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नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की
Updated Sun, 24 Sep 2017 01:19 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
नवरात्र के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने उपवास रखे और दुर्गा के तीसरे स्वरूप माता चंद्र घटा की विशेष पूजा की। इस दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
नवरात्र के तीसरे दिन शनिवार को सुबह से ही मंदिरों में भक्तों भीड़ लग गई। नगर के पंचवटी मंदिर, रेलवे स्टेशन स्थित वैष्णो मंदिर, पंच मुखी मंदिर ठाकुरद्वारा, पट्टी चौधरान विश्वकर्मा मंदिर, पंजाबी क्वार्टर सहित अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं ने चंद्र घंटा मां की पूजा की और मंदिरों में महिलाओं ने कीर्तनों के आयोजन किए। रेलवे स्टेशन स्थित वैष्णो मंदिर में पुजारी आकाश भारद्वाज ने चंद्र घंटा मां की कथाएं सुनाई। इसमें चंद्रमा, शनि एवं घंटा नाद का प्रतीक है। देवासुर संग्राम ने देवी के घंटा नाद से अनेकानेक असुर काल के ग्रास बन गए। उन्होंने आराधना में नाद का विशेष ध्यान दिया । सुर एवं संगीत का वर्गीकरण का बीजमंत्र माना है। चंद्र घंटा देवी इसी की आराध्य शक्ति है और शांति का प्रतीक है।
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नवरात्र के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने उपवास रखे और दुर्गा के तीसरे स्वरूप माता चंद्र घटा की विशेष पूजा की। इस दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
नवरात्र के तीसरे दिन शनिवार को सुबह से ही मंदिरों में भक्तों भीड़ लग गई। नगर के पंचवटी मंदिर, रेलवे स्टेशन स्थित वैष्णो मंदिर, पंच मुखी मंदिर ठाकुरद्वारा, पट्टी चौधरान विश्वकर्मा मंदिर, पंजाबी क्वार्टर सहित अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं ने चंद्र घंटा मां की पूजा की और मंदिरों में महिलाओं ने कीर्तनों के आयोजन किए। रेलवे स्टेशन स्थित वैष्णो मंदिर में पुजारी आकाश भारद्वाज ने चंद्र घंटा मां की कथाएं सुनाई। इसमें चंद्रमा, शनि एवं घंटा नाद का प्रतीक है। देवासुर संग्राम ने देवी के घंटा नाद से अनेकानेक असुर काल के ग्रास बन गए। उन्होंने आराधना में नाद का विशेष ध्यान दिया । सुर एवं संगीत का वर्गीकरण का बीजमंत्र माना है। चंद्र घंटा देवी इसी की आराध्य शक्ति है और शांति का प्रतीक है।
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