के साथ बिहार के शराब माफिया घाटों पर आ जाते हैं और इधर के शराब माफिया अपनी खेप पिकअप, ट्रैक्टर या अन्य साधनों से पहुंचा देते हैं और बिहार से आई नाव पर लोड कर देते है। इन कार्यों मे मात्र घंटा भर लगता है, कमाई लाखों रुपये हो जाती है। जबकि नावों से लालबालू इन घाटों पर उतारा जाता है और शुरू हो जाता है आम लोगों के नाम पर माफिया गिरी। दोनों प्रान्तो के सीमा पर पुलिस की पैनी नजर है, पुलिस की तैनाती भी खास कर जेपी नगर में है। चांददीयर पुलिस चौकी पर भले ही चेक पोस्ट बना दिया गया है । लेकिन माफिया अवैध शराब व लालबालू सप्लाई करने का खेल दोकटी थाना सोनबरसा के रास्ते या फिर सबसे महफूज रास्ता लालगंज बैरिया के रास्ते करते हैं। पुलिस का दावा है कि शराब का खेल नहीं होगा। बावजूद इसके धंधा जोरो पर है। इस बाबत क्षेत्राधिकारी उमेश कुमार यादव ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों पर पुलिस की पैनी नजर है, समय-समय पर कार्रवाई होती रहती है।
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आम लोग भी यह बात मानते हैं कि बिना सेटिंग इतना बड़ा गेम संभव नहीं है। बिहार में शराबबंदी के बाद उप्र और बिहार के शराब माफियाओं के बीच गहरी साठगांठ है, शराब माफिया बिहार में शराब भेजने या ले जाने के लिए जल मार्ग को सबसे महफूज मानते हैं। जबकि लाल बालू का खेल भी इन्हीं घाटों से होती है। इस वजह से आधी रात को जय प्रकाश नगर के घाघरा नदी का सठिया ढाला घाट, अठगांवा घाट, गंगा तट का टिपुरी घाट, महुली घाट, बड़का बैजू टोला घाट, सिन्हा, दोकटी, शिवपुर, सती घाट, दयाछपरा, दुर्जनपुर घाट , गोपालनगर के डूमाईगढ़ घाट जब सुन पड़ जाते हैं, तब शुरू होता है। शराब व लालबालू का बड़ा खेल। जानकार बताते हैं कि उधर से नाव के साथ बिहार के शराब माफिया घाटों पर आ जाते हैं और इधर के शराब माफिया अपनी खेप पिकअप, ट्रैक्टर या अन्य साधनों से पहुंचा देते हैं और बिहार से आई नाव पर लोड कर देते है। इन कार्यों मे मात्र घंटा भर लगता है, कमाई लाखों रुपये हो जाती है। जबकि नावों से लालबालू इन घाटों पर उतारा जाता है और शुरू हो जाता है आम लोगों के नाम पर माफिया गिरी। दोनों प्रान्तो के सीमा पर पुलिस की पैनी नजर है, पुलिस की तैनाती भी खास कर जेपी नगर में है। चांददीयर पुलिस चौकी पर भले ही चेक पोस्ट बना दिया गया है । लेकिन माफिया अवैध शराब व लालबालू सप्लाई करने का खेल दोकटी थाना सोनबरसा के रास्ते या फिर सबसे महफूज रास्ता लालगंज बैरिया के रास्ते करते हैं। पुलिस का दावा है कि शराब का खेल नहीं होगा। बावजूद इसके धंधा जोरो पर है। इस बाबत क्षेत्राधिकारी उमेश कुमार यादव ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों पर पुलिस की पैनी नजर है, समय-समय पर कार्रवाई होती रहती है।
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