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Azamgarh News: कभी बीहड़ में बंदूक थामकर डकैत निर्भय सिंह गुर्जर के साथ रहीं, अब गृहस्थी की जिम्मेदारी संभाल रहीं नीलम

Wed, 26 Aug 2026 01:34 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2026 01:34 AM IST
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Neelam, who once wielded a gun alongside dacoit Nirbhay Singh Gurjar in the ravines, is now managing the responsibilities of domestic life.
नीलम गुप्ता। संवाद
उम्र महज 12-13 साल। कक्षा पांच की छात्रा और सात भाई-बहनों में छठे नंबर की संतान। माता-पिता स्वस्थ थे और पढ़ाई सामान्य रूप से चल रही थी। फिर रास्ता पूछने के बहाने हुए अपहरण ने उसकी जिंदगी बदल दी।
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यह औरैया जिले के विधूना कस्बे की रहने वाली नीलम गुप्ता की कहानी है। कभी बीहड़ में बंदूक थामकर डकैत निर्भय सिंह गुर्जर के गैंग के साथ रहने वाली नीलम अब परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
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नीलम ने बताया कि वर्ष 2003 में 12-13 वर्ष की उम्र में उनका अपहरण हुआ। निर्भय सिंह गुर्जर उन्हें बीहड़ में ले गया। आंख खुली तो सामने चंबल का जंगल और खाकी-चितकबरी वर्दी पहने लोग थे। उन्हें लगा कि पुलिस या फौज ने बचाया है, लेकिन वह डकैत गिरोह के बीच थीं।
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घर पहुंचाने की गुहार लगाने पर बताया गया कि यहां आने वाला वापस नहीं जाता। निर्भय ने अपना परिचय देते हुए कहा, ‘मैं हूं आईपीएस दस्यु सम्राट निर्भय सिंह गुर्जर, तुम मेरी कैद में हो।’
अपहरण के करीब छह माह बाद 26 जनवरी 2004 को इटावा के जाहरपुर गांव के मंदिर में निर्भय ने जबरन शादी की। पुलिस की कार्रवाई नीलम का लहंगा छूट गया तो निर्भय ने बवाल काटते हुए आठ यादवों का अपहरण कर जान से मारने की धमकी दी।
बाद में बिचौलियों की मदद से लहंगे के बदले हर्जाना लेकर शांत हुआ। डकैतों के बीच रहने के दौरान नीलम ने कई बार भागने की कोशिश की, प्रताड़ना झेली और दो अपहृत युवकों को भी निकालने का प्रयास किया। आखिरकार वह गिरोह से बाहर निकलने में सफल हुई।
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घर लौटने की कोशिश की तो झेलनी पड़ी प्रताड़ना
बीहड़ पहुंचने के बाद नीलम लगातार घर लौटना चाहती थीं। कई बार भागने की कोशिश की, लेकिन पकड़ी गईं। इस दौरान उन्हें मारा-पीटा गया और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। नीलम ने बताया कि वह आसपास के गांवों, सड़कों और रास्तों की जानकारी जुटाती रहीं। नीलम ने दो युवकों को निकालने की कोशिश की और गिरोह की चाबी तक उपलब्ध कराई, लेकिन दोनों जंगल से बाहर नहीं निकल सके। इसके बाद नीलम के लिए खतरा और बढ़ गया। नीलम ने बताया कि गिरोह में रहते हुए मुन्नी और मुन्ना की हत्या तथा महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले व्यवहार ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया।

श्याम जाटव के साथ बनाई भागने की योजना
नीलम के अनुसार निर्भय सिंह बेहद अय्याश था और वह लड़कियों की तलाश करता था। इसी दौरान नीलम की नजदीकी निर्भय के गिरोह के सदस्य और उसके दत्तक पुत्र कहे जाने वाले श्याम जाटव से बढ़ी। श्याम को बीहड़ के रास्तों और नीलम को बाहर की दुनिया की जानकारी थी। दोनों ने मिलकर भागने की योजना बनाई और गिरोह से बगावत कर बाहर निकल गए।
निर्भय ने नीलम पर घोषित किया था 21 लाख का इनाम
नीलम ने बताया कि 31 जुलाई 2004 को श्याम के साथ इटावा की एंटी डकैती कोर्ट में सरेंडर करने के बाद निर्भय आगबबूला हो गया। उसने नीलम को जिंदा या मुर्दा पकड़कर लाने वाले को 21 लाख रुपये का इनाम देने का एलान किया। नीलम के लिए यह बीहड़ से निकलना ही नहीं, बल्कि गिरोह की उस सोच के खिलाफ विद्रोह था कि कोई अपनी मर्जी से बाहर नहीं जा सकता।
आत्मसमर्पण के बाद भी खत्म नहीं हुआ संघर्ष
आत्मसमर्पण के बाद नीलम को लंबी न्यायिक प्रक्रिया और करीब 12 साल जेल में रहना पड़ा। बाद में उम्र से जुड़े तथ्यों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया में उन्हें नाबालिग घोषित किया गया। 2016 में जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने घर लौटने की कोशिश की, लेकिन परिवार ने उन्हें नहीं अपनाया। एक भाई छोटी-मोटी मदद करता था, पर वह भी आर्थिक रूप से सक्षम नहीं था। आखिरकार नीलम को घर फिर छोड़ना पड़ा। घर से निकलने के बाद नीलम करीब तीन साल लखनऊ में रहीं। कुछ समय राजनीति से जुड़ीं और फिर एक कंपनी में नौकरी शुरू की। करीब 15 हजार रुपये से काम शुरू किया। उनका कहना था, ‘चोरी-डकैती तो कर नहीं रहे हैं, मेहनत करने में कोई चोरी नहीं है।’ उन्होंने अपना परिचय छिपाकर काम किया और धीरे-धीरे जिंदगी पटरी पर आने लगी।

राजनीति में भी आजमाया हाथ, शिवपाल यादव के साथ किया काम
नीलम ने बताया कि उन्होंने शिवपाल सिंह यादव के साथ भी काम किया। एक महिला ने उनकी नियुक्ति कराने में मदद की। कुछ समय राजनीतिक गतिविधियों में रहने के बाद उन्होंने सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश जारी रखी।


नीलम ने वर्ष 2018 में चुना नया जीवन साथी
नीलम ने बताया कि जेलर हर्षिता मिश्रा ने उन्हें जेल में पढ़ाया-लिखाया और बेटी की तरह रखा। उन्होंने जेल में कक्षा 10वीं की पढ़ाई पूरी की। हर्षिता मिश्रा ने उनके केस का अध्ययन कर परिवार से मिलकर छुड़ाने के लिए कहा। इसके बाद भाई प्रदीप गुप्ता ने स्कूल से अभिलेख लिए और उन्हें जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां उन्हें नाबालिग घोषित किया गया। जेल से निकलने के बाद नीलम की मुलाकात आजमगढ़ के जहानागंज थाना क्षेत्र के सिंहपुर निवासी शिवशंकर सोनी से हुई। दोनों की दोस्ती बढ़ी और 23 नवंबर 2018 को शादी कर ली। नीलम एक बेटी की मां हैं और परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है। उनका कहना है कि वह अपनी जिंदगी से संतुष्ट हैं और इसे अपने तरीके से आगे बढ़ाना चाहती हैं।

नीलम गुप्ता। संवाद

नीलम गुप्ता। संवाद

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