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ड्यूटी न मिलने पर दाई ने डाई पी, माैत
ड्यूटी न मिलने पर दाई ने डाई पी, माैत
Updated Sun, 30 Sep 2018 11:40 PM IST
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अछल्दा (औरया)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दाई के रूप में सेवाएं देने वाली वृद्धा ने रविवार को अस्पताल पहुंचकर डाई पी ली। तीन घंटे तक उसे अस्पताल में उपचार के बाद सैफई रेफर कर दिया गया। वहां उसकी मौत हो गई। बताया जाता है कि महिला को तीन माह पहले उसको काम से हटा दिया गया था। रविवार को वह डॉक्टर के पास काम पर वापस बुलाने की मांग करने गई थी। डॉक्टर के दुत्कारने से उसने डाई पी ली।
अछल्दा विकास खंड के सुभानपुर की फूलमती (60) पत्नी गयादीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राइवेट तौर पर दाई का काम करती थी। तीन महीने पहले उसे सीएचसी अधीक्षक डॉ. सिद्धार्थ वर्मा ने आरोपों के चलते हटा दिया था। तब से वह ड्यूटी लगाने के लिए परेशान घूम रही थी। रविवार की शाम चार बजे वह सीएचसी पहुंची और वहां तैनात डॉ. नवीन कुमार से ड्यूटी में लगवाने की गुहार की। उनके न पसीजने और दुत्कारे जाने पर उसने क्षुब्ध होकर अपने साथ लाई डाई को पी ली। शाम को सैफई में उसकी मौत ेेहो गई।
डाई पीता देख डॉक्टर और अस्पताल के कर्मियों में हड़कंप मच गया। डॉक्टर ने आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कर उसका इलाज किया गया। इलाज के बाद तकरीबन तीन घंटे के बाद उसे सैफई मिनी पीजीआई रेफर कर दिया। अस्पताल कर्मियों ने बताया कि उक्त महिला को सरकार की ओर से कुछ मिलता नहीं था, वह प्राइवेट में आकर डिलीवरी में सहयोग करती थी। इसी से उसका गुजारा चलता था। इस संबंध में सीएचसी अधीक्षक डॉ. सिद्धार्थ वर्मा का कहना है कि यहां तैनात सभी दाइयों को लगभग तीन माह पहले हटा दिया गया था। दाइयां मरीजों को प्राइवेट नर्सिंग होम ले जाती थीं।
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अछल्दा विकास खंड के सुभानपुर की फूलमती (60) पत्नी गयादीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राइवेट तौर पर दाई का काम करती थी। तीन महीने पहले उसे सीएचसी अधीक्षक डॉ. सिद्धार्थ वर्मा ने आरोपों के चलते हटा दिया था। तब से वह ड्यूटी लगाने के लिए परेशान घूम रही थी। रविवार की शाम चार बजे वह सीएचसी पहुंची और वहां तैनात डॉ. नवीन कुमार से ड्यूटी में लगवाने की गुहार की। उनके न पसीजने और दुत्कारे जाने पर उसने क्षुब्ध होकर अपने साथ लाई डाई को पी ली। शाम को सैफई में उसकी मौत ेेहो गई।
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डाई पीता देख डॉक्टर और अस्पताल के कर्मियों में हड़कंप मच गया। डॉक्टर ने आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कर उसका इलाज किया गया। इलाज के बाद तकरीबन तीन घंटे के बाद उसे सैफई मिनी पीजीआई रेफर कर दिया। अस्पताल कर्मियों ने बताया कि उक्त महिला को सरकार की ओर से कुछ मिलता नहीं था, वह प्राइवेट में आकर डिलीवरी में सहयोग करती थी। इसी से उसका गुजारा चलता था। इस संबंध में सीएचसी अधीक्षक डॉ. सिद्धार्थ वर्मा का कहना है कि यहां तैनात सभी दाइयों को लगभग तीन माह पहले हटा दिया गया था। दाइयां मरीजों को प्राइवेट नर्सिंग होम ले जाती थीं।
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