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कतर्निया के दुर्लभ वन्यजीवों पर तस्करों की नजर
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Thu, 09 Jul 2015 10:24 PM IST
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बहराइच। मानसून सत्र में सेंक्चुरी वन क्षेत्र में पर्यटकों का आवागमन प्रतिबंधित है। लेकिन, इसी मानसून में तस्कर और माफिया दुर्गम रास्तों से जंगल में प्रवेश कर वन संपदा और दुर्लभ वन्यजीवों को निशाना बना सकते हैं।
यह आशंका खुफिया एजेंसियों ने जताई है। इसके बाद कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। मानसून सत्र में विशेष गश्त की व्यूह रचना तैयार की गई है।
एसएसबी के साथ संयुक्त गश्त के लिए अधिकारियों से संपर्क साधा गया है।
551 वर्ग किलोमीटर में फैले कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र जंगल की सीमा नेपाल और लखीमपुर जनपद से सटी है। नेपाल सीमा पर एसएसबी के चलते कड़ी चौकसी बरती जा रही है लेकिन तस्कर और माफिया को लखीमपुर की खुली सीमा रास आ रही है।
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बीते दिनों कई चक्रों में माफिया इसी रास्ते घुसपैठ कर वन संपदा को नुकसान पहुंचा चुके हैं। इस समय बरसात में कीचड़ और जलभराव के कारण पर्यटकों का आवागमन प्रतिबंधित है।
ऐसे मौसम का फायदा नेपाल और लखीमपुर की खुली सीमा से तस्कर और माफिया उठा सकते हैं। खुफिया एजेंसियों ने ये आशंका जताई है कि जंगल में घुसपैठ कर वन संपदा के साथ दुर्लभ बाघ और तेंदुओं को भी निशाना बना सकते हैं। इसके चलते कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
जंगल के प्रत्येक बैरियर पर तलाशी लेने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही रेंज कार्यालय और जंगल में स्थित वन चौकियों पर तैनात कर्मचारियों की टीमें गठित कर दुर्गम रास्तों पर गश्त बढ़ा दी गई है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी ने बताया कि मानसून सत्र संवेदनशील सत्र होता है। 15 जून से 15 नवंबर के मध्य पर्यटकों की आमद भी नहीं होती।
ऐसे में तस्कर और माफिया के घुसपैठ की आशंका बढ़ जाती है। उसके चलते व्यूह रचना कर ली गई है। सात रेंज के सभी वन क्षेत्राधिकारियों और डिप्टी रेजरों को नियमित पर्यवेक्षण के निर्देश दिए गए हैं। प्रतिदिन की रिपोर्ट तलब की जा रही है।
बनाई गई वन चौकी
डीएफओ आशीष तिवारी ने बताया कि नेपाल के वन, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ तीन माह में कई चक्र बैठकें हुई हैं।
ऐसे में नेपाल की खुली सीमा से जंगल में माफिया और तस्कर के घुसपैठ पर काफी हद तक अंकुश लगा है। नेपाल पुलिस और प्रशासन भी सख्ती बरत रहा है।
लेकिन, लखीमपुर की सीमा काफी संवेदनशील है। इसके चलते लखीमपुर से लगने वाली सीमा पर गश्त बढ़ाने के साथ ही प्रतापपुर जंगल मटेरा में नई वन चौकी स्थापित की गई है। वॉच टावर भी बनाए गए हैं। 24 घंटे जंगल के रास्तों पर टोह ली जा रही है।
मिलान गश्त तेज
डीएफओ ने बताया कि जंगल स्थित सात रेंज कार्यालय के अलावा प्रत्येक बीट में वन चौकियां स्थापित है।
उन वन चौकियों से एक से दूसरी चौकी पर मिलान गश्त के आदेश दिए गए हैं, जिसके तहत तीन से चार वनकर्मियों की टोली संबंधित चौकी से चलकर निकट की चौकी तक जाएगी।
उधर से दूसरी टोली दुर्गम रास्तों से होकर दूसरी वन चौकी पर पहुंचेगी। जिससे नियमित गश्त होती रहेगी। घुसपैठ नहीं हो सकेगी।
नदियों में 24 घंटे हो रही गश्त
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर गेरुआ, कौड़ियाला और घाघरा नदियां गुजरती हैं। गेरुआ और कौड़ियाला नेपाल से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करती है।
जबकि घाघरा नदी लखीमपुर की सीमा में स्थित है। इन तीनों नदियों में मोटरबोट और नाव के सहारे वन दरोगा और वन रक्षक क्लाक वाइज 24 घंटे गश्त कर रहे हैं।
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यह आशंका खुफिया एजेंसियों ने जताई है। इसके बाद कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। मानसून सत्र में विशेष गश्त की व्यूह रचना तैयार की गई है।
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एसएसबी के साथ संयुक्त गश्त के लिए अधिकारियों से संपर्क साधा गया है।
551 वर्ग किलोमीटर में फैले कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र जंगल की सीमा नेपाल और लखीमपुर जनपद से सटी है। नेपाल सीमा पर एसएसबी के चलते कड़ी चौकसी बरती जा रही है लेकिन तस्कर और माफिया को लखीमपुर की खुली सीमा रास आ रही है।
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बीते दिनों कई चक्रों में माफिया इसी रास्ते घुसपैठ कर वन संपदा को नुकसान पहुंचा चुके हैं। इस समय बरसात में कीचड़ और जलभराव के कारण पर्यटकों का आवागमन प्रतिबंधित है।
ऐसे मौसम का फायदा नेपाल और लखीमपुर की खुली सीमा से तस्कर और माफिया उठा सकते हैं। खुफिया एजेंसियों ने ये आशंका जताई है कि जंगल में घुसपैठ कर वन संपदा के साथ दुर्लभ बाघ और तेंदुओं को भी निशाना बना सकते हैं। इसके चलते कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
जंगल के प्रत्येक बैरियर पर तलाशी लेने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही रेंज कार्यालय और जंगल में स्थित वन चौकियों पर तैनात कर्मचारियों की टीमें गठित कर दुर्गम रास्तों पर गश्त बढ़ा दी गई है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी ने बताया कि मानसून सत्र संवेदनशील सत्र होता है। 15 जून से 15 नवंबर के मध्य पर्यटकों की आमद भी नहीं होती।
ऐसे में तस्कर और माफिया के घुसपैठ की आशंका बढ़ जाती है। उसके चलते व्यूह रचना कर ली गई है। सात रेंज के सभी वन क्षेत्राधिकारियों और डिप्टी रेजरों को नियमित पर्यवेक्षण के निर्देश दिए गए हैं। प्रतिदिन की रिपोर्ट तलब की जा रही है।
बनाई गई वन चौकी
डीएफओ आशीष तिवारी ने बताया कि नेपाल के वन, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ तीन माह में कई चक्र बैठकें हुई हैं।
ऐसे में नेपाल की खुली सीमा से जंगल में माफिया और तस्कर के घुसपैठ पर काफी हद तक अंकुश लगा है। नेपाल पुलिस और प्रशासन भी सख्ती बरत रहा है।
लेकिन, लखीमपुर की सीमा काफी संवेदनशील है। इसके चलते लखीमपुर से लगने वाली सीमा पर गश्त बढ़ाने के साथ ही प्रतापपुर जंगल मटेरा में नई वन चौकी स्थापित की गई है। वॉच टावर भी बनाए गए हैं। 24 घंटे जंगल के रास्तों पर टोह ली जा रही है।
मिलान गश्त तेज
डीएफओ ने बताया कि जंगल स्थित सात रेंज कार्यालय के अलावा प्रत्येक बीट में वन चौकियां स्थापित है।
उन वन चौकियों से एक से दूसरी चौकी पर मिलान गश्त के आदेश दिए गए हैं, जिसके तहत तीन से चार वनकर्मियों की टोली संबंधित चौकी से चलकर निकट की चौकी तक जाएगी।
उधर से दूसरी टोली दुर्गम रास्तों से होकर दूसरी वन चौकी पर पहुंचेगी। जिससे नियमित गश्त होती रहेगी। घुसपैठ नहीं हो सकेगी।
नदियों में 24 घंटे हो रही गश्त
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर गेरुआ, कौड़ियाला और घाघरा नदियां गुजरती हैं। गेरुआ और कौड़ियाला नेपाल से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करती है।
जबकि घाघरा नदी लखीमपुर की सीमा में स्थित है। इन तीनों नदियों में मोटरबोट और नाव के सहारे वन दरोगा और वन रक्षक क्लाक वाइज 24 घंटे गश्त कर रहे हैं।