{"_id":"5cf56b04bdec2207881288ca","slug":"155958758410-azamgarh-news101","type":"story","status":"publish","title_hn":"माया के निशाने पर गठबंधन...यहां दिखा संपूर्ण एका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माया के निशाने पर गठबंधन...यहां दिखा संपूर्ण एका
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़। सांसद बनने पर लोकसभा के लोगों का आभार प्रकट करने के लिए सोमवार को सपा अध्यक्ष जनपद में थे। आईटीआई मैदान में आयोजित जनसभा में सपा-बसपा गठबंधन के सारे नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे। जनता का आभार प्रकट करने के साथ ही अखिलेश यादव और लालगंज सांसद संगीता आजाद का स्वागत किया जा रहा था। वहीं, दूसरी ओर से बसपा प्रमुख मायावती दिल्ली में गठबंधन से मोह से बाहर निकलकर विधानसभा उपचुनाव अकेले लड़ने की घोषणा कर दी। दो स्थानों पर दो संदेश चर्चा का विषय बना है।
जिस गठबंधन के दम पर सपा और बसपा ने आजमगढ़ जनपद की दोनों सीटों पर और बसपा ने 10 सीटों पर सब्जा जमाया, अब वो बसपा के निशाने पर है। सपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को दिल्ली गठबंधन से पार्टी को फायदा न पहुंचने का हवाला देते हुए विधानसभा उपचुनाव अकेले लड़ने का एलान कर दिया। उन्होंने यह एलान ऐसे समय पर किया जब अखिलेश यादव आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र की जनता का आभार प्रकट करने के लिए जनपद आए हुए थे। सपा-बसपा गठबंधन के नेता आभार जनसभा को सफल बनाने में लगे थे। कार्यकर्ताओं के साथ समर्थक पंडाल में मौजूद थे। लालगंज लोकसभा क्षेत्र से बसपा सांसद संगीता आजाद भी मंच पर मौजूद थी। दोनों दलों के नेताओं ने अखिलेश यादव को जीत दिलाने के लिए जनता का आभार जताया और अखिलेश यादव के साथ संगीता आजाद का भी जोरदार स्वागत किया। पूरा पंडाल अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारों से गूंज रहा था। कुल मिलाकर गठबंधन में संपूर्ण एका दिख रही थी।
जेहन में सवाल बन कर ही रह गया ‘गठबंधन’
आजमगढ़। सांसद चुने जाने के बाद अखिलेश के प्रथम आगमन पर कार्यकर्ता पलक पांवड़े बिछाए बैठे थे। जनसभा में पहुंचे लोग भी लोकसभा चुनाव से पहले हुए गठबंधन को लेकर अखिलेश का रुख जानने के लिए बेताब थे। विस चुनाव में गठबंधन का परिदृश्य क्या होगा? ये सवाल लोगों के अंदर घुमड़ रहा था। मीडिया के पास भी ऐसे ही सवाल थे। अखिलेश ने मंच से कार्यकर्ताओं को विधानसभा चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा, लेकिन अपना भाषण समाप्त कर तुरंत निकल गए। मीडिया के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। बाद में भी पत्रकारों से बातचीत का कोई कार्यक्रम न होना स्पष्ट कर गया कि वो सवालों से बचना चाह रहे हैं।
विज्ञापन
बसपा अपनी समीक्षा बैठक में पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि लोकसभा चुनाव में नतीजे उसके उम्मीद के अनुसार नहीं रहे हैं। आरोप लगाया कि सपा अपने यादव वोटरों पर अंकुश नहीं रख पाई। इसके साथ ही उन्होंने विस उपचुनाव अकेले लड़ने की बात भी कही है। ऐसे में बसपा की ओर से तो गठबंधन का भविष्य संशय में दिख रहा है। लेकिन सपा की ओर से अभी भी गठबंधन को लेकर गोपनीयता बरती जा रही और कुछ भी कहने से बचा जा रहा है। लोकसभा चुनाव में गठबंधन के बाद सपा को काफी नुकसान हुआ है। उन्हें अपने परिवार की तीन सीटों पर भी हार मिली है। बसपा जरूर शून्य से 10 सीटों पर पहुंच गई। ऐसे में कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि अखिलेश यादव मंच से गठबंध ने बारे में कुछ जरूर कहेंगे, लेकिन आजमगढ़ में माहौल कुछ और ही रहा। यहां मंच पर सपा के साथ बसपा के नेता भी मौजूद रहे। इसी मंच पर बसपा सांसद का भी स्वागत किया गया। अखिलेश के मीडिया से बचने पर यही लगा कि वो अभी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
गदगद दिखे सपाई, मुखिया का किया जोरदार स्वागत
आजमगढ़। आभार जनसभा में सपाई गदगद दिखे। हर कोई खुद को अखिलेश के सामने पहुंचने की जुगत करता दिखा। मंच पर बोलने का मौका मिलते ही पूर्व मंत्री से लेकर विधायक व पूर्व सांसद तक मुखिया के स्वागत व अभिनंदन के बोल ही बोलते नजर आये।
पूर्व मंत्री बलराम यादव ने कहा कि अखिलेश यादव देश की उम्मीद है। आजमगढ़ से इनका भावनात्मक रिश्ता है। जब ये राजनीति में नहीं थे, उस समय भी इन्होंने यहां तीन दिन बिताया था। आज आजमगढ़ में जो कुछ भी दिख रहा है वह सपा सरकार व अखिलेश यादव की ही देन है। 2012 के चुनाव के बाद जब अखिलेश की सरकार बनी तो उसके बाद बजट को लेकर बैठक में हम सभी मौजूद थे। देेेखा जाये तो उस बजट में आजमगढ़ के विकास के लिए सर्वाधिक धनराशि जारी हुई थी और अखिलेश ने सदन में यहां तक कह दिया था कि लो आजमगढ़ सब ले गया। पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव ने कहा कि बीजेपी के लोग जनता को गुमराह कर भले ही केंद्र पर फिर सरकार बना लिए हैं, लेकिन आजमगढ़ की जनता उनके बहकावे में नहीं आयी। उसके पीछे कारण यह रहा कि आजमगढ़ में विकास की गंगा किसी ने बहाया तो वह सिर्फ अखिलेश यादव रहे। यहीं कारण है कि यहां की जनता ने उन्हें लाखों मतों से जिताया। अखिलेश का परिवार आजमगढ़ की जनता पर तो आजमगढ़ की जनता अखिलेश के परिवार पर भरोसा करती है। जनसभा को जिलाध्यक्ष हवलदार यादव, विधायक संग्राम यादव, कल्पनाथ पासवान, आलमबदी आजमी, नफीस अहमद, पूर्व सांसद बलिहारी बाबू समेत अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। आभार जनसभा के दौरान लालगंज सीट पर विजयी गठबंधन प्रत्याशी संगीता आजाद का भी कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया।
लालगंज सांसद ने भी जनता का जताया आभार
आईटीआई मैदान पर आयोजित आभार जनसभा के दौरान जिले की दूसरी सीट लालगंज सुरक्षित से विजयी गठबंधन प्रत्याशी संगीता आजाद ने भी जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सपा-बसपा का गठबंधन दलित, पिछड़े व मुस्लिमों को एकजुट करने के लिए हुआ था। जिले के दोनों लोकसभा सीटों पर यह एकजुटता तो देेेखने को मिली लेकिन अन्य सीटों पर इनकी एकजुटता में कुछ कमी रहीं, जिसके चलते हम सब की सोच के अनुरूप अन्य जिलों में परिणाम नहीं आये। उन्होंने लालगंज संसदीय क्षेत्र की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सपा मुखिया के साथ में जिले के विकास का जो मौका मिला है। उसमें किसी भी प्रकार की चूक नहीं होने दी जायेगी। जनता हमारे विकास को देखेगी।
दुर्गा के घर भोजन, गांधी प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
आभार जनसभा समाप्त होने के बाद अखिलेश का काफिला पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव के आवास पर पहुंचा, जहां उन्होंने दिन का भोजन किया और पूर्व मंत्री के परिजनों से मुलाकात किया। इसके पश्चात वे चुनाव के दौरान बनाये गये केंद्रीय कार्यालय के लिए रवाना हुए। रास्ते में उन्होंने रैदोपुर स्थित गांधी तिराहे पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया।
इनकी रही मौजूदगी
नवनिर्वाचित सांसद अखिलेश यादव के आभार जनसभा में राम आसरे विश्वकर्मा, आईपी सिंह, ललई यादव, लीलावती कुशवाहा, सनातन पांडेय, रामदुलार राजभर, लाल बिहारी यादव, राजाराम सोनकर, देवसी यादव, चंद्रशेखर प्रजापति, एसके सत्येन, लालजीत यादव, राजेश गिरी, अशीर्वाद यादव आदि मौजूद रहे।
मेरी राजनीति की शुरुआत आजमगढ़ से हुई
आजमगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि आजमगढ़ से रिश्ता नया नहीं है। मैंने अपनी असली राजनीति की शुरूआत ही यहां से की है। 2012 के चुनाव के पूर्व मुझे आजमगढ़ के लोगों ने बुलाया और मैं यहां तीन दिन तक रह कर लोगों से मिला। लोगों ने मुझे सिर आंखों पर बैठाया और यहां की 9 सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को जिता कर विधान सभा में भेजा। मंच से अपनी जीत का प्रमाण पत्र दिखाते हुए कहा कि 23 को चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद जब प्रमाण पत्र मुझे मिला तो मैंने घर पर इसे किसी को नहीं दिखाया। मैंने तय कर लिया था कि आजमगढ़ की जनता ने मुझे जिताया है और यह प्रमाण पत्र पहले आजमगढ़ की जनता को दिखाने के बाद ही किसी और को दिखाऊंगा। यह मेरी नहीं यहां की जनता की जीत है, यहां के कार्यकर्ताओं की जीत है। जिन्होंने हर तरह का दबाव झेलने के बाद भी हर बूथ पर मुझे जिताया। इस चुनाव में लड़ाई कुछ दूसरे प्रकार की थी, जिसे हम समझ नहीं पाए। क्योंकि ध्यान हटाने की ताकत हमारे पास नहीं है वह तो सिर्फ भाजपा के पास है। जिसमें वह सफल भी रही। उन्होंने मंच से कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों का आह्वान किया कि 2022 व 2024 के चुनाव की तैयारी में जुट जाएं। बड़ा सपना देखें और उसे पूरा करने का संकल्प लें। जो सत्ता में है वो काम नहीं करेंगे और हमारे ही कामों पर वाहवाही लूटने का प्रयास करेंगे।
मुझे पहले से पता था आजमगढ़ का परिणाम
नवनिर्वाचित सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि आजमगढ़ का परिणाम तो मुझे पहले से पता था, लेकिन देश व प्रदेश के परिणाम की गणना कर पाने में चूक हो गई। उन्होंने कहा कि हताश होने की जरूरत नहीं है। हमें बड़ा सपना देखना होगा और उसे पूरा करने का संकल्प लेना होगा। 2022 व 24 को लक्ष्य बना लें। समाजवादियों ने जो प्रदेश के लिए किया है वह किसी और ने नहीं किया। जिसे हमें जनता को बताना होगा। यदि हम जनता को अपने काम नहीं बता पाएंगे तो सफलता नहीं मिलेगी। 2019 के चुनाव में आजमगढ़ सीट पर फरारी कार व साइकिल में रेस हुआ। जिसमें साइकिल जीत गई। ऐसा क्यों हुआ, ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आजमगढ़ की जनता को समाजवादियों पर और समाजवादियों को आजमगढ़ की जनता पर भरोसा है। चुनाव के दौरान मैं सिर्फ दो बार आजमगढ़ आया और यहां की जनता ने इतनी बड़ी जीत मुझे दिला दी। सोंचे यदि दो-चार बार कहीं और आ गया होता तो विरोधी की क्या दशा होती।
मैंने नहीं देखी निरहुआ की फिल्म
लोकसभा चुनाव में सपा मुखिया अखिलेश यादव के सामने भाजपा ने भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ को प्रत्याशी बनाया था। अपने विरोधी प्रत्याशी पर तंज कसते हुए अखिलेश ने कहा कि मैंने उनकी फिल्म नहीं देखी है, लेकिन मैं यह नहीं कहता कि आप भी उनकी फिल्म मत देखो। वे अच्छे कलाकार है, इससे ज्यादा मुझे उनके बारे में कुछ नहीं कहना है।
भरोसा टूटने न देने का किया वादा
अखिलेश यादव ने आभार जनसभा के दौरान संबोधन शुरू करने के साथ ही आजमगढ़ से अपने रिश्ते की बात शुरू कर दी और अंत तक उस पर कायम रहे। उन्होंने कहा कि आजमगढ़ की जनता ने जो भरोसा मुझ पर किया है वह कभी टूटने नहीं देंगे। नेता जी ने यहां से रिश्ते की शुरूआत की और आज उनके बाद यह रिश्ता मुझसे भी हो गया। आगे भी यह रिश्ता और मजबूत ही होता जाएगा। आजमगढ़ की धरती अल्लामा शिब्ली, राहुल सांकृत्यायन की धरती रही है। इस धरती ने कई महापुरुषों, विद्वानों, साहित्यकारों व विभूतियों को जन्म दिया है। इस धरती का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में गौरव की बात है।
विज्ञापन
जिस गठबंधन के दम पर सपा और बसपा ने आजमगढ़ जनपद की दोनों सीटों पर और बसपा ने 10 सीटों पर सब्जा जमाया, अब वो बसपा के निशाने पर है। सपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को दिल्ली गठबंधन से पार्टी को फायदा न पहुंचने का हवाला देते हुए विधानसभा उपचुनाव अकेले लड़ने का एलान कर दिया। उन्होंने यह एलान ऐसे समय पर किया जब अखिलेश यादव आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र की जनता का आभार प्रकट करने के लिए जनपद आए हुए थे। सपा-बसपा गठबंधन के नेता आभार जनसभा को सफल बनाने में लगे थे। कार्यकर्ताओं के साथ समर्थक पंडाल में मौजूद थे। लालगंज लोकसभा क्षेत्र से बसपा सांसद संगीता आजाद भी मंच पर मौजूद थी। दोनों दलों के नेताओं ने अखिलेश यादव को जीत दिलाने के लिए जनता का आभार जताया और अखिलेश यादव के साथ संगीता आजाद का भी जोरदार स्वागत किया। पूरा पंडाल अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारों से गूंज रहा था। कुल मिलाकर गठबंधन में संपूर्ण एका दिख रही थी।
विज्ञापन
जेहन में सवाल बन कर ही रह गया ‘गठबंधन’
आजमगढ़। सांसद चुने जाने के बाद अखिलेश के प्रथम आगमन पर कार्यकर्ता पलक पांवड़े बिछाए बैठे थे। जनसभा में पहुंचे लोग भी लोकसभा चुनाव से पहले हुए गठबंधन को लेकर अखिलेश का रुख जानने के लिए बेताब थे। विस चुनाव में गठबंधन का परिदृश्य क्या होगा? ये सवाल लोगों के अंदर घुमड़ रहा था। मीडिया के पास भी ऐसे ही सवाल थे। अखिलेश ने मंच से कार्यकर्ताओं को विधानसभा चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा, लेकिन अपना भाषण समाप्त कर तुरंत निकल गए। मीडिया के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। बाद में भी पत्रकारों से बातचीत का कोई कार्यक्रम न होना स्पष्ट कर गया कि वो सवालों से बचना चाह रहे हैं।
विज्ञापन
बसपा अपनी समीक्षा बैठक में पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि लोकसभा चुनाव में नतीजे उसके उम्मीद के अनुसार नहीं रहे हैं। आरोप लगाया कि सपा अपने यादव वोटरों पर अंकुश नहीं रख पाई। इसके साथ ही उन्होंने विस उपचुनाव अकेले लड़ने की बात भी कही है। ऐसे में बसपा की ओर से तो गठबंधन का भविष्य संशय में दिख रहा है। लेकिन सपा की ओर से अभी भी गठबंधन को लेकर गोपनीयता बरती जा रही और कुछ भी कहने से बचा जा रहा है। लोकसभा चुनाव में गठबंधन के बाद सपा को काफी नुकसान हुआ है। उन्हें अपने परिवार की तीन सीटों पर भी हार मिली है। बसपा जरूर शून्य से 10 सीटों पर पहुंच गई। ऐसे में कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि अखिलेश यादव मंच से गठबंध ने बारे में कुछ जरूर कहेंगे, लेकिन आजमगढ़ में माहौल कुछ और ही रहा। यहां मंच पर सपा के साथ बसपा के नेता भी मौजूद रहे। इसी मंच पर बसपा सांसद का भी स्वागत किया गया। अखिलेश के मीडिया से बचने पर यही लगा कि वो अभी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
गदगद दिखे सपाई, मुखिया का किया जोरदार स्वागत
आजमगढ़। आभार जनसभा में सपाई गदगद दिखे। हर कोई खुद को अखिलेश के सामने पहुंचने की जुगत करता दिखा। मंच पर बोलने का मौका मिलते ही पूर्व मंत्री से लेकर विधायक व पूर्व सांसद तक मुखिया के स्वागत व अभिनंदन के बोल ही बोलते नजर आये।
पूर्व मंत्री बलराम यादव ने कहा कि अखिलेश यादव देश की उम्मीद है। आजमगढ़ से इनका भावनात्मक रिश्ता है। जब ये राजनीति में नहीं थे, उस समय भी इन्होंने यहां तीन दिन बिताया था। आज आजमगढ़ में जो कुछ भी दिख रहा है वह सपा सरकार व अखिलेश यादव की ही देन है। 2012 के चुनाव के बाद जब अखिलेश की सरकार बनी तो उसके बाद बजट को लेकर बैठक में हम सभी मौजूद थे। देेेखा जाये तो उस बजट में आजमगढ़ के विकास के लिए सर्वाधिक धनराशि जारी हुई थी और अखिलेश ने सदन में यहां तक कह दिया था कि लो आजमगढ़ सब ले गया। पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव ने कहा कि बीजेपी के लोग जनता को गुमराह कर भले ही केंद्र पर फिर सरकार बना लिए हैं, लेकिन आजमगढ़ की जनता उनके बहकावे में नहीं आयी। उसके पीछे कारण यह रहा कि आजमगढ़ में विकास की गंगा किसी ने बहाया तो वह सिर्फ अखिलेश यादव रहे। यहीं कारण है कि यहां की जनता ने उन्हें लाखों मतों से जिताया। अखिलेश का परिवार आजमगढ़ की जनता पर तो आजमगढ़ की जनता अखिलेश के परिवार पर भरोसा करती है। जनसभा को जिलाध्यक्ष हवलदार यादव, विधायक संग्राम यादव, कल्पनाथ पासवान, आलमबदी आजमी, नफीस अहमद, पूर्व सांसद बलिहारी बाबू समेत अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। आभार जनसभा के दौरान लालगंज सीट पर विजयी गठबंधन प्रत्याशी संगीता आजाद का भी कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया।
लालगंज सांसद ने भी जनता का जताया आभार
आईटीआई मैदान पर आयोजित आभार जनसभा के दौरान जिले की दूसरी सीट लालगंज सुरक्षित से विजयी गठबंधन प्रत्याशी संगीता आजाद ने भी जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सपा-बसपा का गठबंधन दलित, पिछड़े व मुस्लिमों को एकजुट करने के लिए हुआ था। जिले के दोनों लोकसभा सीटों पर यह एकजुटता तो देेेखने को मिली लेकिन अन्य सीटों पर इनकी एकजुटता में कुछ कमी रहीं, जिसके चलते हम सब की सोच के अनुरूप अन्य जिलों में परिणाम नहीं आये। उन्होंने लालगंज संसदीय क्षेत्र की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सपा मुखिया के साथ में जिले के विकास का जो मौका मिला है। उसमें किसी भी प्रकार की चूक नहीं होने दी जायेगी। जनता हमारे विकास को देखेगी।
दुर्गा के घर भोजन, गांधी प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
आभार जनसभा समाप्त होने के बाद अखिलेश का काफिला पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव के आवास पर पहुंचा, जहां उन्होंने दिन का भोजन किया और पूर्व मंत्री के परिजनों से मुलाकात किया। इसके पश्चात वे चुनाव के दौरान बनाये गये केंद्रीय कार्यालय के लिए रवाना हुए। रास्ते में उन्होंने रैदोपुर स्थित गांधी तिराहे पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया।
इनकी रही मौजूदगी
नवनिर्वाचित सांसद अखिलेश यादव के आभार जनसभा में राम आसरे विश्वकर्मा, आईपी सिंह, ललई यादव, लीलावती कुशवाहा, सनातन पांडेय, रामदुलार राजभर, लाल बिहारी यादव, राजाराम सोनकर, देवसी यादव, चंद्रशेखर प्रजापति, एसके सत्येन, लालजीत यादव, राजेश गिरी, अशीर्वाद यादव आदि मौजूद रहे।
मेरी राजनीति की शुरुआत आजमगढ़ से हुई
आजमगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि आजमगढ़ से रिश्ता नया नहीं है। मैंने अपनी असली राजनीति की शुरूआत ही यहां से की है। 2012 के चुनाव के पूर्व मुझे आजमगढ़ के लोगों ने बुलाया और मैं यहां तीन दिन तक रह कर लोगों से मिला। लोगों ने मुझे सिर आंखों पर बैठाया और यहां की 9 सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को जिता कर विधान सभा में भेजा। मंच से अपनी जीत का प्रमाण पत्र दिखाते हुए कहा कि 23 को चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद जब प्रमाण पत्र मुझे मिला तो मैंने घर पर इसे किसी को नहीं दिखाया। मैंने तय कर लिया था कि आजमगढ़ की जनता ने मुझे जिताया है और यह प्रमाण पत्र पहले आजमगढ़ की जनता को दिखाने के बाद ही किसी और को दिखाऊंगा। यह मेरी नहीं यहां की जनता की जीत है, यहां के कार्यकर्ताओं की जीत है। जिन्होंने हर तरह का दबाव झेलने के बाद भी हर बूथ पर मुझे जिताया। इस चुनाव में लड़ाई कुछ दूसरे प्रकार की थी, जिसे हम समझ नहीं पाए। क्योंकि ध्यान हटाने की ताकत हमारे पास नहीं है वह तो सिर्फ भाजपा के पास है। जिसमें वह सफल भी रही। उन्होंने मंच से कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों का आह्वान किया कि 2022 व 2024 के चुनाव की तैयारी में जुट जाएं। बड़ा सपना देखें और उसे पूरा करने का संकल्प लें। जो सत्ता में है वो काम नहीं करेंगे और हमारे ही कामों पर वाहवाही लूटने का प्रयास करेंगे।
मुझे पहले से पता था आजमगढ़ का परिणाम
नवनिर्वाचित सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि आजमगढ़ का परिणाम तो मुझे पहले से पता था, लेकिन देश व प्रदेश के परिणाम की गणना कर पाने में चूक हो गई। उन्होंने कहा कि हताश होने की जरूरत नहीं है। हमें बड़ा सपना देखना होगा और उसे पूरा करने का संकल्प लेना होगा। 2022 व 24 को लक्ष्य बना लें। समाजवादियों ने जो प्रदेश के लिए किया है वह किसी और ने नहीं किया। जिसे हमें जनता को बताना होगा। यदि हम जनता को अपने काम नहीं बता पाएंगे तो सफलता नहीं मिलेगी। 2019 के चुनाव में आजमगढ़ सीट पर फरारी कार व साइकिल में रेस हुआ। जिसमें साइकिल जीत गई। ऐसा क्यों हुआ, ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आजमगढ़ की जनता को समाजवादियों पर और समाजवादियों को आजमगढ़ की जनता पर भरोसा है। चुनाव के दौरान मैं सिर्फ दो बार आजमगढ़ आया और यहां की जनता ने इतनी बड़ी जीत मुझे दिला दी। सोंचे यदि दो-चार बार कहीं और आ गया होता तो विरोधी की क्या दशा होती।
मैंने नहीं देखी निरहुआ की फिल्म
लोकसभा चुनाव में सपा मुखिया अखिलेश यादव के सामने भाजपा ने भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ को प्रत्याशी बनाया था। अपने विरोधी प्रत्याशी पर तंज कसते हुए अखिलेश ने कहा कि मैंने उनकी फिल्म नहीं देखी है, लेकिन मैं यह नहीं कहता कि आप भी उनकी फिल्म मत देखो। वे अच्छे कलाकार है, इससे ज्यादा मुझे उनके बारे में कुछ नहीं कहना है।
भरोसा टूटने न देने का किया वादा
अखिलेश यादव ने आभार जनसभा के दौरान संबोधन शुरू करने के साथ ही आजमगढ़ से अपने रिश्ते की बात शुरू कर दी और अंत तक उस पर कायम रहे। उन्होंने कहा कि आजमगढ़ की जनता ने जो भरोसा मुझ पर किया है वह कभी टूटने नहीं देंगे। नेता जी ने यहां से रिश्ते की शुरूआत की और आज उनके बाद यह रिश्ता मुझसे भी हो गया। आगे भी यह रिश्ता और मजबूत ही होता जाएगा। आजमगढ़ की धरती अल्लामा शिब्ली, राहुल सांकृत्यायन की धरती रही है। इस धरती ने कई महापुरुषों, विद्वानों, साहित्यकारों व विभूतियों को जन्म दिया है। इस धरती का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में गौरव की बात है।