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सूर्य को अर्घ्य देकर तोड़ा छठ व्रत
Auraiya
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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दिबियापुर( औरैया )। मंगलवार तड़के उगते सूर्य को अर्घ्य देकर 36 एवं 72 घंटे के निर्जला छठ व्रत को महिलाओं ने तोड़ा। गेल गांव, दिबियापुर स्थित नहर एवं एनटीपीसी बंबे पर सैकड़ों महिलाओं ने सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारायण किया। इससे पहले महिलाओं के साथ पुरुष एवं बच्चों ने पानी में डुबकी लगाकर मनोकामना मांगी। विधि विधान से पूजन अर्चन के उपरांत महिलाओं ने अपना व्रत तोड़ दिया।
महिलाएं छोटी छठ से व्रत रखना शुरू कर देतीं है। कुछ महिलाएं 72 घंटे एवं कुछ महिलाएं 36 घंटों तक निर्जला व्रत रखकर अपने बच्चों की सलामती के लिए व्रत रखतीं हैं। सोमवार को छठ पूजा पर महिलाओं ने अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा अर्चना की। वहीं मंगलवार को तड़के से ही विभिन्न स्थानों पर जुटीं महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इच्छित फल पूरा करने की मुराद मांगीं। इसके बाद महिलाओं ने छठ माता की पूजन सामग्री को प्रसाद के रूप में लोगों के बीच वितरित किया। आस्थावानों का कहना है कि यह एकमात्र ऐसा त्यौहार है, जब सूर्योदय एवं सूर्यास्त दोनों समय पर समान रूप से पूजा अर्चना की जाती है। सूर्यास्त की पूजा का मतलब है कि हम अपने बड़ों एवं पूर्वजों को भी सम्मान दें। सूर्योदय की पूजा का अर्थ है कि हम अपने आने वाले कल अर्थात अपने बच्चों को भी सम्मान दें।
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महिलाएं छोटी छठ से व्रत रखना शुरू कर देतीं है। कुछ महिलाएं 72 घंटे एवं कुछ महिलाएं 36 घंटों तक निर्जला व्रत रखकर अपने बच्चों की सलामती के लिए व्रत रखतीं हैं। सोमवार को छठ पूजा पर महिलाओं ने अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा अर्चना की। वहीं मंगलवार को तड़के से ही विभिन्न स्थानों पर जुटीं महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इच्छित फल पूरा करने की मुराद मांगीं। इसके बाद महिलाओं ने छठ माता की पूजन सामग्री को प्रसाद के रूप में लोगों के बीच वितरित किया। आस्थावानों का कहना है कि यह एकमात्र ऐसा त्यौहार है, जब सूर्योदय एवं सूर्यास्त दोनों समय पर समान रूप से पूजा अर्चना की जाती है। सूर्यास्त की पूजा का मतलब है कि हम अपने बड़ों एवं पूर्वजों को भी सम्मान दें। सूर्योदय की पूजा का अर्थ है कि हम अपने आने वाले कल अर्थात अपने बच्चों को भी सम्मान दें।
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