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युवा पीढ़ी को वैदिक संस्कृति से जोड़ने का आह्वान
Updated Wed, 21 Mar 2018 01:07 AM IST
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दोघट (बागपत)। निरपुड़ा गांव में आर्य समाज के वार्षिकोत्सव में युवा पीढ़ी को वैदिक संस्कृति से जोड़ने का आह्वान किया गया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. भोपाल सिंह और भजनोपदेशक अंजली आर्या को अंगवस्त्र एवं सम्मान राशि भेंट कर सम्मानित किया।
निरपुड़ा के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव के समापन समारोह में मुजफ्फरनगर से पहुंचे आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि मनभर चर्चा की अपेक्षा कण भर आचरण श्रेष्ठ है। समाज और परिवार में शांति, सुख, अनुशासन, स्नेह, संस्कार और उन्नति वेदानुकूल आचरण से आएगी। आचरण ही जीवन का आधार है। युवा पीढ़ी को यज्ञ, योग और वैदिक संस्कृति से जोड़ना होगा, तभी समाज सशक्त बनेगा। सत्यार्थ प्रकाश पढ़ने से जीवन में नई क्रांति आएगी।
शुक्रताल से आए स्वामी सत्यवेश ने कहा कि यज्ञ श्रेष्ठ कर्म है। आदिकाल से चाहे कोई युग रहा हो, यज्ञ हमारी संस्कृति है। यज्ञ आत्मा की पवित्रता के साथ सद्गुणों का भाव भी जागृत करता है। महर्षि दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों और आदर्शों को अपनाएं। समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ महर्षि का अभियान आज भी प्रासंगिक है। पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. भोपाल सिंह ने कहा कि ईश्वर सर्वव्यापी है। प्रभु की उपासना करना ही धर्म है। जीवन में कर्म की पवित्रता आवश्यक है। वेदपाठी राजवीर सिंह शास्त्री एवं कपिल शास्त्री रहे। भजनोपदेशक अंजली आर्या तथा अशोक प्रबोध तुगाना ने भजन सुनाए। डॉ. चन्द्रवीर सिंह दाहा, पंडित प्रेमचंद, वीरेन्द्र राणा, जयपाल सिंह, ब्रजपाल सिंह, राम कुमार, शोबिर आदि मौजूद रहे।
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निरपुड़ा के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव के समापन समारोह में मुजफ्फरनगर से पहुंचे आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि मनभर चर्चा की अपेक्षा कण भर आचरण श्रेष्ठ है। समाज और परिवार में शांति, सुख, अनुशासन, स्नेह, संस्कार और उन्नति वेदानुकूल आचरण से आएगी। आचरण ही जीवन का आधार है। युवा पीढ़ी को यज्ञ, योग और वैदिक संस्कृति से जोड़ना होगा, तभी समाज सशक्त बनेगा। सत्यार्थ प्रकाश पढ़ने से जीवन में नई क्रांति आएगी।
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शुक्रताल से आए स्वामी सत्यवेश ने कहा कि यज्ञ श्रेष्ठ कर्म है। आदिकाल से चाहे कोई युग रहा हो, यज्ञ हमारी संस्कृति है। यज्ञ आत्मा की पवित्रता के साथ सद्गुणों का भाव भी जागृत करता है। महर्षि दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों और आदर्शों को अपनाएं। समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ महर्षि का अभियान आज भी प्रासंगिक है। पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. भोपाल सिंह ने कहा कि ईश्वर सर्वव्यापी है। प्रभु की उपासना करना ही धर्म है। जीवन में कर्म की पवित्रता आवश्यक है। वेदपाठी राजवीर सिंह शास्त्री एवं कपिल शास्त्री रहे। भजनोपदेशक अंजली आर्या तथा अशोक प्रबोध तुगाना ने भजन सुनाए। डॉ. चन्द्रवीर सिंह दाहा, पंडित प्रेमचंद, वीरेन्द्र राणा, जयपाल सिंह, ब्रजपाल सिंह, राम कुमार, शोबिर आदि मौजूद रहे।
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