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माथा टेकने से मनोकामना पूरी करती हैं महामाई
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औरैया। क्षेत्र के हैदरपुर में स्थित महामाई के मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। नवरात्र के दिनों में यहां भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां माता रानी का पूजन करता है उसकी सभी मनोकामना पूरी होती है।
हैदरपुर में सेंगर नदी के पास प्राचीन महामाई का मंदिर है। जिसकी ख्याति दूर-दूर तक है। नवरात्र के दिनों में यहां कानपुर देहात, जालौन, इटावा, कन्नौज के अलावा अन्य जिलों के भक्त दर्शन करने आते हैं। नवरात्र के अंतिम दिनों अष्टमी और नवमी को अधिक भीड़ मिलती है। बुजुर्गों का कहना है कि इस मंदिर की एक प्रमुख विशेषता है कि यहां महामाई के साथ माता काली भी स्थापित है।
यह आदि काल के समय का मंदिर है। मान्यता है कि यहां जो भी भक्त सच्चे मन से माता रानी की पूजा करता और मत्था टेकता है। मत्था टेकने मात्र से ही मातारानी उसकी मनोकामना को पूरा करतीं हैं। यही कारण है कि यहां अष्टमी और नवमी के दिनों में भक्तों की भीड़ रहती है। दूर-दूर से भक्त मंदिर में जवारे और झंडा चढ़ाने आते हैं।
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हैदरपुर में सेंगर नदी के पास प्राचीन महामाई का मंदिर है। जिसकी ख्याति दूर-दूर तक है। नवरात्र के दिनों में यहां कानपुर देहात, जालौन, इटावा, कन्नौज के अलावा अन्य जिलों के भक्त दर्शन करने आते हैं। नवरात्र के अंतिम दिनों अष्टमी और नवमी को अधिक भीड़ मिलती है। बुजुर्गों का कहना है कि इस मंदिर की एक प्रमुख विशेषता है कि यहां महामाई के साथ माता काली भी स्थापित है।
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यह आदि काल के समय का मंदिर है। मान्यता है कि यहां जो भी भक्त सच्चे मन से माता रानी की पूजा करता और मत्था टेकता है। मत्था टेकने मात्र से ही मातारानी उसकी मनोकामना को पूरा करतीं हैं। यही कारण है कि यहां अष्टमी और नवमी के दिनों में भक्तों की भीड़ रहती है। दूर-दूर से भक्त मंदिर में जवारे और झंडा चढ़ाने आते हैं।
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