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Auraiya News: अभियान थमा, फिर से अतिक्रमण के जाल में फंसा शहर
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औरैया। शहर में रेहड़ी संचालकों को खड़े होने के लिए सत्ती तालाब की जमीन पर प्राइवेट वाहनों की पार्किंग हो जाने से रेहड़ी संचालक सड़क किनारे पटरी पर आ गए। दुकानदारों ने बाहर सामान रखकर अतिक्रमण कर रखा है। पिछले दिनों नगर पालिका प्रशासन की ओर से अतिक्रमण कारियों के खिलाफ अभियान चलाया गया। अभियान बंद करने के एक-दो दिन बाद फिर से पूर्व की स्थिति बन गई है।
अतिक्रमण हटाओ अभियान में इस बार सख्ती नहीं देखने को मिली। जिसका खामियाजा आज भी राहगीर भुगत रहे है। जिन मुख्य मार्गों पर अभियान चला। वह अभी भी अतिक्रमण की चपेट में है। शहर के अंदर बाजारों में बुरा हाल देखने को मिल रहा है। वहां सड़कों पर अतिक्रमण की खुली छूट देखने को मिल रही है।
नगर पालिका प्रशासन अतिक्रमण को लेकर सख्त हुई, लेकिन दो दिन अभियान चलाकर अधिकारी शांत बैठ गए। सुभाष चौराहा से मंडी समिति और सुभाष चौराहा से खानपुर चौराहा तक चलाए गए अभियान में सिर्फ खानापूर्ति ही देखने को मिली। इस मार्ग पर बड़े शोरुम मालिकों, बैंक अधिकारियों को फुटपाथ पर अतिक्रमण न करने और नालों में कूड़ा न फेंकने की सख्त हिदायत दी गई थी, लेकिन आज भी उनमें सुधार नहीं देखने को मिला है। यही नहीं दोनों पर फुटपाथ तो दूर सड़कों तक कब्जा देखने को मिल रहा है। जिस कारण पालिका के सफाई कर्मचारियों को नाले व नालियों की सफाई करने में दिक्कत होती है।
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जल्द ही दूसरे चरण का अतिक्रमण हटाओ अभियान चलेगा। जिन बड़े दुकानदारों ने चेतावनी के बाद अतिक्रमण नहीं हटाया और कूड़ा फैला रहे हैं। उन्होंने नोटिस जारी किया जा चुका है। उनके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
- रामआसरे कमल, ईओ नगर
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सीन - एक
फोटो17एयूआरपी 20- बैंक के बाहर रखे जेनरेटर के पास पड़ा कूड़ा। संवाद
यमुना रोड पर एक बैंक के बाहर फुटपाथ पर रखे जनरेटर और उसके पास दुकानदारों द्वारा फेंका जा रहा कूड़ा। लोगों के लिए मुसीबत बन चुके हैं। यहां आस-पास के छोटे दुकानदार पालिका प्रशासन पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगा रहे है। उनका कहना है कि इनका कब्जा हटाने में वह पीछे गए और उनकी पेटियों और टट्टरों से दिक्कत थी। जबकि सड़कों पर अधिक कब्जा तो बड़े शोरूम संचालकों ने कर रखा है। बाहर तक फर्नीचर रखते है।
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सीन-दो
फोटो17एयूआरपी 21- सड़क पर दुकानदारों की ओर किया गया अतिक्रमण। संवाद
यह नजारा जेसीज चौराहा के पास का है। नगर पालिका प्रशासन ने सबसे पहले इसी मार्ग पर अतिक्रमण चलाया था। इससे यह जगह खाली देखने को मिली थी, लेकिन अभियान के दूसरे दिन पहले जैसे नजारा देखने को मिला है। न तो दुकानदारों ने अतिक्रमण हटाया और न ही उनमें किसी तरह का पालिका प्रशासन का खौफ देखने को मिल रहा है। आलम यह है कि दुकानदार एक-दूसरे को देखकर सड़क कब्जाने में लगे हैं।
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अतिक्रमण हटाओ अभियान में इस बार सख्ती नहीं देखने को मिली। जिसका खामियाजा आज भी राहगीर भुगत रहे है। जिन मुख्य मार्गों पर अभियान चला। वह अभी भी अतिक्रमण की चपेट में है। शहर के अंदर बाजारों में बुरा हाल देखने को मिल रहा है। वहां सड़कों पर अतिक्रमण की खुली छूट देखने को मिल रही है।
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नगर पालिका प्रशासन अतिक्रमण को लेकर सख्त हुई, लेकिन दो दिन अभियान चलाकर अधिकारी शांत बैठ गए। सुभाष चौराहा से मंडी समिति और सुभाष चौराहा से खानपुर चौराहा तक चलाए गए अभियान में सिर्फ खानापूर्ति ही देखने को मिली। इस मार्ग पर बड़े शोरुम मालिकों, बैंक अधिकारियों को फुटपाथ पर अतिक्रमण न करने और नालों में कूड़ा न फेंकने की सख्त हिदायत दी गई थी, लेकिन आज भी उनमें सुधार नहीं देखने को मिला है। यही नहीं दोनों पर फुटपाथ तो दूर सड़कों तक कब्जा देखने को मिल रहा है। जिस कारण पालिका के सफाई कर्मचारियों को नाले व नालियों की सफाई करने में दिक्कत होती है।
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जल्द ही दूसरे चरण का अतिक्रमण हटाओ अभियान चलेगा। जिन बड़े दुकानदारों ने चेतावनी के बाद अतिक्रमण नहीं हटाया और कूड़ा फैला रहे हैं। उन्होंने नोटिस जारी किया जा चुका है। उनके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
- रामआसरे कमल, ईओ नगर
सीन - एक
फोटो17एयूआरपी 20- बैंक के बाहर रखे जेनरेटर के पास पड़ा कूड़ा। संवाद
यमुना रोड पर एक बैंक के बाहर फुटपाथ पर रखे जनरेटर और उसके पास दुकानदारों द्वारा फेंका जा रहा कूड़ा। लोगों के लिए मुसीबत बन चुके हैं। यहां आस-पास के छोटे दुकानदार पालिका प्रशासन पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगा रहे है। उनका कहना है कि इनका कब्जा हटाने में वह पीछे गए और उनकी पेटियों और टट्टरों से दिक्कत थी। जबकि सड़कों पर अधिक कब्जा तो बड़े शोरूम संचालकों ने कर रखा है। बाहर तक फर्नीचर रखते है।
सीन-दो
फोटो17एयूआरपी 21- सड़क पर दुकानदारों की ओर किया गया अतिक्रमण। संवाद
यह नजारा जेसीज चौराहा के पास का है। नगर पालिका प्रशासन ने सबसे पहले इसी मार्ग पर अतिक्रमण चलाया था। इससे यह जगह खाली देखने को मिली थी, लेकिन अभियान के दूसरे दिन पहले जैसे नजारा देखने को मिला है। न तो दुकानदारों ने अतिक्रमण हटाया और न ही उनमें किसी तरह का पालिका प्रशासन का खौफ देखने को मिल रहा है। आलम यह है कि दुकानदार एक-दूसरे को देखकर सड़क कब्जाने में लगे हैं।