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Auraiya News: कमलेश पाठक की जमानत याचिका खारिज

Thu, 18 Jun 2026 11:58 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2026 11:58 PM IST
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Kamlesh Pathak's bail plea rejected.
- बटन के थोक व्यापारी की शिकायत पर चार अप्रैल 2026 को पुलिस ने की थी गैंगस्टर की कार्रवाई
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- विशेष न्यायालय गैंगस्टर ने जमानत याचिका की निरस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। शहर के दोहरे हत्याकांड में करीब छह साल से अधिक समय से केंद्रीय कारागार आगरा में निरुद्ध पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक के खिलाफ दोबारा लगाए गए गैंगस्टर के मामले में कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर के प्रभारी महेश कुमार ने फैसला सुनाया।

शहर के चर्चित दोहरे हत्याकांड में पूर्व एमएलसी की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। 20 मार्च 2020 को शहर के मोहल्ला नारायनपुर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में अधिवक्ता मंजुल चौबे व उसकी चचेरी बहन सुधा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के आरोप में पुलिस ने कमलेश पाठक व उसके 11 साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। बाद में पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
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इस घटना के बाद कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की, जिसमें सत्र न्यायालय ने 24 मार्च 2026 को छह साल की सजा सुनाई थी। इस सजा के खिलाफ उसे हाईकोर्ट से राहत मिली। जब तक उसकी रिहाई होती प्रशासन ने चार अप्रैल 2026 को कमलेश पाठक व उसके एक सहयोगी अब्दुल सत्तार सहित अज्ञात के खिलाफ दोबारा गैंगस्टर के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया।
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इस मामले में पूर्व एमएलसी पर जेल से रंगदारी वसूलने को आधार बनाया गया। बटन के थोक व्यापारी राजेश कुमार ने कमलेश पाठक पर 50 हजार रुपये प्रति माह रंगदारी अपने सहयोगी अब्दुल सत्तार के माध्यम से वसूलने का आरोप लगाया था। कमलेश पाठक की ओर से गैंगस्टर के इस मामले में जमानत प्रार्थना पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया गया।
बृहस्पतिवार को इस मामले में सुनवाई की गई। बचाव पक्ष ने आरोपी को निर्दोष बताया। तर्क दिया कि वह लगातार जेल में है। एक दिन के लिए भी बाहर नहीं आया। ऐसे में रंगदारी का आरोप काल्पनिक और असंभव प्रतीत होता है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने यह कर जमानत का विरोध किया गया कि कमलेश पाठक पर 36 मुकदमों का इतिहास है। अगर जमानत दे दी गई तो वह दोबारा अपराध कर सकता है।

दोनों पक्षों सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश महेश कुमार ने उसकी जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। अधिवक्ता अंकुर अवस्थी के अनुसार अब बचाव पक्ष को इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट जाना पड़ेगा।
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