{"_id":"577d518b4f1c1bd7497fa44a","slug":"chete-not-be-erased-so-the-sign-of-sher-shah-suri","type":"story","status":"publish","title_hn":"न चेते तो मिट जाएगी शेरशाह सूरी की यह निशानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न चेते तो मिट जाएगी शेरशाह सूरी की यह निशानी
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Thu, 07 Jul 2016 12:14 AM IST
विज्ञापन
शाही पुल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जनपद के ऐतिहासिक धरोहरों में एक शेरशाह सूरी द्वारा बनवाया गया शाही पुल आज उपेक्षा के कारण अपना अस्तित्व खोने की कगार पर पहुंच गया है। पुल पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित होने के बाद भी भारी वाहन धड़ल्ले से पुल से आवागमन करते हैं।
वैसे तो जनपद में कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं। इनमें से ज्यादातर धरोहरें आज उपेक्षित होने के कारण अपना अस्तित्व खोने की कगार पर पहुंच गई हैं। इनमें से नगर के हरबंशपुर क्षेत्र स्थित तमसा नदी पर बना मुगलकालीन शाही पुल भी शामिल है। पुल के जर्जर होने के कारण कई वर्ष पूर्व प्रशासन ने पुल से भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया। प्रतिबंध लगने के बाद पीडब्ल्यूडी द्वारा पुल के दोनों तरफ पोल लगाकर अवरोध बनाया गया ताकि बड़ी गाड़ियां इस पुल से होकर न गुजर सकें। लेकिन कुछ दिनों बाद ही यह अवरोध गायब हो गया।
इसके बाद एक बार फिर पुल के दोनों तरफ अवरोध लगाया गया। लेकिन वह भी गायब हो गया। आज पुल से छोटी गाड़ियों के साथ ही भारी वाहन भी धड़ल्ले से आवागमन करते हैं। वहीं पुल का रख रखाव ठीक ढ़ंग से न होने के कारण पुल की दावारों में बरगद और पीपल के पेड़ उग आए हैं। जो इसकी जड़ों का कमजोर कर रहे हैं। अगर समय रहते इस पेड़ों को काटा न गया और पुल से भारी वाहनों का प्रवेश नहीं रोका गया तो वह दिन दूर नहीं जब पुल का अस्तित्व ही समाप्त हो जाए।
विज्ञापन
पुल को बचाने की कवायद शुरू हो चुकी है। इसके लिए बगल में एक नए पुल का निर्माण किया जाएगा। जिसके लिए शासन से धन स्वीकृत हो चुका है। जल्द ही इस पर कार्य शुरू होगा। - सुहास एलवाई, जिलाधिकारी
विज्ञापन
वैसे तो जनपद में कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं। इनमें से ज्यादातर धरोहरें आज उपेक्षित होने के कारण अपना अस्तित्व खोने की कगार पर पहुंच गई हैं। इनमें से नगर के हरबंशपुर क्षेत्र स्थित तमसा नदी पर बना मुगलकालीन शाही पुल भी शामिल है। पुल के जर्जर होने के कारण कई वर्ष पूर्व प्रशासन ने पुल से भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया। प्रतिबंध लगने के बाद पीडब्ल्यूडी द्वारा पुल के दोनों तरफ पोल लगाकर अवरोध बनाया गया ताकि बड़ी गाड़ियां इस पुल से होकर न गुजर सकें। लेकिन कुछ दिनों बाद ही यह अवरोध गायब हो गया।
विज्ञापन
इसके बाद एक बार फिर पुल के दोनों तरफ अवरोध लगाया गया। लेकिन वह भी गायब हो गया। आज पुल से छोटी गाड़ियों के साथ ही भारी वाहन भी धड़ल्ले से आवागमन करते हैं। वहीं पुल का रख रखाव ठीक ढ़ंग से न होने के कारण पुल की दावारों में बरगद और पीपल के पेड़ उग आए हैं। जो इसकी जड़ों का कमजोर कर रहे हैं। अगर समय रहते इस पेड़ों को काटा न गया और पुल से भारी वाहनों का प्रवेश नहीं रोका गया तो वह दिन दूर नहीं जब पुल का अस्तित्व ही समाप्त हो जाए।
विज्ञापन
पुल को बचाने की कवायद शुरू हो चुकी है। इसके लिए बगल में एक नए पुल का निर्माण किया जाएगा। जिसके लिए शासन से धन स्वीकृत हो चुका है। जल्द ही इस पर कार्य शुरू होगा। - सुहास एलवाई, जिलाधिकारी