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दो और मोरों की मौत
ब्यूरो अमर उजाला/अमरोहा।
Updated Wed, 25 Apr 2018 01:04 AM IST
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जख्मी हालात में मिले दो और मोरों की मौत मंगलवार को हो गई। अब तक मरने वाले मोरों की संख्या नौ पहुंच गई है। सोमवार की शाम 11 वां मोर जख्मी मिला था, दो मोरों की हालत नाजुक बनी हुई है। उधर वन विभाग ने दूसरी रिपोर्ट भी थाने में दर्ज कराई है।
मंगलवार की सुबह वन विभाग के कार्यालय में दो और मोरों ने दम तोड़ दिया। इस मोर को डाक्टरों ने ठीक बताया था लेकिन, जंगल में छोड़ने जाने के दौरान मोर की मौत हो गई। यह मोर नौगावां सादात के जब्दा गांव में मिला था। जिसे डायल सौ पुलिस की गाड़ी ने वन विभाग को सौंपा। अब तक जख्मी मिलने वाले मोरों की संख्या 11 पहुंच गई हैं। जिनमें नौ मर चुके हैं जबकि, दो की हालत नाजुक बनी हुई है। तीनों मोरों का इलाज सियाली जागीर के रेंज कार्यालय में चल रहा था, जिनमें एक मोर ने मंगलवार को दम तोड़ दिया। यूं तो वन विभाग इनकी हालत में सुधार होने की बात कह रहा है। ये बचेंगे या नहीं, कहना मुश्किल है। गौरतलब है कि नौ अप्रैल को ढबारसी के बागों में मोरों के जख्मी मिलने का सिलसिला शुरु हुआ था। यह अभी तक नहीं थमा है। बल्कि जिले में दायरा बढ़ने लगा है। पहले ढबारसी, फिर सैदनगली और अब नौगावां सादात क्षेत्र में भी मोरों पर आफत का संकेत मिल गया है।
विभाग ने हालात पर काबू पाने के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली के वैज्ञानिकों से भी मदद मांगी है। लेकिन, उनकी टीम अभी तक यहां नहीं पहुंची। फिर भी वन विभाग ने दो मोरों के शव बरेली भिजवा दिए थे। जिससे उनकी मौत के कारण साफ हो सके। इसके अलावा वन विभाग की ओर से एक रिपोर्ट सैदनगली थाने में दर्ज कराई गई है। जिसमें बाग स्वामियों को अप्रत्यक्ष रुप से मौत का जिम्मेदार माना गया। इसमें बाग स्वामियों पर प्राकृतिक रुप से इकट्ठा हुए पानी में कीटनाशक मिलाने का आरोप है। वहीं दूसरी रिपोर्ट आदमपुर थाने में भी दर्ज कराई गई है। रिपोर्ट दर्ज होने से बाग स्वामियों में हड़कंप मचा हुआ है।
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मंगलवार की सुबह वन विभाग के कार्यालय में दो और मोरों ने दम तोड़ दिया। इस मोर को डाक्टरों ने ठीक बताया था लेकिन, जंगल में छोड़ने जाने के दौरान मोर की मौत हो गई। यह मोर नौगावां सादात के जब्दा गांव में मिला था। जिसे डायल सौ पुलिस की गाड़ी ने वन विभाग को सौंपा। अब तक जख्मी मिलने वाले मोरों की संख्या 11 पहुंच गई हैं। जिनमें नौ मर चुके हैं जबकि, दो की हालत नाजुक बनी हुई है। तीनों मोरों का इलाज सियाली जागीर के रेंज कार्यालय में चल रहा था, जिनमें एक मोर ने मंगलवार को दम तोड़ दिया। यूं तो वन विभाग इनकी हालत में सुधार होने की बात कह रहा है। ये बचेंगे या नहीं, कहना मुश्किल है। गौरतलब है कि नौ अप्रैल को ढबारसी के बागों में मोरों के जख्मी मिलने का सिलसिला शुरु हुआ था। यह अभी तक नहीं थमा है। बल्कि जिले में दायरा बढ़ने लगा है। पहले ढबारसी, फिर सैदनगली और अब नौगावां सादात क्षेत्र में भी मोरों पर आफत का संकेत मिल गया है।
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विभाग ने हालात पर काबू पाने के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली के वैज्ञानिकों से भी मदद मांगी है। लेकिन, उनकी टीम अभी तक यहां नहीं पहुंची। फिर भी वन विभाग ने दो मोरों के शव बरेली भिजवा दिए थे। जिससे उनकी मौत के कारण साफ हो सके। इसके अलावा वन विभाग की ओर से एक रिपोर्ट सैदनगली थाने में दर्ज कराई गई है। जिसमें बाग स्वामियों को अप्रत्यक्ष रुप से मौत का जिम्मेदार माना गया। इसमें बाग स्वामियों पर प्राकृतिक रुप से इकट्ठा हुए पानी में कीटनाशक मिलाने का आरोप है। वहीं दूसरी रिपोर्ट आदमपुर थाने में भी दर्ज कराई गई है। रिपोर्ट दर्ज होने से बाग स्वामियों में हड़कंप मचा हुआ है।
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