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छात्रावास भवन के ध्वस्तीकरण मामले में जांच शुरू
Updated Sat, 14 Jul 2018 12:34 AM IST
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छात्रावास भवन के ध्वस्तीकरण मामले में जांच शुरू
बड़ौत। दिगंबर जैन कालेज के छात्रावास का भवन, बिना प्रबंध समिति में प्रस्ताव पारित किए ध्वस्त कराकर मलबे को विक्रय करने के मामले में शिकायत पर जांच शुरू कर दी गई है। मंडलायुक्त ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। कॉलेज प्राचार्य का दावा है कि प्रबंध समिति से प्रस्ताव पारित कराया गया था। कालेज में दीवार और अन्य निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
बता दें कि कॉलेज के साधारण सभा के चार आजीवन सदस्य सतीश चंद जैन, सुभाष जैन, अनिल कुमार जैन एवं धनेंद्र कुमार जैन द्वारा की गई शिकायत पर यह जांच शुरू हुई है। शिकायत में महाविद्यालय में अवैधानिक रूप से की जाने वाली नियुक्तियों के संबंध में भी बताया गया है। कहा गया कि उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम के अनुसार चेयरमैन, प्रबंध समिति का अध्यक्ष होता है परंतु कॉलेज के मंत्री ने स्वयं चेयरमैन घोषित करके कॉलेज में अवैधानिक नियुक्ति कर दी है।
इसी उठापटक के बीच अब आजीवन सदस्यों ने गांधी रोड स्थित छात्रावास के लगभग 50 कमरे शौचालय वार्डन हाउस प्राचार्य आवास आदि ध्वस्त करके मलबा एवं अन्य सामग्री को विक्रय करके मोटी रकम एेंठी गई है। इस मामले में सीएम और मंडलायुक्त के नाम शिकायत की गई थी। इस संबंध मेें कॉलेज प्राचार्य डा. वीरेंद्र सिंह का कहना है कि प्रबंध समिति का प्रसताव नियमानुसार पारित किया गया था। मलबा विक्रय नहीं किया गया है। इस मामले में झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। मलबे से जो ईंटें मिली थीं, उनसे दीवार और अन्य निर्माण कराया जा रहा है।
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बड़ौत। दिगंबर जैन कालेज के छात्रावास का भवन, बिना प्रबंध समिति में प्रस्ताव पारित किए ध्वस्त कराकर मलबे को विक्रय करने के मामले में शिकायत पर जांच शुरू कर दी गई है। मंडलायुक्त ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। कॉलेज प्राचार्य का दावा है कि प्रबंध समिति से प्रस्ताव पारित कराया गया था। कालेज में दीवार और अन्य निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
बता दें कि कॉलेज के साधारण सभा के चार आजीवन सदस्य सतीश चंद जैन, सुभाष जैन, अनिल कुमार जैन एवं धनेंद्र कुमार जैन द्वारा की गई शिकायत पर यह जांच शुरू हुई है। शिकायत में महाविद्यालय में अवैधानिक रूप से की जाने वाली नियुक्तियों के संबंध में भी बताया गया है। कहा गया कि उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम के अनुसार चेयरमैन, प्रबंध समिति का अध्यक्ष होता है परंतु कॉलेज के मंत्री ने स्वयं चेयरमैन घोषित करके कॉलेज में अवैधानिक नियुक्ति कर दी है।
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इसी उठापटक के बीच अब आजीवन सदस्यों ने गांधी रोड स्थित छात्रावास के लगभग 50 कमरे शौचालय वार्डन हाउस प्राचार्य आवास आदि ध्वस्त करके मलबा एवं अन्य सामग्री को विक्रय करके मोटी रकम एेंठी गई है। इस मामले में सीएम और मंडलायुक्त के नाम शिकायत की गई थी। इस संबंध मेें कॉलेज प्राचार्य डा. वीरेंद्र सिंह का कहना है कि प्रबंध समिति का प्रसताव नियमानुसार पारित किया गया था। मलबा विक्रय नहीं किया गया है। इस मामले में झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। मलबे से जो ईंटें मिली थीं, उनसे दीवार और अन्य निर्माण कराया जा रहा है।
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