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विधायक शाह आलम समेत पांच पर केस
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ़
Updated Sun, 12 Jun 2016 11:46 PM IST
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सिधारी के जगदीशपुर सलारपुर में किराये के मकान में गाजियाबाद के ठेकेदार शमशेर बहादुर सिंह की तीन जून को हुई मौत के मामले में शनिवार को पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। इस मामले में बसपा विधायक शाह आलम समेत पांच को आरोपी बनाया गया है। इन सभी पर ठेकेदार को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है।
तहरीर में कुमकुम सिंह ने बताया है कि बसपा विधायक शाह आलम और बजरंग त्रिपाठी ने उनके पति शमशेर बहादुर सिंह (65) निवासी न्यू गांधीनगर कालोनी, गाजियाबाद से अपने स्कूल में काम करवाया था। ठेकेदार चंद्रसेन सिंह के कहने पर उन्होंने चक्रपानपुर स्थित पीजीआई अस्पताल और निर्माणाधीन रोडवेज भवन तथा एक कार कंपनी के शोरूम के मालिक हाशिम के यहां काम करवाया था। लेकिन इसका भुगतान नहीं किया गया।
मांगने पर धमकी दी जाने लगी। लाखों रुपये फंसने से उनके पति तनाव में थे। इसके चलते उन्होंने परिवार को गाजियाबाद भेज दिया था और तीन जून की रात आत्महत्या कर ली। कुमकुम सिंह के मुताबिक उनके पति ने तीन पन्ने का सुसाइड नोट भी लिखा था। इसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए इन लोगों को जिम्मेदार ठहराया है। इस मामले में पुलिस ने मुबारकपुर क्षेत्र से बसपा विधायक शाह आलम, विधायक का कामकाज देखने वाले योगेंद्र सिंह, चिल्ड्रेन कॉलेज के प्रबंधक बजरंग त्रिपाठी, ठेकेदार चंद्रसेन सिंह और एक कार कंपनी के मालिक हाशिम के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
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तहरीर और सुसाइड नोट के आधार पर पांच लोगों पर केस दर्ज कर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। विसरा रिपोर्ट आने पर उसे इसमें जोड़ दिया जाएगा।
- अजय कुमार साहनी, एसपी, आजमगढ़।
शमशेर सिंह ने हमारे यहां 27 लाख रुपये का काम कराया था, जबकि हमने उन्हें 38 लाख रुपये दिया था। हमारे पास इसका प्रमाण है। मैंने उनका सुसाइड नोट पढ़ा है। उसमें उन्होंने हमारे यहां बकाया नहीं, बल्कि छह लाख का घाटा होना बताया है। मैं किसी भी जांच के लिए तैयार हूं।
- शाह आलम, विधायक, मुबारकपुर।
ठेकेदार और उनकी पत्नी का आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने हमारे यहां दो वर्ष पूर्व छह से सात माह तक काम कराया था। जितना काम हुआ, मैंने उसका भुगतान कर दिया था। महीनों से हमारा उनसे संपर्क नहीं था। एडवांस के रूप में लिए गए 90 हजार रुपये अभी भी शमशेर पर बकाया हैं।
- बजरंग त्रिपाठी, प्रबंधक, चिल्ड्रेन कॉलेज।
शमशेर ने हमारे यहां 27.70 लाख रुपये का काम किया था। इसका हमने भुगतान कर दिया है। जिस वक्त भुगतान हुआ, उस समय शमशेर के पार्टनर भी मौजूद थे। यदि उनके हिसाब से कोई बकाया निकलता है तो हम उसके भुगतान के लिए तैयार हैं।
- हाशिम, कार एजेंसी मालिक।
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तहरीर में कुमकुम सिंह ने बताया है कि बसपा विधायक शाह आलम और बजरंग त्रिपाठी ने उनके पति शमशेर बहादुर सिंह (65) निवासी न्यू गांधीनगर कालोनी, गाजियाबाद से अपने स्कूल में काम करवाया था। ठेकेदार चंद्रसेन सिंह के कहने पर उन्होंने चक्रपानपुर स्थित पीजीआई अस्पताल और निर्माणाधीन रोडवेज भवन तथा एक कार कंपनी के शोरूम के मालिक हाशिम के यहां काम करवाया था। लेकिन इसका भुगतान नहीं किया गया।
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मांगने पर धमकी दी जाने लगी। लाखों रुपये फंसने से उनके पति तनाव में थे। इसके चलते उन्होंने परिवार को गाजियाबाद भेज दिया था और तीन जून की रात आत्महत्या कर ली। कुमकुम सिंह के मुताबिक उनके पति ने तीन पन्ने का सुसाइड नोट भी लिखा था। इसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए इन लोगों को जिम्मेदार ठहराया है। इस मामले में पुलिस ने मुबारकपुर क्षेत्र से बसपा विधायक शाह आलम, विधायक का कामकाज देखने वाले योगेंद्र सिंह, चिल्ड्रेन कॉलेज के प्रबंधक बजरंग त्रिपाठी, ठेकेदार चंद्रसेन सिंह और एक कार कंपनी के मालिक हाशिम के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
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तहरीर और सुसाइड नोट के आधार पर पांच लोगों पर केस दर्ज कर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। विसरा रिपोर्ट आने पर उसे इसमें जोड़ दिया जाएगा।
- अजय कुमार साहनी, एसपी, आजमगढ़।
शमशेर सिंह ने हमारे यहां 27 लाख रुपये का काम कराया था, जबकि हमने उन्हें 38 लाख रुपये दिया था। हमारे पास इसका प्रमाण है। मैंने उनका सुसाइड नोट पढ़ा है। उसमें उन्होंने हमारे यहां बकाया नहीं, बल्कि छह लाख का घाटा होना बताया है। मैं किसी भी जांच के लिए तैयार हूं।
- शाह आलम, विधायक, मुबारकपुर।
ठेकेदार और उनकी पत्नी का आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने हमारे यहां दो वर्ष पूर्व छह से सात माह तक काम कराया था। जितना काम हुआ, मैंने उसका भुगतान कर दिया था। महीनों से हमारा उनसे संपर्क नहीं था। एडवांस के रूप में लिए गए 90 हजार रुपये अभी भी शमशेर पर बकाया हैं।
- बजरंग त्रिपाठी, प्रबंधक, चिल्ड्रेन कॉलेज।
शमशेर ने हमारे यहां 27.70 लाख रुपये का काम किया था। इसका हमने भुगतान कर दिया है। जिस वक्त भुगतान हुआ, उस समय शमशेर के पार्टनर भी मौजूद थे। यदि उनके हिसाब से कोई बकाया निकलता है तो हम उसके भुगतान के लिए तैयार हैं।
- हाशिम, कार एजेंसी मालिक।