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सोशल सेक्टर में 150 करोड़ के घपले की जांच को पहुंचे विवेचक
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आजमगढ़। वर्ष 2008-09 से 2013-14 के दौरान जनपद में सोशल सेक्टर में हुए 150 करोड़ के घाटाले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू वाराणसी के इंस्पेक्टर गुरुवार को मामले की जांच के लिए जनपद पहुंचे। इस दौरान उन्होंने तत्कालीन जांच अधिकारी सुनील सिंह से प्रकरण के संबंध में जानकारी ली। वो शुक्रवार को भी मामले की जांच करेंगे।
वर्ष 2008-09 से 2013-14 तक जनपद में सोशल सेक्टर में करोड़ों का घोटाला हुआ था। एक शिकायक पर जांच कर रहे एडीएसटीओ सुनील सिंह ने वर्ष 2014 में इस घपले को पकड़ा था। धीरे-धीरे इस प्रकरण की गंभीरता बढ़ती गई और लगभग 150 करोड़ के घोटाले की बात सामने आई। प्रकरण में पूरे सिंडीकेट के तरीके से पहले छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति, पेंशन आदि की धनराशि गलत खातों में भेजी जाती थी। इसके बाद जब इसका वितरण नहीं होता था तो रिटर्निंग चेकों को माध्यम से इसे प्राइवेट खातों में भुनाकर घपला किया गया था। उस दौरान शहर कोतवाली, सिधारी और कप्तानगंज थाने में चार एफआईआर भी कराई गई थी। 34 लोगों को आरोपी भी बनाया गया था। जांच के दौरान लगभग छह आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया था। इस बीच स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की सिफारिस पर वर्ष 2018 में प्रकरण की जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी गई। तभी से ईओडब्ल्यू की वाराणसी शाखा मामले की जांच कर रही है। आरोपियों के बयान आदि दर्ज कराए जा चुके हैं।
विवेचक इंस्पेक्टर रामनरेश यादव प्रकरण की जांच के लिए गुरुवार को जनपद पहुंचे। इस दौरान उन्होंने तत्कालीन जांच अधिकारी सुनील सिंह से पूरी जानकारी ली। जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया और घपले के तरीकों को समझा। उन्होंने बताया कि अभी शुक्रवार को भी जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रकरण में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगी। जो दोषी पाया जाएगा उसे सजा दिलाई जाएगी।
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वर्ष 2008-09 से 2013-14 तक जनपद में सोशल सेक्टर में करोड़ों का घोटाला हुआ था। एक शिकायक पर जांच कर रहे एडीएसटीओ सुनील सिंह ने वर्ष 2014 में इस घपले को पकड़ा था। धीरे-धीरे इस प्रकरण की गंभीरता बढ़ती गई और लगभग 150 करोड़ के घोटाले की बात सामने आई। प्रकरण में पूरे सिंडीकेट के तरीके से पहले छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति, पेंशन आदि की धनराशि गलत खातों में भेजी जाती थी। इसके बाद जब इसका वितरण नहीं होता था तो रिटर्निंग चेकों को माध्यम से इसे प्राइवेट खातों में भुनाकर घपला किया गया था। उस दौरान शहर कोतवाली, सिधारी और कप्तानगंज थाने में चार एफआईआर भी कराई गई थी। 34 लोगों को आरोपी भी बनाया गया था। जांच के दौरान लगभग छह आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया था। इस बीच स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की सिफारिस पर वर्ष 2018 में प्रकरण की जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी गई। तभी से ईओडब्ल्यू की वाराणसी शाखा मामले की जांच कर रही है। आरोपियों के बयान आदि दर्ज कराए जा चुके हैं।
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विवेचक इंस्पेक्टर रामनरेश यादव प्रकरण की जांच के लिए गुरुवार को जनपद पहुंचे। इस दौरान उन्होंने तत्कालीन जांच अधिकारी सुनील सिंह से पूरी जानकारी ली। जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया और घपले के तरीकों को समझा। उन्होंने बताया कि अभी शुक्रवार को भी जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रकरण में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगी। जो दोषी पाया जाएगा उसे सजा दिलाई जाएगी।
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