Baghpat News: राशन कार्ड की अनिवार्यता से बेसिक स्कूलों में अटकी नामांकन प्रक्रिया, फर्श पर बैठकर कर रहे पढ़ाई
एक अप्रैल से नया शिक्षा शुरू हो गया है। लेकिन बड़ौत के स्कूलों में राशन कार्ड की अनिवार्यता से हजारों छात्रों का नामांकन अटक गया है। ऐसे में बच्चों के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
विस्तार
बड़ौत में बेसिक स्कूलों में राशन कार्ड की अनिवार्यता से हजारों छात्रों का नामांकन अटक गया है। प्रेरणा पोर्टल पर इस बार नामांकन होना है, जिसमें राशन कार्ड को प्राथमिकता दी गई है। बिना कार्ड की एंट्री किए प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। स्थानीय स्तर पर इस समस्या का समाधान नहीं हो रहा।
ऐसे में अभिभावकों की दिक्कतें बढ़ गई है और वे अपने बच्चों का नाम राशन कार्ड में शामिल कराने के लिए आपूर्ति विभाग कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर है। ऐसे में हजारों बच्चों के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। क्योंकि नगर निकाय चुनाव में तकरीबन 22 से अधिक शिक्षकों की डयूटी भी लगी हुई है। जिस कारण नामांकन प्रकिया पूरी तरह से प्रभावित हो रही है।
यह भी पढ़ें: दुर्लभ: मेरठ में उर्दू में लिखी पहली रामायण और गीता सीसीएसयू में संरक्षित, 122 साल पहले हुआ था प्रकाशन
इससे भी बड़ी परेशानी नामांकन पोर्टल पर राशन कार्ड की अनिवार्यता का होना है। हर विद्यालय में नए छात्र का नामांकन करने के दौरान उनका पता, आईडी और फोटो अपलोड करने के साथ ही एक कॉलम राशन कार्ड का आ रहा है।
इस कॉलम में राशन कार्ड के अलावा कोई और आईडी लगाने का भी विकल्प नहीं दिया गया है। तकरीबन 3000 छात्रों के अभिभावकों के पास या तो राशन कार्ड नहीं है या ऐसे छात्र हैं जिनके अभिभावकों के राशन कार्ड में उनका नाम नहीं हैं।
सरकारी स्कूलों में घट रहे नामांकन
जिले में शहर से लेकर गांवों तक कई स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं। बीएसए कार्यालय के अधिकारियों के संरक्षण से ही ऐसे स्कूल चल रहे हैं। बावजूद इसके इन स्कूल संचालकों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। जिस कारण परिषदीय स्कूलों में छात्रों की संख्या घट रही है।
फर्श पर बैठकर पढ़ाई कर रहे बच्चे
सरकार भले ही परिषदीय स्कूलों में बेहतर शिक्षा और व्यवस्था का दावा करती हो, लेकिन जिले के बहुत से परिषदीय स्कूलों में फर्नीचर तक की व्यवस्था नहीं है। बच्चे अभी भी फर्श पर बैठकर ही पढ़ाई करते हैं। एक ही कमरे के अंदर समस्त कक्षाओं के छात्र बैठते हैं।
कई स्कूलों का जीर्णोद्धार नहीं होने के कारण उन स्कूलों के बच्चे दूसरे स्कूलों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं विभागीय अधिकारी एक अप्रैल से ही कक्षा एक से आठ तक के सभी विद्यार्थियों के नई किताबों से पढ़ने का दावा कर रहे थे, लेकिन एक माह बाद भी ऐसा नहीं हो सका है। अधिकांश स्कूलों में सभी बच्चों के पास किताबें नहीं हैं। कुछ बच्चे बिना किताब तो कुछ पुरानी किताबों से पढ़ने को मजबूर हैं।
नामांकन प्रक्रिया में राशन कार्ड को इस बार अनिवार्य किया गया है। हर विद्यालय में नए छात्र का नामांकन करने के दौरान उनका पता, आईडी और फोटो अपलोड करने के साथ ही एक कॉलम राशन कार्ड का आ रहा है। इस कॉलम में राशन कार्ड के अलावा कोई और आईडी लगाने का भी विकल्प नहीं दिया गया है। जिस कारण दिक्कतें हो रही हैं। उन्होंने अभिभावकों को जल्द से जल्द राशन कार्ड में बच्चों के नाम शामिल कराने का आह्वान किया है। - वंदना सैनी, एबीएसए