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Amroha News: आज मां शैलपुत्री की पूजा से चैत्र नवरात्र की शुरुआत
Sun, 30 Mar 2025 01:37 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sun, 30 Mar 2025 01:37 AM IST
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अमरोहा। रविवार से चैत्र नवरात्र शुरू हो रही है। जिसके चलते मंदिरों की साफ सफाई करते हुए सजाया गया है। मां शैलपुत्री की पूजा के साथ नवरात्र की शुरुआत होगी। मंदिरों पर पुलिस कर्मियों की ड्यूटी भी लगाई गई है। मंदिरों में माता रानी का गुणगान होगा। अगले नौ दिन तक आस्था की बयार बहेगी।
शहर के वासुदेव तीर्थ स्थल, बाबा गंगानाथ मंदिर, मंदिर चौरासी घंटेवाला, दुर्गा मंदिर, रियासत वाला मंदिर, बहलौलपुर मंदिर आदि में माता रानी की पूजा-अर्चना को भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हुए परिवार की खुशहाली की कामना की जाएगी। इसके अलावा क्षेत्र के अन्य मंदिरों में भी पूजा अर्चना की जाएगी। सुबह शाम मंदिरों में पूजा अर्चना की जाएगी। शाम को मंदिरों में माता रानी का गुणगान होगा। उधर, नवरात्र के चलते मंदिरों के बाहर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े बंदोबस्त रहेंगे। पुलिस सुरक्षा में मुस्तैद रहेगी। नारियल व अन्य पूजन सामग्री की खरीदारी भी हो रही है। शहर के लकड़ा, कोट, बड़ा बाजार, जट बाजार, बटवाल समेत अन्य बाजार में दुकानें लोगों ने पूजा-पाठ पंचमेवा व अन्य पूजन सामग्री खरीदी। पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-शांति, धन लाभ व कॅरिअर में मनचाहे परिणामों की प्राप्ति होती हैं।
पहला दिन: मां शैलपुत्री: मां दुर्गा का पहला रूप शैलपुत्री है। हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें ये नाम मिला। मां शैलपुत्री शक्ति और स्थिरता का प्रतीक हैं। इनकी पूजा से जीवन में मजबूती आती है।
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दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी: मां ब्रह्मचारिणी तपस्या और ज्ञान की देवी हैं। इनका स्वरूप सादगी भरा है। इनकी आराधना से इंसान की बुद्धि और संयम बढ़ोतरी होती है।
तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा: मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का चंद्रमा है। ये देवी शांति और कल्याण की प्रतीक हैं। इनकी पूजा से भय दूर होता है।
चौथा दिन: मां कुष्मांडा: मान्यताओं के अनुसार, मां कुष्मांडा ने अपनी हंसी से ब्रह्मांड की रचना की है। मां कुष्मांडा ब्रह्मांडीय ऊर्जा की देवी हैं। इनकी पूजा से स्वास्थ्य और शक्ति मिलती है।
पांचवां दिन: मां स्कंदमाता: मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की मां हैं। ये देवी मातृत्व और साहस का प्रतीक हैं। इनकी आराधना से संतान सुख और सुरक्षा मिलती है।
छठा दिन: मां कात्यायनी: मां कात्यायनी योद्धा रूप में हैं। ये देवी शक्ति और वीरता की देवी हैं। इनकी पूजा से दुश्मनों पर विजय मिलती है।
सातवां दिन: मां कालरात्रि: मां कालरात्रि का रूप भयंकर है। ये बुराई और विनाशकारी शक्तियों का नाश करती हैं। इनकी पूजा से नकारात्मकता दूर होती है।
आठवां दिन: मां महागौरी: मां महागौरी शांति और समृद्धि की प्रतीक हैं। इनका रंग गोरा और स्वरूप शांत है। इस दिन कन्या पूजन भी किया जाता है।
नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री: मां सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों को देने वाली हैं। इस दिन राम नवमी भी मनाई जाती है, जो भगवान राम के जन्म का उत्सव है। इनकी पूजा से हर काम में सफलता मिलती है।
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शहर के वासुदेव तीर्थ स्थल, बाबा गंगानाथ मंदिर, मंदिर चौरासी घंटेवाला, दुर्गा मंदिर, रियासत वाला मंदिर, बहलौलपुर मंदिर आदि में माता रानी की पूजा-अर्चना को भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हुए परिवार की खुशहाली की कामना की जाएगी। इसके अलावा क्षेत्र के अन्य मंदिरों में भी पूजा अर्चना की जाएगी। सुबह शाम मंदिरों में पूजा अर्चना की जाएगी। शाम को मंदिरों में माता रानी का गुणगान होगा। उधर, नवरात्र के चलते मंदिरों के बाहर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े बंदोबस्त रहेंगे। पुलिस सुरक्षा में मुस्तैद रहेगी। नारियल व अन्य पूजन सामग्री की खरीदारी भी हो रही है। शहर के लकड़ा, कोट, बड़ा बाजार, जट बाजार, बटवाल समेत अन्य बाजार में दुकानें लोगों ने पूजा-पाठ पंचमेवा व अन्य पूजन सामग्री खरीदी। पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-शांति, धन लाभ व कॅरिअर में मनचाहे परिणामों की प्राप्ति होती हैं।
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पहला दिन: मां शैलपुत्री: मां दुर्गा का पहला रूप शैलपुत्री है। हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें ये नाम मिला। मां शैलपुत्री शक्ति और स्थिरता का प्रतीक हैं। इनकी पूजा से जीवन में मजबूती आती है।
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दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी: मां ब्रह्मचारिणी तपस्या और ज्ञान की देवी हैं। इनका स्वरूप सादगी भरा है। इनकी आराधना से इंसान की बुद्धि और संयम बढ़ोतरी होती है।
तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा: मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का चंद्रमा है। ये देवी शांति और कल्याण की प्रतीक हैं। इनकी पूजा से भय दूर होता है।
चौथा दिन: मां कुष्मांडा: मान्यताओं के अनुसार, मां कुष्मांडा ने अपनी हंसी से ब्रह्मांड की रचना की है। मां कुष्मांडा ब्रह्मांडीय ऊर्जा की देवी हैं। इनकी पूजा से स्वास्थ्य और शक्ति मिलती है।
पांचवां दिन: मां स्कंदमाता: मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की मां हैं। ये देवी मातृत्व और साहस का प्रतीक हैं। इनकी आराधना से संतान सुख और सुरक्षा मिलती है।
छठा दिन: मां कात्यायनी: मां कात्यायनी योद्धा रूप में हैं। ये देवी शक्ति और वीरता की देवी हैं। इनकी पूजा से दुश्मनों पर विजय मिलती है।
सातवां दिन: मां कालरात्रि: मां कालरात्रि का रूप भयंकर है। ये बुराई और विनाशकारी शक्तियों का नाश करती हैं। इनकी पूजा से नकारात्मकता दूर होती है।
आठवां दिन: मां महागौरी: मां महागौरी शांति और समृद्धि की प्रतीक हैं। इनका रंग गोरा और स्वरूप शांत है। इस दिन कन्या पूजन भी किया जाता है।
नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री: मां सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों को देने वाली हैं। इस दिन राम नवमी भी मनाई जाती है, जो भगवान राम के जन्म का उत्सव है। इनकी पूजा से हर काम में सफलता मिलती है।