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कब्र के सवालों में हमें न उलझाओ, हो चुका गुलामों का फैसला मदीने में

Tue, 19 Feb 2019 11:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 19 Feb 2019 11:18 PM IST
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कब्र के सवालों में हमें न उलझाओ, हो चुका गुलामों का फैसला मदीने में
अंबारी। फूलपुर अनवार पब्लिक स्कूल गोधना में तालीमी बेदारी मुहिम के तहत कुलहिंद नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें शायरों ने अपने कलामों से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। रातभर लोगों की तालियां बटोरीं।
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दारुल उलूम नदवा लखनऊ के मौलाना आफताब आलम नदवी ने कहा कि एक अच्छे समाज की तालीम के लिए जहां आलिम, हाफिज, कारी का होना जरूरी है वहीं, डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और दुनिया के अलग क्षेत्र के जानकारों का होना भी जरूरी है। ताकि एक अच्छे माहौल का निर्माण किया जा सके। इसके बाद नातिया मुशायरे का शुभारंभ जुल्फेकार अहमद गामा ने किया। राही बस्तवी ने सुनाया कि ‘कब्र के सवालों में हमें न उलझाओ, हो चुका गुलामों का फैसला मदीने में...’। अल्ताफ जिया मालेगांव ने शेर पेश किया, ‘जिससे हम टकराए नबी वाले उसका जीना हराम हो जाए...’। शादाब आजमी ने पढ़ा, ‘खुदा को वही लोग पाए हुए हैं, मोहम्मद से जो लौ लगाए हुए हैं...’। नासिम ने सुनाया, ‘ये खुदा ने कहा कि मेरे बंदों मेरे नजदीक अफजल वही है, मेरी वह दानियत जिसमें मारी वह जो मोहम्मद पे शैदा हुआ...’। अली बाराबंकी के शेर ‘मेहमान बनके मदीने मै जहां आका रहे, घर तो बेशक है मगर अयूब का घर और है...’ ने खूब वाहवाही लूटी। इसके अलावा राशिम तिलावरपुरी, सलीम मुबारकपूरी, अशदपुरी, जफर जिआउजी ने भी नातों का नजराना पेश किया। आयोजक सोहराब सिद्दीकी ने लोगों का शुक्रिया अदा किया।
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