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मानसून से पहले ही सताने लगी तबाही की चिंता
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असेवा में बाढ़ और बारिश के कारण गिरा पड़ा वहीदन का मकान। संवाद
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। जिले के बीहड़ी क्षेत्र (अजीतमल-औरैया तहसील) के कई गांव पिछले कई वर्षों से बाढ़ और बारिश में तबाही का मंजर झेलते हैं। पिछले वर्ष यमुना में आई बाढ़ से करीब 25 गांवों के 400 से अधिक घर प्रभावित हुए थे। मानसून नजदीक आते देख पिछले कई वर्षों से तबाही का सामना कर रहे लोगों को एक बार फिर से चिंता सताने लगी है।
पिछले वर्ष बाढ़ के चलते मुख्यमंत्री ने हवाई दौरा कर ऐसे गांवों को चिह्नित कर ऊंचे व सुरक्षित स्थान पर बसाने के अफसरों को निर्देश दिए थे। ताकि दोबारा इन्हें बाढ़ से तबाही का सामना न करने पड़े। एक वर्ष बीतने के बाद भी तहसील प्रशासन बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों को ऊंचे पर बसाना तो दूर, इसके लिए जगह तक चिह्नित नहीं कर पाया है।
न ही इस दिशा में कोई कार्रवाई अमल में लाई गई है। मानसून नजदीक आते देख पिछले कई वर्षों से तबाही का सामान कर रहे लोगों को एक बार फिर से चिंता सताने लगी है। गांव के लोग प्रशासन और सरकार से काफी उम्मीदें लगाए बैठे हैं।
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सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों की जो तहसील से सूची मिली थी उसके आधार पर दैवी आपदा के तहत लाभ दिया गया। इसके साथ ही 28 परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना से लाभान्वित किया गया है। ऊंचे पर बसाने के लिए तहसील को वन विभाग की जमीन के लिए प्रस्ताव भेजना था। इसके बारे में तहसील प्रशासन से जानकारी की जाएगी।
एसडीएम अजीतमल अखिलेश कुमार ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को ऊंचे में बसाने के लिए लेखपालों से जमीन चिह्नित करने के निर्देश दिए गए है। जो लोग इच्छुक हैं, उन्हें ऊंचे व सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए तैयारी की जा रही है।
इन गांवों में ज्यादा लोग हुए थे प्रभावित
सिकरोड़ी, बीझलपुर, गोहानी, बड़ेरा, जुहीखा, असेवा, गूंज, फरिहा समेत 24 गांव ऐसे थे, जहां लोगों के कच्चे घर गिर गए। गृहस्थी का सामान पानी में डूब कर बर्बाद हो गया। कई परिवारों ने आज तक गिरे मकानों की मरम्मत इसलि नहीं कराई कि वह सरकारी योजना व मिलने वाले लाभ से वंचित न हो जाएं। आज भी कुछ ग्रामीण छप्पर डालकर गुजर-बसर कर रहे हैं। इन्हीं में असेवा की वहीदन, चांदबाबू, अनीस का परिवार भी है। वहीं तहसील प्रशासन ने कच्चे मकान वालों को 3200, पक्के मकान वालों को 5200 रुपये मुआवजा राशि मुहैया कराई थी।
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पिछले वर्ष बाढ़ के चलते मुख्यमंत्री ने हवाई दौरा कर ऐसे गांवों को चिह्नित कर ऊंचे व सुरक्षित स्थान पर बसाने के अफसरों को निर्देश दिए थे। ताकि दोबारा इन्हें बाढ़ से तबाही का सामना न करने पड़े। एक वर्ष बीतने के बाद भी तहसील प्रशासन बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों को ऊंचे पर बसाना तो दूर, इसके लिए जगह तक चिह्नित नहीं कर पाया है।
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न ही इस दिशा में कोई कार्रवाई अमल में लाई गई है। मानसून नजदीक आते देख पिछले कई वर्षों से तबाही का सामान कर रहे लोगों को एक बार फिर से चिंता सताने लगी है। गांव के लोग प्रशासन और सरकार से काफी उम्मीदें लगाए बैठे हैं।
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सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों की जो तहसील से सूची मिली थी उसके आधार पर दैवी आपदा के तहत लाभ दिया गया। इसके साथ ही 28 परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना से लाभान्वित किया गया है। ऊंचे पर बसाने के लिए तहसील को वन विभाग की जमीन के लिए प्रस्ताव भेजना था। इसके बारे में तहसील प्रशासन से जानकारी की जाएगी।
एसडीएम अजीतमल अखिलेश कुमार ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को ऊंचे में बसाने के लिए लेखपालों से जमीन चिह्नित करने के निर्देश दिए गए है। जो लोग इच्छुक हैं, उन्हें ऊंचे व सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए तैयारी की जा रही है।
इन गांवों में ज्यादा लोग हुए थे प्रभावित
सिकरोड़ी, बीझलपुर, गोहानी, बड़ेरा, जुहीखा, असेवा, गूंज, फरिहा समेत 24 गांव ऐसे थे, जहां लोगों के कच्चे घर गिर गए। गृहस्थी का सामान पानी में डूब कर बर्बाद हो गया। कई परिवारों ने आज तक गिरे मकानों की मरम्मत इसलि नहीं कराई कि वह सरकारी योजना व मिलने वाले लाभ से वंचित न हो जाएं। आज भी कुछ ग्रामीण छप्पर डालकर गुजर-बसर कर रहे हैं। इन्हीं में असेवा की वहीदन, चांदबाबू, अनीस का परिवार भी है। वहीं तहसील प्रशासन ने कच्चे मकान वालों को 3200, पक्के मकान वालों को 5200 रुपये मुआवजा राशि मुहैया कराई थी।

बाढ़ से पिछले वर्ष हुए नुकसान की जानकारी देता अनीस व चांद बाबू का परिवार। संवाद- फोटो : AURAIYA

10 अगस्त 2021 के अंक में प्रकाशित खबर। संवाद- फोटो : AURAIYA

24 अगस्त 2021 के अंक में प्रकाशित खबर। संवाद- फोटो : AURAIYA