{"_id":"59553e354f1c1b3f0e8b4582","slug":"ilegal-construction-in-green-land","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रतिबंध के बाद भी ग्रीन लैंड में हो रहा निर्माण ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
प्रतिबंध के बाद भी ग्रीन लैंड में हो रहा निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो, आजमगढ़
Updated Thu, 29 Jun 2017 11:22 PM IST
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ग्रीन लैंड में निर्माण कार्य प्रतिबंधित होने के बाद भी धड़ल्ले से भवनों का का निर्माण किया जा रहा है। इसमें आवासीय के साथ व्यावसायिक भवन भी शामिल हैं। बावजूद इसके आजमगढ़ विकास प्राधिकरण की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसके पीछे की वजह विकास प्राधिकरण में एक महीने से सचिव का पद रिक्त होना है। प्राधिकरण में जिम्मेदार अधिकारी के न रहने की वजह से प्रतिबंधित क्षेत्रों में निर्माण पर रोक के अलावा अन्य कार्य कार्य भी ठप पड़े हुए हैं।
विभाग में सचिव के अलावा पड़े पैमाने पर कर्मचारियों का भी टोटा है। जिसके कारण अवैध निर्माण करने वालों के हौसले बुलंद हैं। बुधवार को जिलाधिकारी ने एसडीएम निरंकार सिंह को एडीए का सचिव नियुक्त किया है। जिनके समाने इन कब्जेदारों से निपटने की चुनौती होगी।
बताते चलें कि आजमगढ़ विकास प्राधिकरण का गठन 20 जून 2008 में हुआ था। गठन के बाद प्राधिकरण में कई अधिकारी आए और गए लेकिन ग्रीन लैंड एरिया और कृषि क्षेत्र में अवैध रूप से निर्मित होने वाले मकानों के निर्माण पर रोक नहीं लगी। एडीए सचिव बनीं ऋतु सुहास के कार्यकाल में इन अवैध निर्माणों को रोकने के लिए सख्ती बरत गई। जिसका परिणाम रहा कि ग्रीन लैंड और कृषि क्षेत्र में होने वाले अवैध निर्माण लगभग रुक से गए। लेकिन 28 मई को उनका तबादला कर दिया गया। उनके जाने के बाद एक महीने तक एडीए के सचिव पद पर किसी की तैनाती नहीं हुई। जिसके कारण अवैध निर्माण का सिलसिला फिर शुरू हो गया।
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अधिकारी के न होने से कर्मचारी भी किसी के खिलाफ कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं। इसके साथ ही विभाग कर्मचारियों की कमी से भी जूझ रहा है। विभाग में 16 पद स्वीकृत हैं जिसके सापेक्ष मात्र छह कर्मचारी ही वर्तमान में तैनात हैं।
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विभाग में सचिव के अलावा पड़े पैमाने पर कर्मचारियों का भी टोटा है। जिसके कारण अवैध निर्माण करने वालों के हौसले बुलंद हैं। बुधवार को जिलाधिकारी ने एसडीएम निरंकार सिंह को एडीए का सचिव नियुक्त किया है। जिनके समाने इन कब्जेदारों से निपटने की चुनौती होगी।
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बताते चलें कि आजमगढ़ विकास प्राधिकरण का गठन 20 जून 2008 में हुआ था। गठन के बाद प्राधिकरण में कई अधिकारी आए और गए लेकिन ग्रीन लैंड एरिया और कृषि क्षेत्र में अवैध रूप से निर्मित होने वाले मकानों के निर्माण पर रोक नहीं लगी। एडीए सचिव बनीं ऋतु सुहास के कार्यकाल में इन अवैध निर्माणों को रोकने के लिए सख्ती बरत गई। जिसका परिणाम रहा कि ग्रीन लैंड और कृषि क्षेत्र में होने वाले अवैध निर्माण लगभग रुक से गए। लेकिन 28 मई को उनका तबादला कर दिया गया। उनके जाने के बाद एक महीने तक एडीए के सचिव पद पर किसी की तैनाती नहीं हुई। जिसके कारण अवैध निर्माण का सिलसिला फिर शुरू हो गया।
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अधिकारी के न होने से कर्मचारी भी किसी के खिलाफ कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं। इसके साथ ही विभाग कर्मचारियों की कमी से भी जूझ रहा है। विभाग में 16 पद स्वीकृत हैं जिसके सापेक्ष मात्र छह कर्मचारी ही वर्तमान में तैनात हैं।