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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   The path to the school remains submerged in water for three months; children reach it carrying their slippers in their hands.

Azamgarh News: तीन महीने पानी में डूबा रहता है स्कूल का रास्ता, चप्पल हाथ में लेकर पहुंचते हैं बच्चे

Fri, 09 Oct 2026 12:31 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2026 12:31 AM IST
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The path to the school remains submerged in water for three months; children reach it carrying their slippers in their hands.
पानी के बीच से होकर गुजरते कंपोजिट विद्यालय कुसमहरा के बच्चे। संवाद
देश की आजादी के 79 साल बाद भी शिक्षा क्षेत्र के कुसमहरा ग्राम सभा स्थित कंपोजिट विद्यालय की तस्वीर लोगों को विचलित कर रही है। यहां पढ़ने वाले बच्चे हाथों में चप्पल और पीठ पर बैग टांगकर विद्यालय पहुंचते हैं।
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साल के तीन महीने विद्यालय तक जाने वाला मार्ग दो से तीन फीट पानी में डूबा रहता है। यहां तक कि अध्यापकों और अध्यापिकाओं को भी इसी पानी से होकर गुजरना पड़ता है।
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सरकार निजी विद्यालयों की तर्ज पर परिषदीय विद्यालयों का संचालन करने के लिए प्रयास कर रही है। लेकिन, अहरौला शिक्षा क्षेत्र के बूढ़नपुर तहसील स्थित कुसमहरा गांव के कंपोजिट विद्यालय सरकार के इन प्रयासों पर पानी फेर रहा है।
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विद्यालय में कुल 300 छात्र पंजीकृत हैं। इनको शिक्षा देने के लिए 13 अध्यापकों की तैनाती भी है। लेकिन विद्यालय तक जाने के लिए रास्ता ही नहीं है। कागजों में रास्ता नहीं है और अगल-बगल के लोग अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं।
काफी दिनों से एक कच्चा मार्ग है, जो विद्यालय को जाता है। इसी रास्ते से बच्चे विद्यालय तक पहुंचते हैं। यह रास्ता हर वर्ष जुलाई माह में पानी में डूब जाता है। सितंबर-अक्तूबर तक यह पानी में डूबा रहता है।
लगभग 100 मीटर रास्ता तय करने के लिए छात्रों को चप्पल और जूते हाथों में लेकर गुजरना पड़ता है। रास्ते पर दो से तीन फीट तक पानी लगा रहता है। इसी रास्ते से होकर विद्यालय के अध्यापक और अध्यापिकाओं को भी गुजरना पड़ता है। अध्यापकों को अपनी बाइक विद्यालय से 200 मीटर दूर सड़क पर खड़ी करनी पड़ती है।
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विद्यालय के लिए नहीं है कोई सार्वजनिक रास्ता
ग्रामीण नरेंद्र बहादुर सिंह, रणजीत सिंह आदि लोगों ने बताया कि यहां सार्वजनिक रास्ता नहीं है। गांव के कई लोगों की काश्तकारी व बाग के नाम से जमीन है। नरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि उनकी भी जमीन वहां पर है। वह रास्ते के लिए देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हम लोग खुद चाहते हैं कि स्कूल का रास्ता बन जाए। राजा जौनपुर ज्ञानदत्त द्विवेदी की भी जमीन अभी भी पड़ी हुई है, जो स्कूल के गेट के सामने है। अगर समन्वय हो जाए तो वह रास्ता बन सकता है, लेकिन समन्वय के अभाव में यह रास्ता बन नहीं पा रहा है।
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प्रधानाध्यापक 10 साल पहले शिकायत कर बैठे शांत
स्कूल के प्रधानाध्यापक संजय यादव ने बताया कि वह इसके लिए कई बार गांव स्तर पर ग्राम प्रधान और अन्य लोगों से मौखिक रूप से अपील भी कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 10 साल पहले लिखित रूप से शिकायत की गई थी। राजस्व टीम की ओर से कुछ पहल हुई, लेकिन जिनकी जमीन है, उनमें सामंजस्य न होने के कारण फिर रास्ता नहीं बन पाया। उनके द्वारा भी कई बार मौखिक रूप से ही अधिकारियों से रास्ते की बात कही गई।
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रास्ता कागजी न होने के कारण हम चाह कर भी रास्ता नहीं बनवा पा रहे हैं। गांव के ही लोगों की वहां जमीन है। अगर वे लोग समन्वय बनाकर रास्ता बनाने की इजाजत दें तो तत्काल रास्ता बनवाने का काम शुरू हो जाएगा। इससे समस्या का समाधान हो जाएगा। -ज्ञानमती देवी, प्रशासक कुसमहरा।
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आज मैं भी स्कूल पर पहुंचा था और रास्ते के संबंध में कुछ गांव के वरिष्ठ नागरिकों से बात भी हुई है। पहल सार्थक रही। उम्मीद है कि जल्द ही इस समस्या का समाधान होगा। मैं भी पानी में चलकर स्कूल तक पहुंचा था। -संतोष कुमार सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी।

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यह काफी गंभीर समस्या है, अगर कागजी रास्ता नहीं है तो यहां जिनकी भी जमीन है, उनसे समन्वय बनाकर बच्चों के हित में बात की जाएगी। स्कूल के प्रधानाध्यापक से भी इस संबंध में एक लिखित शिकायत लेकर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी। -राजीव पाठक, बीएसए।
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