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सिनौली में दो साल तक चल सकता है उत्खनन
Updated Mon, 07 May 2018 01:04 AM IST
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बागपत। सिनौली में उत्खनन में मिली सफलता से पुरातत्व विभाग की टीम गदगद है। एएसआई की डायरेक्टर उषा शर्मा के सामने पावर प्रजेंटेशन के माध्यम से सिनौली में अब तक की कामयाबी को दिखाया गया। यही नहीं लंबे उत्खनन की अनुमति मांगी गई है। माना जा रहा है कि उत्खनन का समय दो साल तक बढ़ाया जा सकता है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम सिनौली में उत्खनन कार्य कर रही हैं। अब तक उत्खनन में मृदभांड, पुरानी तलवार, म्यान, तांबे के अवशेष के अलावा नर कंकाल भी मिले हैं। करीब 4500 साल पहले इतिहास की परतों को जोड़ने के लिए किए जा रहे उत्खनन में कई महत्वपूर्ण प्रमाण अब तक मिल चुके हैं। पहले चरण की खुदाई में हड्प्पा कालीन शवादान गृह मिला , अब दूसरे चरण की खुदाई में तीन नर कंकाल मिल चुके हैं। कब्र में लकड़ी और तांबे के टुकड़े मिले हैं। पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ. एसके मंजुल ने दिल्ली में आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया की डायरेक्टर उषा शर्मा के सामने अब तक की कामयाबी को रखा है। ताम्र युगीन, हड़प्पा कालीन सभ्यता, तीन कंकाल समेत अब तक बरामद चीजों के विषय में बताया। पुरातत्व टीम का मानना है कि उत्खनन के लिए अभी तंबा समय चाहिए, ताकि सभ्यताओं का तालमेल हो सके।
पहले भी सिनौली में हो चुकी खुदाई
बागपत। सिनौली में वर्ष 2005-06 में उत्खनन कार्य डॉ. डीवी शर्मा के निर्देशन में किया । हड़प्पा कालीन शवादान गृह मिल चुका है। पिछले दिनों डॉ. शर्मा ने भी सिनौली पहुंचकर साइट का निरीक्षण किया और यहां से बरामद हुए मृदभांड एवं अन्य चीजों की जानकारी जुटाई।
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सिनौली में बनाया जाए संग्रहालय
बागपत। शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन का कहना है कि उन्होंने भी एएसआई की डायरेक्टर उषा शर्मा को पत्र लिखा है। मांग रखी गई है कि उत्खनन का समय बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि सभ्यताओं के विषय में पता लगाया जा सके। सिनौली या बड़ौत में स्थायी संग्रहालय बनाया जाना चाहिए।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम सिनौली में उत्खनन कार्य कर रही हैं। अब तक उत्खनन में मृदभांड, पुरानी तलवार, म्यान, तांबे के अवशेष के अलावा नर कंकाल भी मिले हैं। करीब 4500 साल पहले इतिहास की परतों को जोड़ने के लिए किए जा रहे उत्खनन में कई महत्वपूर्ण प्रमाण अब तक मिल चुके हैं। पहले चरण की खुदाई में हड्प्पा कालीन शवादान गृह मिला , अब दूसरे चरण की खुदाई में तीन नर कंकाल मिल चुके हैं। कब्र में लकड़ी और तांबे के टुकड़े मिले हैं। पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ. एसके मंजुल ने दिल्ली में आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया की डायरेक्टर उषा शर्मा के सामने अब तक की कामयाबी को रखा है। ताम्र युगीन, हड़प्पा कालीन सभ्यता, तीन कंकाल समेत अब तक बरामद चीजों के विषय में बताया। पुरातत्व टीम का मानना है कि उत्खनन के लिए अभी तंबा समय चाहिए, ताकि सभ्यताओं का तालमेल हो सके।
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पहले भी सिनौली में हो चुकी खुदाई
बागपत। सिनौली में वर्ष 2005-06 में उत्खनन कार्य डॉ. डीवी शर्मा के निर्देशन में किया । हड़प्पा कालीन शवादान गृह मिल चुका है। पिछले दिनों डॉ. शर्मा ने भी सिनौली पहुंचकर साइट का निरीक्षण किया और यहां से बरामद हुए मृदभांड एवं अन्य चीजों की जानकारी जुटाई।
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सिनौली में बनाया जाए संग्रहालय
बागपत। शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन का कहना है कि उन्होंने भी एएसआई की डायरेक्टर उषा शर्मा को पत्र लिखा है। मांग रखी गई है कि उत्खनन का समय बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि सभ्यताओं के विषय में पता लगाया जा सके। सिनौली या बड़ौत में स्थायी संग्रहालय बनाया जाना चाहिए।