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बालकृष्ण कांड में बयान दर्ज कराने को तैयार नहीं कोई
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अमरोहा। धनौरा पुलिस हिरासत में अनुसूचित जाति के बालकृष्ण की मौत के मामले में कोई भी व्यक्ति अपने बयान दर्ज कराने को तैयार नहीं है। 22 दिन बाद भी किसी ने बयान दर्ज नहीं कराए है। इसके चलते जांच अधिकारी एडीएम ने पंद्रह दिन और बढ़ा दिए हैं। अब तीस जनवरी तक लोग प्रकरण से संबंधित बयान दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद एडीएम परिजनों और आरोपी पुलिस कर्मियों के बयान दर्ज कर जांच पूरी करने की कार्रवाई करेंगे।
कार चोरी के मामले में चार दिन तक पुलिस हिरासत में रहे अनुसूचित जाति के बालकृष्ण की 26 दिसंबर को धनौरा पुलिस की हिरासत में मौत हो गई थी। परिजनों ने पुलिस पर गलत तरीके से हिरासत में रखने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। इस मामले में परिजनों द्वारा इंस्पेक्टर अरविंद मोहन शर्मा सहित छह पुलिस कर्मियों पर मुकदमा दर्ज कराया था। एसपी ने ग्यारह पुलिस कर्मियों को सस्पेंड भी कर दिया था। बालकृष्ण की मौत का मामला शासन तक गूंजा। एसपी ने मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच सौंपी। जबकि पूरे प्रकरण की जांच सीओ धनौरा मोनिका यादव कर रही हैं। अभी तक विवेचना और जांच उधर में लटकी हैं।
इतना ही नहीं बालकृष्ण प्रकरण में मजिस्ट्रीयल जांच भी ठंडे बस्ते में पड़ी है। लोगों को अपने बयान दर्ज कराने के लिए 15 जनवरी तक का समय दिया था। जांच शुरू होने के 22 दिन बाद भी कोई व्यक्ति प्रकरण से संबंधित बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचा है। इसके चलते एडीएम गुलाब चंद ने तारीख को बढ़ाकर 30 जनवरी कर दिया है। एडीएम प्रशासन गुलाब चंद के मुताबिक अगर इस बीच भी कोई व्यक्ति अपने बयान दर्ज नहीं कराता है तो वादी और प्रतिवादी के बयान दर्ज कर जांच उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी।
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कार चोरी के मामले में चार दिन तक पुलिस हिरासत में रहे अनुसूचित जाति के बालकृष्ण की 26 दिसंबर को धनौरा पुलिस की हिरासत में मौत हो गई थी। परिजनों ने पुलिस पर गलत तरीके से हिरासत में रखने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। इस मामले में परिजनों द्वारा इंस्पेक्टर अरविंद मोहन शर्मा सहित छह पुलिस कर्मियों पर मुकदमा दर्ज कराया था। एसपी ने ग्यारह पुलिस कर्मियों को सस्पेंड भी कर दिया था। बालकृष्ण की मौत का मामला शासन तक गूंजा। एसपी ने मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच सौंपी। जबकि पूरे प्रकरण की जांच सीओ धनौरा मोनिका यादव कर रही हैं। अभी तक विवेचना और जांच उधर में लटकी हैं।
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इतना ही नहीं बालकृष्ण प्रकरण में मजिस्ट्रीयल जांच भी ठंडे बस्ते में पड़ी है। लोगों को अपने बयान दर्ज कराने के लिए 15 जनवरी तक का समय दिया था। जांच शुरू होने के 22 दिन बाद भी कोई व्यक्ति प्रकरण से संबंधित बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचा है। इसके चलते एडीएम गुलाब चंद ने तारीख को बढ़ाकर 30 जनवरी कर दिया है। एडीएम प्रशासन गुलाब चंद के मुताबिक अगर इस बीच भी कोई व्यक्ति अपने बयान दर्ज नहीं कराता है तो वादी और प्रतिवादी के बयान दर्ज कर जांच उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी।
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