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विधायक निधि में निराधार मिले विद्यालयों की शुरू हुई जांच
Updated Tue, 12 Dec 2017 11:17 PM IST
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आजमगढ़। हाईकोर्ट के आदेश पर जिले में शुरू हुई 82 विद्यालयों के विधायक और सांसद निधि के मामले की जांच में लगभग 32 विद्यालयों को दोषी पाया गया था। शेष बचे विद्यालयों के बारे में की गई शिकायत को निराधार बताया गया था। लेकिन मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक सिंह ने पुराने अभिलेखों के आधार पर निराधार शिकायत बताईं गईं विद्यालयों की जांच करने का निर्देश दे दिया है।
जिले में बड़े पैमाने पर सांसद और विधायक निधि में विद्यालयों के प्रबंधकों द्वारा गड़बड़ी की गई थी। इस पर लालता यादव द्वारा दाखिल पीआईएल के आधार पर हाईकोर्ट ने 12 नवंबर 2013 को जिले के 82 विद्यालयों की जांच का आदेश दिए गए। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इन विद्यालयों के जमीन न होने के बाद भी सांसद और विधायक निधि जारी की गई। मामले की जांच शुरू की गई। कई विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश भी हुए, लेकिन इसका पालन नहीं हो सका। मार्च 2017 तक प्रशासन की ओर से मात्र 24 विद्यालयों पर लगे आरोपों का ही निस्तारण किया गया है। इनमें से जांच में पकड़े जाने के बाद छह विद्यालयों की मान्यता प्रत्याहरण का आदेश तत्कालीन जिलाधिकारी सुहास एलवाई की ओर से 30 मार्च 2017 को जारी किया गया था, लेकिन अभी तक किसी विद्यालय के मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई नहीं की गई है। इतना ही नहीं सात विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के खिलाफ संबंधित थानों में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई है। निस्तारण रिपोर्ट के अनुसार इन लोगों से निधि के धन की वसूली हो चुकी है। हाल ही में जांच टीम द्वारा मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक सिंह को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी गई। जिसमें लगभग 32 विद्यालयों को सांसद और विधायक निधि के पैसे में गड़बड़ी करने का दोषी बताया गया था। शेष 50 विद्यालयों पर शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया गया था। इस पर मुख्य विकास विकास अधिकारी के पास शिकायत की गई। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने निराधार पाए गए विद्यालयों की पुरानी रिपोर्ट को दोबारा निकलवाकर जांच की। जांच के दौरान मामला सत्य पाए जाने पर उन्होंने निराधार पाए गए सभी विद्यालयों की जांच दोबारा करने का निर्देश दे दिया है।
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सांसद और विधायक निधि के मामले में जिले के 82 विद्यालयों की जांच की गई। जांच रिपोर्ट में इनमें से लगभग 32 विद्यालय को दोषी पाया गया है। शेष विद्यालयों के खिलाफ शिकायत को निराधार बताया गया है। निराधार पाए गए विद्यालयों की शिकायत के बाद पुराने अभिलेखों के आधार पर जांच करने का निर्देश दिया गया है।
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अभिषेक सिंह, मुख्य विकास अधिकारी।
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जिले में बड़े पैमाने पर सांसद और विधायक निधि में विद्यालयों के प्रबंधकों द्वारा गड़बड़ी की गई थी। इस पर लालता यादव द्वारा दाखिल पीआईएल के आधार पर हाईकोर्ट ने 12 नवंबर 2013 को जिले के 82 विद्यालयों की जांच का आदेश दिए गए। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इन विद्यालयों के जमीन न होने के बाद भी सांसद और विधायक निधि जारी की गई। मामले की जांच शुरू की गई। कई विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश भी हुए, लेकिन इसका पालन नहीं हो सका। मार्च 2017 तक प्रशासन की ओर से मात्र 24 विद्यालयों पर लगे आरोपों का ही निस्तारण किया गया है। इनमें से जांच में पकड़े जाने के बाद छह विद्यालयों की मान्यता प्रत्याहरण का आदेश तत्कालीन जिलाधिकारी सुहास एलवाई की ओर से 30 मार्च 2017 को जारी किया गया था, लेकिन अभी तक किसी विद्यालय के मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई नहीं की गई है। इतना ही नहीं सात विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के खिलाफ संबंधित थानों में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई है। निस्तारण रिपोर्ट के अनुसार इन लोगों से निधि के धन की वसूली हो चुकी है। हाल ही में जांच टीम द्वारा मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक सिंह को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी गई। जिसमें लगभग 32 विद्यालयों को सांसद और विधायक निधि के पैसे में गड़बड़ी करने का दोषी बताया गया था। शेष 50 विद्यालयों पर शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया गया था। इस पर मुख्य विकास विकास अधिकारी के पास शिकायत की गई। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने निराधार पाए गए विद्यालयों की पुरानी रिपोर्ट को दोबारा निकलवाकर जांच की। जांच के दौरान मामला सत्य पाए जाने पर उन्होंने निराधार पाए गए सभी विद्यालयों की जांच दोबारा करने का निर्देश दे दिया है।
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सांसद और विधायक निधि के मामले में जिले के 82 विद्यालयों की जांच की गई। जांच रिपोर्ट में इनमें से लगभग 32 विद्यालय को दोषी पाया गया है। शेष विद्यालयों के खिलाफ शिकायत को निराधार बताया गया है। निराधार पाए गए विद्यालयों की शिकायत के बाद पुराने अभिलेखों के आधार पर जांच करने का निर्देश दिया गया है।
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अभिषेक सिंह, मुख्य विकास अधिकारी।