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Auraiya News: एस्टीमेट से आवास विकास के अधिकारी कर रहे किनारा, समस्याएं बरकरार
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औरैया। आवास विकास परिषद की कालोनी में व्याप्त समस्याएं अभी दूर होती नजर नहीं आ रही हैं। तीन साल से परिषद की सात में से पांच ब्लॉकों के नगर पालिका परिषद को हस्तांतरित कराए जाने को लेकर एस्टीमेट तैयार कराए जाने की कवायद भी अब दम तोड़ती नजर आ रही है।
जल निगम को सीवरेज समस्या दूर कराए जाने को दी गई जिम्मेदारी के बाद तैयार किए गए एस्टीमेट से परिषद के अधिकारी किनारा करते नजर आ रहे हैं। ऐसे में हालात जस के तस हैं। पांच ब्लॉकों के हस्तांतरण की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।
आवास विकास परिषद में सात ब्लॉक हैं। दो ब्लॉक पूर्व में ही नगर पालिका परिषद को हस्तांतरित किए जा चुके हैं। शेष रह गए पांच ब्लॉकों को आवास विकास परिषद के द्वारा नगर पालिका परिषद को हस्तांतरित किया जाना है। इसके लिए पिछले तीन सालों से कई बैठकें की जा चुकी हैं। तत्कालीन जिलाधिकारी सुनील कुमार वर्मा व तत्कालीन कृषि राज्यमंत्री लाखन सिंह राजपूत की मौजूदगी में गठित की गई समिति की ओर से परिषद का निरीक्षण कर समस्याओं को भी चिह्नित किया जा चुका है।
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पूर्व में लगभग तीन करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया था। इसमें आवास विकास परिषद की ओर से बनाए गए एस्टीमेट के आधार पर नगर पालिका परिषद को पांच ब्लॉकों को हस्तांतरित कराए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन नगर पालिका परिषद की ओर से आवास विकास परिषद में व्याप्त सबसे गंभीर सीवरेज समस्या को लेकर अलग से निरीक्षण कर एस्टीमेट तैयार कराए जाने की बात कही गई थी। इस पर पिछले दिनों आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने जल निगम को परिषद की सीवरेज समस्या को लेकर निरीक्षण करने व एस्टीमेट तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी।
सूत्रों की माने तो जल निगम की ओर से किए गए निरीक्षण में लगभग 30 साल पहले अंडरग्राउंड डाली गई सीवरेज लाइन पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुकी है। जिसे बदलना जरूरी है। इन लाइनों को बदलने के लिए बनाए गए एस्टीमेट में लगभग 13 करोड़ का खर्च आ रहा है। आवास विकास परिषद के उच्चाधिकारियों की ओर से धनराशि देने से इन्कार कर दिया गया है।
ऐसे में एक बार फिर से आवास विकास परिषद के पांच ब्लॉक नगर पालिका को हस्तांतरित किए जाने पर फिलहाल संशय की स्थिति बनी हुई है।
वहीं, आवास विकास परिषद के अधिकारी जल निगम की ओर से एस्टीमेट न भेजे जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं।
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जल निगम को सीवरेज समस्या दूर कराए जाने को दी गई जिम्मेदारी के बाद तैयार किए गए एस्टीमेट से परिषद के अधिकारी किनारा करते नजर आ रहे हैं। ऐसे में हालात जस के तस हैं। पांच ब्लॉकों के हस्तांतरण की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।
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आवास विकास परिषद में सात ब्लॉक हैं। दो ब्लॉक पूर्व में ही नगर पालिका परिषद को हस्तांतरित किए जा चुके हैं। शेष रह गए पांच ब्लॉकों को आवास विकास परिषद के द्वारा नगर पालिका परिषद को हस्तांतरित किया जाना है। इसके लिए पिछले तीन सालों से कई बैठकें की जा चुकी हैं। तत्कालीन जिलाधिकारी सुनील कुमार वर्मा व तत्कालीन कृषि राज्यमंत्री लाखन सिंह राजपूत की मौजूदगी में गठित की गई समिति की ओर से परिषद का निरीक्षण कर समस्याओं को भी चिह्नित किया जा चुका है।
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पूर्व में लगभग तीन करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया था। इसमें आवास विकास परिषद की ओर से बनाए गए एस्टीमेट के आधार पर नगर पालिका परिषद को पांच ब्लॉकों को हस्तांतरित कराए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन नगर पालिका परिषद की ओर से आवास विकास परिषद में व्याप्त सबसे गंभीर सीवरेज समस्या को लेकर अलग से निरीक्षण कर एस्टीमेट तैयार कराए जाने की बात कही गई थी। इस पर पिछले दिनों आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने जल निगम को परिषद की सीवरेज समस्या को लेकर निरीक्षण करने व एस्टीमेट तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी।
सूत्रों की माने तो जल निगम की ओर से किए गए निरीक्षण में लगभग 30 साल पहले अंडरग्राउंड डाली गई सीवरेज लाइन पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुकी है। जिसे बदलना जरूरी है। इन लाइनों को बदलने के लिए बनाए गए एस्टीमेट में लगभग 13 करोड़ का खर्च आ रहा है। आवास विकास परिषद के उच्चाधिकारियों की ओर से धनराशि देने से इन्कार कर दिया गया है।
ऐसे में एक बार फिर से आवास विकास परिषद के पांच ब्लॉक नगर पालिका को हस्तांतरित किए जाने पर फिलहाल संशय की स्थिति बनी हुई है।
वहीं, आवास विकास परिषद के अधिकारी जल निगम की ओर से एस्टीमेट न भेजे जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं।