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Amroha News: जिला अस्पताल में थायराइड और बीपी की दवा खत्म, मरीज परेशान
Thu, 10 Apr 2025 01:56 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 10 Apr 2025 01:56 AM IST
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अमरोहा।
बीपी और थायराइड के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। लेकिन, जिला अस्पताल में दोनों ही बीमारियों की दवा नहीं है। अस्पताल के चिकित्सक बीपी और थायराइड की दवा मेडिकल से खरीदने के लिए पर्चे पर लिख रहे हैं। जिससे मरीजों की जेब ढीली हो रही है। मरीजों का आरोप है कि डॉक्टर और मेडिकल स्टोर संचालकों की सांठगांठ से यह खेल चल रहा है।
जिला अस्पताल में अधिकांश मर्ज की जांचों की मशीन आ गई हैं, लेकिन मर्ज की दवाओं की उपलब्धता नहीं है। जिसके कारण मरीज व तीमारदारों को निजी मेडिकल स्टोर या जन औषधि केंद्र पर रुपये देकर दवा खरीदनी पड़ती हैं। आरोप है कि जिला अस्पताल में सिर्फ मरीज को देखा जा रहा है। इसके बाद सौ से पांच सौ रुपये की दवाइयां पर्चे पर लिखी जा रही हैं। बीपी और थायराइड ऐसी बीमारी है, जिसकी दवाई रेगुलर खानी पड़ती है। बावजूद इसके जिला अस्पताल में करीब एक सप्ताह से इनकी दवा नहीं है।
यह दवाइयां बाहरी स्टोर से खरीदने को मजबूर
दर्द निवारक क्रीम, खांसी की सिरप, थायराइड की गोली, बीपी की दवा, आंखों की ड्रोप, डिप्रेशन संबंधित दवाएं बाहरी स्टोर के लिए पर्चे पर लिखीं जा रही हैं।
मरीज बोले- कमीशन के चक्कर में चल रहा खेल
मरीजों का आरोप है कि जब सरकार द्वारा दवाइयों का पूरा भंडारण किया जा रहा है, इसके बावजूद भी निजी स्टोरों से दवाई लिखी जा रही है। मरीजों का कहना है कि मेडिकल स्टोर संचालकों की सांठगांठ होने के कारण कमीशन के चक्कर में ऐसी दवा लिख दी जाती है, जो बाहरी स्टोर पर ही मिलती है। कुछ लोगों ने बताया कि कई बार जिला अस्पताल में कई दवा कंपनी के एमआर भी खूमते दिखाई दिए हैं।
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बोले मरीज
माउथ पेंट, जिसे ओरल थ्रश या कैंडिडिआसिस के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है, एक एंटीफंगल दवा है जो मुंह, गले या जीभ के फंगल संक्रमण को दूर करने में मदद करती है। यह दवा जिला अस्पताल के स्टोर में नहीं मिली, मजबूरी में बाहरी स्टोर से खरीदनी पड़ेगी।-- रुबीना, अमरोहा
- डिप्रेशन संबंधित चिकित्सक से मिलीं, जिन्होंने पर्चे पर दवा लिख दी। लेकिन वह दवा जिला अस्पताल के निशुल्क मेडिकल स्टोर में नहीं मिली, जिसके कारण बाहरी जनऔषधि केंद्र पर जाकर खरीदनी पड़ी। अस्पताल में दवाई न मिलने से परेशानी होती है।-- करेशा, मुकर्रमपुर
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- जिला अस्पताल में कुछ चिकित्सक प्रशिक्षु के रूप में हैं, जो गलती से बाहरी स्टोर के लिए दवाईं लिख देते होंगे। वैसे अस्पताल में कुछ दवाईं हैं या नहीं, इस संबंध में जानकारी करेंगे।-- - अश्वनी भंडारी, कार्यवाहक सीएमएस
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बीपी और थायराइड के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। लेकिन, जिला अस्पताल में दोनों ही बीमारियों की दवा नहीं है। अस्पताल के चिकित्सक बीपी और थायराइड की दवा मेडिकल से खरीदने के लिए पर्चे पर लिख रहे हैं। जिससे मरीजों की जेब ढीली हो रही है। मरीजों का आरोप है कि डॉक्टर और मेडिकल स्टोर संचालकों की सांठगांठ से यह खेल चल रहा है।
जिला अस्पताल में अधिकांश मर्ज की जांचों की मशीन आ गई हैं, लेकिन मर्ज की दवाओं की उपलब्धता नहीं है। जिसके कारण मरीज व तीमारदारों को निजी मेडिकल स्टोर या जन औषधि केंद्र पर रुपये देकर दवा खरीदनी पड़ती हैं। आरोप है कि जिला अस्पताल में सिर्फ मरीज को देखा जा रहा है। इसके बाद सौ से पांच सौ रुपये की दवाइयां पर्चे पर लिखी जा रही हैं। बीपी और थायराइड ऐसी बीमारी है, जिसकी दवाई रेगुलर खानी पड़ती है। बावजूद इसके जिला अस्पताल में करीब एक सप्ताह से इनकी दवा नहीं है।
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यह दवाइयां बाहरी स्टोर से खरीदने को मजबूर
दर्द निवारक क्रीम, खांसी की सिरप, थायराइड की गोली, बीपी की दवा, आंखों की ड्रोप, डिप्रेशन संबंधित दवाएं बाहरी स्टोर के लिए पर्चे पर लिखीं जा रही हैं।
मरीज बोले- कमीशन के चक्कर में चल रहा खेल
मरीजों का आरोप है कि जब सरकार द्वारा दवाइयों का पूरा भंडारण किया जा रहा है, इसके बावजूद भी निजी स्टोरों से दवाई लिखी जा रही है। मरीजों का कहना है कि मेडिकल स्टोर संचालकों की सांठगांठ होने के कारण कमीशन के चक्कर में ऐसी दवा लिख दी जाती है, जो बाहरी स्टोर पर ही मिलती है। कुछ लोगों ने बताया कि कई बार जिला अस्पताल में कई दवा कंपनी के एमआर भी खूमते दिखाई दिए हैं।
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बोले मरीज
माउथ पेंट, जिसे ओरल थ्रश या कैंडिडिआसिस के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है, एक एंटीफंगल दवा है जो मुंह, गले या जीभ के फंगल संक्रमण को दूर करने में मदद करती है। यह दवा जिला अस्पताल के स्टोर में नहीं मिली, मजबूरी में बाहरी स्टोर से खरीदनी पड़ेगी।
- डिप्रेशन संबंधित चिकित्सक से मिलीं, जिन्होंने पर्चे पर दवा लिख दी। लेकिन वह दवा जिला अस्पताल के निशुल्क मेडिकल स्टोर में नहीं मिली, जिसके कारण बाहरी जनऔषधि केंद्र पर जाकर खरीदनी पड़ी। अस्पताल में दवाई न मिलने से परेशानी होती है।
- जिला अस्पताल में कुछ चिकित्सक प्रशिक्षु के रूप में हैं, जो गलती से बाहरी स्टोर के लिए दवाईं लिख देते होंगे। वैसे अस्पताल में कुछ दवाईं हैं या नहीं, इस संबंध में जानकारी करेंगे।