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सूखी पड़ी नहर व रजबहे, कैसे हो पलेवा
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औरैया। अन्नदाता इन दिनों बेहद परेशान है। गेहूं की फसल बोने का समय निकलता जा रहा है, लेकिन नहर और रजबहे सूखे पड़े हैं। किसान खेतों की पलेवा नहीं कर पा रहा है। इधर बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण नलकूप संचालन में परेशानी आ रही है। जिससे किसान चिंतित हैं।
नवंबर माह में गेहूं की बुवाई शुरू होती है। किसान अपने खेतों को बुवाई के लिए पूरी तरह से तैयार कर चुके हैं। अजीतमल क्षेत्र के मुरादगंज कस्बे से निकली मिश्रीपुर माइनर, फफूंद रजबहा समेत कई बंबों में पानी नहीं है। पानी न आने के कारण नहर सूखी पड़ी है।
जिससे किसानों के खेतों पर अभी तक पलेवा नहीं हो सका है। गेहूं की बुवाई लेट हो रही है, जिससे किसान परेशान हैं। इसके अलावा अन्य फसलों की सिंचाई भी प्रभावित है। वहीं बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण समय से बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जिससे निजी व सरकारी नलकूपों का संचालन नहीं हो पा रहा है।
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पड़रिया निवासी किसान कमलेश यादव ने बताया कि पहले महंगाई की मार और अब गेहूं की फसल बोने के लिए पलेवा की चिंता है। नहर व रजबहों में पानी न होने से फसल लेट हो रही है।
पुर्वा महासुख निवासी किसान राजवीर ने बताया कि यदि सरकार व जिला प्रशासन किसानों के हित के लिए समय से बिजली व नहरों में पानी दें। तभी किसानों की उन्नति हो सकती है।
रोशंगपुर निवासी किसान रामदत्त द्विवेदी ने बताया कि भोगनीपुर निचली गंग नहर में समय से पानी न छोड़ने के कारण फतेहपुर माइनर, रोशंगपुर माइनर, विलावा माइनर, एलचीनगर माइनर सूखी हैं।
नंदलाल का पुर्वा निवासी अख्तियार सिंह ने बताया कि गेहूं की बुवाई के लिए 15 से 30 नवंबर के बीच का समय सर्वोत्तम माना गया है। मगर मिश्रीपुर माइनर में पानी न आने भूमि खाली पड़ी है।
इन दिनों नहर व बंबों में सिल्ट सफाई चल रही है। जिसके कारण से अभी नहर में पानी नहीं आ सका है। दिसंबर के पहले सप्ताह में पानी छोड़ा जाएगा। - शिववीर सिंह, एक्सईएन भोगनीपुर प्रखंड निचली गंगा नहर इटावा।
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नवंबर माह में गेहूं की बुवाई शुरू होती है। किसान अपने खेतों को बुवाई के लिए पूरी तरह से तैयार कर चुके हैं। अजीतमल क्षेत्र के मुरादगंज कस्बे से निकली मिश्रीपुर माइनर, फफूंद रजबहा समेत कई बंबों में पानी नहीं है। पानी न आने के कारण नहर सूखी पड़ी है।
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जिससे किसानों के खेतों पर अभी तक पलेवा नहीं हो सका है। गेहूं की बुवाई लेट हो रही है, जिससे किसान परेशान हैं। इसके अलावा अन्य फसलों की सिंचाई भी प्रभावित है। वहीं बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण समय से बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जिससे निजी व सरकारी नलकूपों का संचालन नहीं हो पा रहा है।
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पड़रिया निवासी किसान कमलेश यादव ने बताया कि पहले महंगाई की मार और अब गेहूं की फसल बोने के लिए पलेवा की चिंता है। नहर व रजबहों में पानी न होने से फसल लेट हो रही है।
पुर्वा महासुख निवासी किसान राजवीर ने बताया कि यदि सरकार व जिला प्रशासन किसानों के हित के लिए समय से बिजली व नहरों में पानी दें। तभी किसानों की उन्नति हो सकती है।
रोशंगपुर निवासी किसान रामदत्त द्विवेदी ने बताया कि भोगनीपुर निचली गंग नहर में समय से पानी न छोड़ने के कारण फतेहपुर माइनर, रोशंगपुर माइनर, विलावा माइनर, एलचीनगर माइनर सूखी हैं।
नंदलाल का पुर्वा निवासी अख्तियार सिंह ने बताया कि गेहूं की बुवाई के लिए 15 से 30 नवंबर के बीच का समय सर्वोत्तम माना गया है। मगर मिश्रीपुर माइनर में पानी न आने भूमि खाली पड़ी है।
इन दिनों नहर व बंबों में सिल्ट सफाई चल रही है। जिसके कारण से अभी नहर में पानी नहीं आ सका है। दिसंबर के पहले सप्ताह में पानी छोड़ा जाएगा। - शिववीर सिंह, एक्सईएन भोगनीपुर प्रखंड निचली गंगा नहर इटावा।