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स्वास्थ्य विभाग ने गठित की सात रैपिड रेस्पॉन्स टीमें
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औरैया। जिले में अब तक डेंगू के 13 केस मिल चुके हैं। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सात रैपिड रेस्पॉंन्स टीमों का गठन किया है। साथ ही आशाओं को गांव-गांव जाकर बीमार लोगों की खोजबीन कर उनकी सूची बनाकर नजदीकी सरकारी अस्पताल में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। ताकि बीमार व्यक्ति को समय से उपचार मिल सके और बीमारी के बारे में सही जानकारी मिल सके।
जिले में स्थित दोनों जिला अस्पताल और सात सीएचसी में इन दिनों बुखार से ग्रसित मरीज अधिक इलाज कराने को पहुंच रहे हैं। बुखार की वजह से कुछ लोगों की प्लेटलेट्स भी कम हो रही है। इस वजह से लोगों को डेंगू का भय सता रहा है। लोगों में यह समस्या को देखते हुए चिचौली स्थित 100 शैया युक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ.कुलदीप यादव ने दस बेड का एक डेंगू वार्ड बनाया है।
अस्पताल में इन दिनों सौ से अधिक मरीज बुखार, खांसी, जुकाम, गले में दर्द, जी मिचलाना समेत संक्रामक के पहुंच रहे है। वहीं, सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि जिले की सातों सीएचसी में छह-छह बेड की व्यवस्था डेंगू मरीजों के लिए की गई है। साथ ही सात रैपिड रेस्पॉन्स टीमें गठित कर उन्हें क्षेत्रों में सर्वे कर लार्वा और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने के निर्देश दिए है।
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सीएमओ ने बताया कि डेंगू के निपटने के लिए अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में दवाएं और जांच के इंतजाम हैं। गांवों में आशाएं घर-घर बुखार से ग्रसित मरीजों की खोजबीन कर रही है। अभी तक किसी भी गांव में बुखार की पुष्टि नहीं हुई हैं, जहां बुखार के मरीज मिल रहे हैं, वहां पर एंटी लार्वा दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। वही, एलाइजा जांच की रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन का समय लग रहा है।
1. ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढना।
2. सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना।
3. आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना।
4. जी मिचलाना और मुंह का स्वाद खराब होना।
6. गले में हल्का दर्द होना।
7. शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल व गुलाबी रंग के रैशेज होना।
8. बहुत ज्यादा कमजोरी लगना और भूख न लगना।
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जिले में स्थित दोनों जिला अस्पताल और सात सीएचसी में इन दिनों बुखार से ग्रसित मरीज अधिक इलाज कराने को पहुंच रहे हैं। बुखार की वजह से कुछ लोगों की प्लेटलेट्स भी कम हो रही है। इस वजह से लोगों को डेंगू का भय सता रहा है। लोगों में यह समस्या को देखते हुए चिचौली स्थित 100 शैया युक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ.कुलदीप यादव ने दस बेड का एक डेंगू वार्ड बनाया है।
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अस्पताल में इन दिनों सौ से अधिक मरीज बुखार, खांसी, जुकाम, गले में दर्द, जी मिचलाना समेत संक्रामक के पहुंच रहे है। वहीं, सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि जिले की सातों सीएचसी में छह-छह बेड की व्यवस्था डेंगू मरीजों के लिए की गई है। साथ ही सात रैपिड रेस्पॉन्स टीमें गठित कर उन्हें क्षेत्रों में सर्वे कर लार्वा और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने के निर्देश दिए है।
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सीएमओ ने बताया कि डेंगू के निपटने के लिए अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में दवाएं और जांच के इंतजाम हैं। गांवों में आशाएं घर-घर बुखार से ग्रसित मरीजों की खोजबीन कर रही है। अभी तक किसी भी गांव में बुखार की पुष्टि नहीं हुई हैं, जहां बुखार के मरीज मिल रहे हैं, वहां पर एंटी लार्वा दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। वही, एलाइजा जांच की रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन का समय लग रहा है।
1. ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढना।
2. सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना।
3. आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना।
4. जी मिचलाना और मुंह का स्वाद खराब होना।
6. गले में हल्का दर्द होना।
7. शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल व गुलाबी रंग के रैशेज होना।
8. बहुत ज्यादा कमजोरी लगना और भूख न लगना।
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