{"_id":"6612e5f2b5f2270f51014045","slug":"detect-deepfakes-avoid-rumors-bahraich-news-c-104-1-slko1050-104341-2024-04-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bahraich News: डीपफीक की परख करें, अफवाहों से बचें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bahraich News: डीपफीक की परख करें, अफवाहों से बचें
Sun, 07 Apr 2024 11:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sun, 07 Apr 2024 11:59 PM IST
विज्ञापन
कार्यशाला में हुआ मंथन, चुनाव के दौरान कैसे बरतेें सावधानी
गूगल सर्च इंजन से डाउनलोड करें फ्री टूल्स, खुद करें परख
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा बनाए गए डीपफेक न्यूज व वीडियो न सिर्फ चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं बल्कि इसके माध्यम से सामाजिक सौहार्द भी बिगड़ सकता है। इंडो नेपाल सीमा क्षेत्र होने के कारण इसके बारे में जिलेवासियों को जानकारी होना जरूरी है। इसलिए श्रावस्ती जिले में पहली बार इस तरह की कार्यशाला आयोजित की गई ताकि लोग इसका उपयोग कर डीप फेक न्यूज व अफवाहों की परख कर सकें।
यह बातें जिला जज देवेंद्र सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा बनाये गये डीपफेक की पहचान के लिए पुलिस कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में कही। वहीं डीएम कृतिका शर्मा ने कहा कि पुलिस व प्रशासनिक व्यवस्था को सक्रिय करने के लिए यह कार्यशाला आयोजित की गई है। इसके माध्यम से भ्रामक सूचनाओं, अपराध को पहचानने व उसे नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी। वहीं एसपी घनश्याम चौरसिया ने कहा कि आज सभी के पास एंड्रायड मोबाइल है जिन पर डीप फेक न्यूज, वीडियो व अन्य मैसेज आते हैं। इनकी सत्यता जाने बगैर उसे न तो शेयर करें और न ही फारवर्ड करें। इसके लिए लोग गूगल सर्च इंजन से नि:शुल्क टूल्स डाउनलोड कर लें ताकि एआई डीप फेक मामलों की जानकारी मिल सके।
गलत या भ्रामक सूचना एआई उत्पन्न सामग्री, राजनीतिक अभियानों में जालसाजी व लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधक है। डीपफेक डिटेक्शन कार्यशाला के माध्यम से पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों को जो तकनीकी व कानून से संबंधित बाते बताई गई हैं। इस दौरान सागर विश्नोई, भरत नायक, शुभम सिंह, प्रणव द्विवेदी व अमिय कृष्ण उपाध्याय ने कार्यशाला में एआई व डीपफेक मामलों की पहचान तथा इनके फायदे व नुकसान के बारे में बताया।
विज्ञापन
इस दौरान एएसपी प्रवीण कुमार यादव, एसएसबी कमांडेंट आरके राजेश्वरी, एडीएम अमरेन्द्र कुमार वर्मा, एसडीएम भिनगा पीयूष जायसवाल, जमुनहा एसके राय, सीओ भिनगा अतुल कुमार चौबे, जमुनहा सतीश कुमार शर्मा, इकौना संतोष कुमार, सीओ साइबर संदीप कुमार वर्मा, न्याय विभाग से जेडी, एसपीओ, एपीओ, प्रभारी निरीक्षक साइबर थाना, आरआई सहित अन्य मौजूद रहे।
डीपफेक को पहचानने में मिलेगी मदद
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते व तेजी से बदलते परिदृश्य में गलत सूचनाओं के जोखिम, अपराध को पहचानने और नियंत्रित करने के लिए फ्री टूल्स ऐप सहायक होगी। लोगों को सक्रिय बनाने, एआई डीपफ़ेक मामलों का अध्ययन करने और वास्तविक प्रदर्शनों के माध्यम से प्रतिभागियों को गहरे झूठ की पहचान करने तथा उसके प्रभाव सामने आने के लिए प्रैक्टिकल रणनीतियों व उपकरणों के साथ सशक्त किया गया। इससे चुनाव में फर्जी एआई कंटेंट, डीपफेक को पहचानने में मदद मिलेगी। -घनश्याम चौरसिया, एसपी
चुनाव के मद्देनजर उपयोगी रही वर्कशॉप
किसी प्रकार के फोटो, वीडियो, लिंक का फैक्ट चेक करने के लिए सर्च इंजन गूगल पर मौजूद फ्री टूल्स के बारे में सभी को जानना चाहिए। इसकी मदद से अफवाहों फेक न्यूज सूचनाओं की सत्यता की जांच करते हुए अफवाहों को रोकने में सहायता मिलेगी। इस कार्यशाला के माध्यम से हमें चुनाव में सावधानी बरतने में भी मदद मिली। -कृतिका शर्मा, डीएम
विज्ञापन
गूगल सर्च इंजन से डाउनलोड करें फ्री टूल्स, खुद करें परख
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा बनाए गए डीपफेक न्यूज व वीडियो न सिर्फ चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं बल्कि इसके माध्यम से सामाजिक सौहार्द भी बिगड़ सकता है। इंडो नेपाल सीमा क्षेत्र होने के कारण इसके बारे में जिलेवासियों को जानकारी होना जरूरी है। इसलिए श्रावस्ती जिले में पहली बार इस तरह की कार्यशाला आयोजित की गई ताकि लोग इसका उपयोग कर डीप फेक न्यूज व अफवाहों की परख कर सकें।
यह बातें जिला जज देवेंद्र सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा बनाये गये डीपफेक की पहचान के लिए पुलिस कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में कही। वहीं डीएम कृतिका शर्मा ने कहा कि पुलिस व प्रशासनिक व्यवस्था को सक्रिय करने के लिए यह कार्यशाला आयोजित की गई है। इसके माध्यम से भ्रामक सूचनाओं, अपराध को पहचानने व उसे नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी। वहीं एसपी घनश्याम चौरसिया ने कहा कि आज सभी के पास एंड्रायड मोबाइल है जिन पर डीप फेक न्यूज, वीडियो व अन्य मैसेज आते हैं। इनकी सत्यता जाने बगैर उसे न तो शेयर करें और न ही फारवर्ड करें। इसके लिए लोग गूगल सर्च इंजन से नि:शुल्क टूल्स डाउनलोड कर लें ताकि एआई डीप फेक मामलों की जानकारी मिल सके।
विज्ञापन
गलत या भ्रामक सूचना एआई उत्पन्न सामग्री, राजनीतिक अभियानों में जालसाजी व लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधक है। डीपफेक डिटेक्शन कार्यशाला के माध्यम से पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों को जो तकनीकी व कानून से संबंधित बाते बताई गई हैं। इस दौरान सागर विश्नोई, भरत नायक, शुभम सिंह, प्रणव द्विवेदी व अमिय कृष्ण उपाध्याय ने कार्यशाला में एआई व डीपफेक मामलों की पहचान तथा इनके फायदे व नुकसान के बारे में बताया।
विज्ञापन
इस दौरान एएसपी प्रवीण कुमार यादव, एसएसबी कमांडेंट आरके राजेश्वरी, एडीएम अमरेन्द्र कुमार वर्मा, एसडीएम भिनगा पीयूष जायसवाल, जमुनहा एसके राय, सीओ भिनगा अतुल कुमार चौबे, जमुनहा सतीश कुमार शर्मा, इकौना संतोष कुमार, सीओ साइबर संदीप कुमार वर्मा, न्याय विभाग से जेडी, एसपीओ, एपीओ, प्रभारी निरीक्षक साइबर थाना, आरआई सहित अन्य मौजूद रहे।
डीपफेक को पहचानने में मिलेगी मदद
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते व तेजी से बदलते परिदृश्य में गलत सूचनाओं के जोखिम, अपराध को पहचानने और नियंत्रित करने के लिए फ्री टूल्स ऐप सहायक होगी। लोगों को सक्रिय बनाने, एआई डीपफ़ेक मामलों का अध्ययन करने और वास्तविक प्रदर्शनों के माध्यम से प्रतिभागियों को गहरे झूठ की पहचान करने तथा उसके प्रभाव सामने आने के लिए प्रैक्टिकल रणनीतियों व उपकरणों के साथ सशक्त किया गया। इससे चुनाव में फर्जी एआई कंटेंट, डीपफेक को पहचानने में मदद मिलेगी। -घनश्याम चौरसिया, एसपी
चुनाव के मद्देनजर उपयोगी रही वर्कशॉप
किसी प्रकार के फोटो, वीडियो, लिंक का फैक्ट चेक करने के लिए सर्च इंजन गूगल पर मौजूद फ्री टूल्स के बारे में सभी को जानना चाहिए। इसकी मदद से अफवाहों फेक न्यूज सूचनाओं की सत्यता की जांच करते हुए अफवाहों को रोकने में सहायता मिलेगी। इस कार्यशाला के माध्यम से हमें चुनाव में सावधानी बरतने में भी मदद मिली। -कृतिका शर्मा, डीएम