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Azamgarh News: गर्म भोजन की व्यवस्था ‘ठंडी’, नौनिहालों को मिड डे मील से मिल रहा भोेजन
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बरदह के योगेंद्र सरोज राजेपुर प्राथमिक विद्यालय में भोजन करते बच्चे। संवाद
आंगनबाड़ी केंद्रों पर तीन से छह वर्ष तक की आयु के बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए संचालित हॉट कुक्ड योजना जिम्मेदारों की लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।
योजना के तहत बच्चों को नियमित रूप से ताजा और गर्म भोजन उपलब्ध कराया जाना है, लेकिन कई केंद्रों पर इसका सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। पड़ताल में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक योजना में कई खामियां सामने आईं।
जिले में कुल 5588 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें करीब 1.50 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के अनुसार, करीब चार हजार आंगनबाड़ी केंद्र सरकारी विद्यालयों में संचालित हो रहे हैं।
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इन केंद्रों पर पंजीकृत नौनिहालों को अलग से हॉट कुक्ड भोजन उपलब्ध कराने के बजाय विद्यालय में बनने वाला एमडीएम ही खाने के लिए दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों के लिए पौष्टिक और गर्म भोजन उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ऐसे में निर्धारित भोजन के स्थान पर केवल एमडीएम पर निर्भरता से योजना के उद्देश्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों की जरूरत के मुताबिक भोजन की गुणवत्ता और मात्रा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
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भोराजपुर केंद्र पर घर से आता है खाना, अतरौलिया केंद्र पर लटका रहा ताला
अतरौलिया। विकास खंड के कई केंद्रों पर व्यवस्था में खामियां मिलीं। पड़ताल के दौरान भोराजपुर खुर्द आंगनबाड़ी केंद्र पर 35 पंजीकृत बच्चों के सापेक्ष मात्र 11 बच्चे मौजूद मिले। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संगीता यादव ने बताया कि वह घर से खाना बनाकर गर्म करके केंद्र पर लाती हैं और बच्चों को वितरित करती हैं। भोराजपुर कला प्राथमिक विद्यालय के केंद्र पर 39 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन मौके पर बच्चों की संख्या काफी कम रही। कार्यकर्ता नीतू यादव ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय के मेनू के अनुसार बच्चों को गर्म भोजन दिया जाता है। वहीं इसी केंद्र के भीतर एक अन्य केंद्र पर कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कालिंदी, कुमारी पूनम ने बताया कि उनके केंद्र पर 26 बच्चे पंजीकृत हैं, जिनमें 13 बच्चे उपस्थित मिले। उन्होंने बताया कि कोटेदार के पास उनके नाम से राशन आता है, जिसे विद्यालय में दिया जाता है, लेकिन आठ माह से राशन नहीं मिला है। अतरौलिया के आंगनबाड़ी केंद्र पर दोपहर 12:06 बजे ताला लटका मिला।
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पासीपुर में नहीं मिल रहा बच्चों को पका-पकाया भोजन
बूढ़नपुर। कोयलसा विकास खंड के कंपोजिट विद्यालय पासीपुर परिसर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की पड़ताल में हॉट कुक्ड भोजन की व्यवस्था नहीं मिली। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बिद्रावती ने बताया कि केंद्र पर पिछले कई वर्षों से हॉट कुक्ड भोजन की आपूर्ति नहीं हो रही है। केंद्र पर पंजीकृत बच्चों को विद्यालय में बनने वाले मिड-डे मील से ही भोजन मिल रहा है।
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चांदी टीकर में 30 बच्चे पंजीकृत, मौके पर नहीं मिले बच्चे, अनौरा केंद्र पर लगा मिला ताला
रानी की सराय। ब्लॉक क्षेत्र में चांदी टीकर और अनौरा स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल की गई। चांदी टीकर केंद्र खुला मिला, लेकिन यहां पंजीकृत बच्चों की उपस्थिति नहीं थी। वहीं, दोपहर करीब 12 बजे अनौरा केंद्र पर ताला लगा मिला। सुबह करीब 11:30 बजे टीम ने चांदी टीकर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र खुला पाया, लेकिन मौके पर बच्चे मौजूद नहीं थे। कार्यकर्ता चंद्रकला ने बताया कि केंद्र पर 30 बच्चे पंजीकृत हैं। फिलहाल केवल सेविका से मिलने वाला नाश्ता ही मिलता है और भोजन की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि करीब पांच वर्ष पहले केंद्र पर खाना बनकर आता था, लेकिन अब भोजन नहीं आता। प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका जैनब ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र के करीब 10 से 15 बच्चे विद्यालय आते हैं और भोजन विद्यालय में ही कर लेते हैं। 12 बजे अनौरा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर ताला लगा मिला। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आशा देवी ने बताया कि केंद्र पर 30 बच्चे पंजीकृत हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए भोजन नहीं आता, जबकि केंद्र पर अन्य निर्धारित सामग्री/नाश्ते की व्यवस्था मिलती है। संवाद
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20 हजार की आबादी में एक भी स्थायी आंगनबाड़ी केंद्र नहीं
फरिहा। 20 हजार आबादी वाले फरिहा में एक भी स्थायी आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है। निजी आवासों में केंद्र संचालित हो रहे हैं। ब्लॉक रानी की सराय के तहत आने वाले गांव में, करीब 20 हजार की आबादी वाले फरिहा में, एक भी आंगनबाड़ी केंद्र का स्थायी भवन नहीं बन सका है। ग्रामीणों में जावेद आलम फराही, हवलदार यादव, ओमप्रकाश यादव, ओबैदा, फिरोज खान, अरबाज आदि का कहना है कि लंबे समय से फरिहा में स्थायी आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है, लेकिन इस दिशा में अब तक ठोस पहल नहीं हुई। ग्राम फरिहा प्रधान अबू बकर खान ने बताया कि प्रस्ताव भेजा गया है। एडीओ पंचायत संदीप ज्ञान वीर ने बताया कि ग्राम सचिव की जिम्मेदारी होती है कि यदि आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है तो इसका प्रस्ताव भेजना चाहिए। संवाद
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मिड डे मील के भरोसे आंगनबाड़ी के नौनिहाल
पवई। इंग्लिश मीडियम प्राइमरी स्कूल जल्दीपुर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र की 11:35 बजे पड़ताल की गई। आंगनबाड़ी कार्यकत्री प्रमिला ने बताया कि केंद्र के बच्चों को प्राइमरी स्कूल में बनने वाले मिड डे मील में ही भोजन कराया जाता है। सरकार की ओर से बच्चों के लिए केवल सत्तू मिलता है। वहीं, प्रधानाध्यापक राम सजीवन प्रजापति ने बताया कि स्कूल के बच्चों के लिए बनने वाले मिड डे मील में ही आंगनबाड़ी के बच्चे भी भोजन करते हैं। इसके लिए अलग से कोई बजट नहीं मिलता है।
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सरायमीर में दोपहर तक नहीं मिला था खाना
सरायमीर। कंपोजिट विद्यालय सरायमीर में आंगनबाड़ी केंद्र चल रहा है। कंपोजिट विद्यालय में जो भोजन बनता है, वही बच्चे भी खा लेते हैं। 45 बच्चों में से 13 बच्चे उपस्थित हैं। अभी खाना नहीं बना है। 12:30 बजे के बाद खाना मिलेगा।
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बच्चों को दिया जाता है एमडीएम
चक्रपानपुर। पल्हनी ब्लॉक के ग्राम सरायसादी में आंगनबाड़ी की 11 बजे पड़ताल की गई, यहां उपस्थित बच्चों को अभी मध्याह्न भोजन नहीं दिया गया था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रत्ना भारती ने बताया कि बच्चों को भोजन प्राथमिक विद्यालय में बन रहे भोजन को ही दिया जाता है।
-- वर्जन
जिले में अधिकतर केंद्र प्राथमिक विद्यालयों में ही संचालित हो रहे हैं। इन बच्चों को एमडीएम का गर्म भोजन दिया जाता है। इसके लिए आंगनबाड़ी को मिलने वाला राशन विद्यालयों को दिया जाता है। जहां निजी व अपने भवन में केंद्र संचालित हैं, वहां सहायिका खाना बनाती हैं। - हेमंत सिंह, डीपीओ।
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योजना के तहत बच्चों को नियमित रूप से ताजा और गर्म भोजन उपलब्ध कराया जाना है, लेकिन कई केंद्रों पर इसका सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। पड़ताल में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक योजना में कई खामियां सामने आईं।
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जिले में कुल 5588 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें करीब 1.50 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के अनुसार, करीब चार हजार आंगनबाड़ी केंद्र सरकारी विद्यालयों में संचालित हो रहे हैं।
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इन केंद्रों पर पंजीकृत नौनिहालों को अलग से हॉट कुक्ड भोजन उपलब्ध कराने के बजाय विद्यालय में बनने वाला एमडीएम ही खाने के लिए दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों के लिए पौष्टिक और गर्म भोजन उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ऐसे में निर्धारित भोजन के स्थान पर केवल एमडीएम पर निर्भरता से योजना के उद्देश्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों की जरूरत के मुताबिक भोजन की गुणवत्ता और मात्रा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
भोराजपुर केंद्र पर घर से आता है खाना, अतरौलिया केंद्र पर लटका रहा ताला
अतरौलिया। विकास खंड के कई केंद्रों पर व्यवस्था में खामियां मिलीं। पड़ताल के दौरान भोराजपुर खुर्द आंगनबाड़ी केंद्र पर 35 पंजीकृत बच्चों के सापेक्ष मात्र 11 बच्चे मौजूद मिले। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संगीता यादव ने बताया कि वह घर से खाना बनाकर गर्म करके केंद्र पर लाती हैं और बच्चों को वितरित करती हैं। भोराजपुर कला प्राथमिक विद्यालय के केंद्र पर 39 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन मौके पर बच्चों की संख्या काफी कम रही। कार्यकर्ता नीतू यादव ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय के मेनू के अनुसार बच्चों को गर्म भोजन दिया जाता है। वहीं इसी केंद्र के भीतर एक अन्य केंद्र पर कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कालिंदी, कुमारी पूनम ने बताया कि उनके केंद्र पर 26 बच्चे पंजीकृत हैं, जिनमें 13 बच्चे उपस्थित मिले। उन्होंने बताया कि कोटेदार के पास उनके नाम से राशन आता है, जिसे विद्यालय में दिया जाता है, लेकिन आठ माह से राशन नहीं मिला है। अतरौलिया के आंगनबाड़ी केंद्र पर दोपहर 12:06 बजे ताला लटका मिला।
पासीपुर में नहीं मिल रहा बच्चों को पका-पकाया भोजन
बूढ़नपुर। कोयलसा विकास खंड के कंपोजिट विद्यालय पासीपुर परिसर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की पड़ताल में हॉट कुक्ड भोजन की व्यवस्था नहीं मिली। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बिद्रावती ने बताया कि केंद्र पर पिछले कई वर्षों से हॉट कुक्ड भोजन की आपूर्ति नहीं हो रही है। केंद्र पर पंजीकृत बच्चों को विद्यालय में बनने वाले मिड-डे मील से ही भोजन मिल रहा है।
चांदी टीकर में 30 बच्चे पंजीकृत, मौके पर नहीं मिले बच्चे, अनौरा केंद्र पर लगा मिला ताला
रानी की सराय। ब्लॉक क्षेत्र में चांदी टीकर और अनौरा स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल की गई। चांदी टीकर केंद्र खुला मिला, लेकिन यहां पंजीकृत बच्चों की उपस्थिति नहीं थी। वहीं, दोपहर करीब 12 बजे अनौरा केंद्र पर ताला लगा मिला। सुबह करीब 11:30 बजे टीम ने चांदी टीकर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र खुला पाया, लेकिन मौके पर बच्चे मौजूद नहीं थे। कार्यकर्ता चंद्रकला ने बताया कि केंद्र पर 30 बच्चे पंजीकृत हैं। फिलहाल केवल सेविका से मिलने वाला नाश्ता ही मिलता है और भोजन की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि करीब पांच वर्ष पहले केंद्र पर खाना बनकर आता था, लेकिन अब भोजन नहीं आता। प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका जैनब ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र के करीब 10 से 15 बच्चे विद्यालय आते हैं और भोजन विद्यालय में ही कर लेते हैं। 12 बजे अनौरा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर ताला लगा मिला। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आशा देवी ने बताया कि केंद्र पर 30 बच्चे पंजीकृत हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए भोजन नहीं आता, जबकि केंद्र पर अन्य निर्धारित सामग्री/नाश्ते की व्यवस्था मिलती है। संवाद
20 हजार की आबादी में एक भी स्थायी आंगनबाड़ी केंद्र नहीं
फरिहा। 20 हजार आबादी वाले फरिहा में एक भी स्थायी आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है। निजी आवासों में केंद्र संचालित हो रहे हैं। ब्लॉक रानी की सराय के तहत आने वाले गांव में, करीब 20 हजार की आबादी वाले फरिहा में, एक भी आंगनबाड़ी केंद्र का स्थायी भवन नहीं बन सका है। ग्रामीणों में जावेद आलम फराही, हवलदार यादव, ओमप्रकाश यादव, ओबैदा, फिरोज खान, अरबाज आदि का कहना है कि लंबे समय से फरिहा में स्थायी आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है, लेकिन इस दिशा में अब तक ठोस पहल नहीं हुई। ग्राम फरिहा प्रधान अबू बकर खान ने बताया कि प्रस्ताव भेजा गया है। एडीओ पंचायत संदीप ज्ञान वीर ने बताया कि ग्राम सचिव की जिम्मेदारी होती है कि यदि आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है तो इसका प्रस्ताव भेजना चाहिए। संवाद
मिड डे मील के भरोसे आंगनबाड़ी के नौनिहाल
पवई। इंग्लिश मीडियम प्राइमरी स्कूल जल्दीपुर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र की 11:35 बजे पड़ताल की गई। आंगनबाड़ी कार्यकत्री प्रमिला ने बताया कि केंद्र के बच्चों को प्राइमरी स्कूल में बनने वाले मिड डे मील में ही भोजन कराया जाता है। सरकार की ओर से बच्चों के लिए केवल सत्तू मिलता है। वहीं, प्रधानाध्यापक राम सजीवन प्रजापति ने बताया कि स्कूल के बच्चों के लिए बनने वाले मिड डे मील में ही आंगनबाड़ी के बच्चे भी भोजन करते हैं। इसके लिए अलग से कोई बजट नहीं मिलता है।
सरायमीर में दोपहर तक नहीं मिला था खाना
सरायमीर। कंपोजिट विद्यालय सरायमीर में आंगनबाड़ी केंद्र चल रहा है। कंपोजिट विद्यालय में जो भोजन बनता है, वही बच्चे भी खा लेते हैं। 45 बच्चों में से 13 बच्चे उपस्थित हैं। अभी खाना नहीं बना है। 12:30 बजे के बाद खाना मिलेगा।
बच्चों को दिया जाता है एमडीएम
चक्रपानपुर। पल्हनी ब्लॉक के ग्राम सरायसादी में आंगनबाड़ी की 11 बजे पड़ताल की गई, यहां उपस्थित बच्चों को अभी मध्याह्न भोजन नहीं दिया गया था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रत्ना भारती ने बताया कि बच्चों को भोजन प्राथमिक विद्यालय में बन रहे भोजन को ही दिया जाता है।
जिले में अधिकतर केंद्र प्राथमिक विद्यालयों में ही संचालित हो रहे हैं। इन बच्चों को एमडीएम का गर्म भोजन दिया जाता है। इसके लिए आंगनबाड़ी को मिलने वाला राशन विद्यालयों को दिया जाता है। जहां निजी व अपने भवन में केंद्र संचालित हैं, वहां सहायिका खाना बनाती हैं। - हेमंत सिंह, डीपीओ।

बरदह के योगेंद्र सरोज राजेपुर प्राथमिक विद्यालय में भोजन करते बच्चे। संवाद